ऐक्टर सानंद वर्मा ने बताया- ‘भाबीजी घर परहैं’ में मनमोहन तिवारी के रोल के लिये दिया था ऑडिशन
ऐक्टर सानंद वर्मा ने बताया- ‘भाबीजी घर परहैं’ में मनमोहन तिवारी के रोल के लिये दिया था ऑडिशन मुंबई,जनवरी 2025:सानंद वर्मा ने एण्डटीवी के कल्ट कमेडी शो ‘भाबीजीघर पर हैं’ में अनोखे लाल सक्सेना के अनोखे, एनर्जेटिक और मजेदार अंदाज से दर्शकोंको खूब हंसाया है। उनके खास डायलॉग “आई लाइक इट” और अनोखी हरकतों ने सक्सेना को दर्शकोंका चहेता किरदार बना दिया है। इस खास बातचीत में सानंद वर्मा ने इस प्यारे किरदार कोनिभाने, संघर्षों से भरे अपने सफर और शो से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी में आए बदलावोंके बारे में दिल खोलकर बात की। अनोखेलाल सक्सेना बेहद अनूठा किरदार है। क्या चीज उसे सबसे अलग बनाती है? सक्सेना एक ऐसा किरदार हैजो बिलकुल अलग है! उसकी अजीब आदतें, आशावादी नजरिया और हैरान करने वाला व्यवहार उसेयादगार बनाते हैं। अपने अनोखेपन के बावजूद, उसमें एक मासूमियत है जो दर्शकों से जुड़तीहै। सक्सेना का किरदार भारतीय टेलीविजन पर सबसे खास है। मुझे यकीन है कि ऐसा कोई औरकिरदार नहीं है जो गिरगिट पालता हो, उनका खून पीता हो, सांप के काटने का मजा लेता हो,या फिर मजे के लिए बिजली का झटका खाता हो! उसकी ये विचित्र आदतें उसे सबसे अलग बनातीहैं। सक्सेना को बनाने के लिए काफी सोच-विचार और प्रयोग की जरूरत पड़ी, लेकिन उसके अजीबमगर प्यारे व्यवहार ने दर्शकों के दिलों में गहरी छाप छोड़ी है। उसकी अप्रत्याशित औरअनोखी विशेषताएं ही उसे भारतीय टेलीविजन की दुनिया में एक यादगार और आइकनिक किरदारबनाती हैं। सक्सेनासे आप व्यक्तिगत रूप से कितना जुड़ाव महसूस करते हैं? सक्सेना का किरदार मेरेव्यक्तित्व को कई तरीकों से दर्शाता है। उसकी तरह ही मैं भी हर स्थिति में हास्य औरआनंद ढूंढने की कोशिश करता हूं , फिर चाहे हालात कितने भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हो।उसका मजाकिया अंदाज और सकारात्मक नजरिया मुझसे काफी गहराई से जुड़ा हुआ है। सक्सेनाका किरदार निभाना बिल्कुल नैचुरल लगता है, जैसे कि मैं खुद को ही स्क्रीन पर प्रस्तुतकर रहा हूं। ‘भाबीजीघर पर हैं‘ के साथ जुड़ने के बाद आपके साथ सबसे अच्छी चीज क्या हुई है? ‘भाबीजी घर पर हैं‘ सिर्फएक शो नहीं है, बल्कि मेरी जिंदगी को बदलने वाले आशीर्वाद की तरह है। इसने मुझे बहुतपहचान दिलाई है और एक ऐसा किरदार बन गया है, जिससे लोग प्यार करते हैं। मुझे याद हैएक बार हम सेंट्रल लंदन में शूटिंग कर रहे थे और भीड़ में से लोग मेरे पास आये और कहनेलगे, ‘‘सक्सेना जी, आई लाइक इट!‘‘ उन्होंने मेरे साथ तस्वीरें खिंचवाई और वह बेहद खुशनुमाअनुभव था। उस समय मुझे अहसास हुआ कि यह किरदार और शो दुनिया भर में लोगों के लिये क्यामायने रखता है। यह शो और सक्सेना बतौर ऐक्टर मेरी जिंदगी का अभिन्न हिस्सा बन गये हैंऔर मैं इसके लिये हमेशा आभारी रहूंगा। सक्सेनाके मशहूर डायलॉग ‘‘आई लाइक इट‘ के पीछे क्या राज़ है? (हंसते हुये) सक्सेना कामशहूर डायलग ‘आई लाइक इट‘ उसकी अनोखी और मजेदार शख्सियत को पूरी तरह दर्शाता है। यहसिंपल होते हुए भी बेहद असरदार है, और दर्शकों के प्यार ने इसे आइकनिक बना दिया है।इसके पीछे की कहानी भी उतनी ही दिलचस्प है। शुरुआती दिनों में, हमारे डायरेक्टर शशांकबाली जी ने कैरेक्टर पर चर्चा करते हुए कैजुअली ‘आई लाइक इट‘ कहा। यह बात हमारे राइटरमनोज संतोषी सर ने नोटिस की और इसे सक्सेना की पर्सनैलिटी का हिस्सा बना दिया। तब सेयह ऐसा कैचफ्रेज़ बन गया, जिससे लोग अनोखे लाल सक्सेना को जोड़ते हैं। अक्सर लोग मुझेसड़क पर रोककर यह डायलॉग बोलने के लिये कहते हैं और जो प्यार और खुशी इससे मिलती है,वह वाकई दिल को छू जाती है। मुंबईआने के बाद आपने बतौर सिंगर अपना सफर शुरू किया था। क्या आप उस विषय में और मशहूर म्यूजिकडायरेक्टर्स के साथ अपने कनेक्शन के बारे में हमें कुछ और बता सकते हैं। हां, यह बिल्कुल सच है!मैं जब मुंबई आया था, तो मैंने सिंगर के रूप में अपना सफर शुरू किया था। मुझे कुछ दिग्गजसंगीतकारों के साथ अच्छे रिश्ते बनाने का सौभाग्य मिला, जैसे कि राम लक्ष्मण और नदीमश्रवण। संगीत हमेशा से ही मेरे दिल के करीब रहा है और आज भी मैं दिल से यही चाहता हूंकि सिंगर के रूप में मेरी पहचान बने। सिंगिंग से मुझे बहुत खुशी मिलती है और उम्मीदहै कि मैं अपने ऐक्टिंग कॅरियर के साथ इसे आगे भी एक्सप्लोर कर पाऊंगा। शायद एक दिनयह दुनिया मुझे मेरी आवाज से भी पहचानेगी, जैसे अभी वे सक्सेना जी के अनोखे अंदाज केलिये मुझे जानते हैं। ऑडिशनके दौरान क्या आपको पूरा यकीन था कि यह रोल आपको ही मिलेगा? सच तो यह है कि मैंने इसकिरदार के लिये कभी ऑडिशन दिया ही नहीं था। जब निर्माताओं ने भाबीजी घर पर हैं के ऑडिशन्सकी घोषणा की थी, तो मैंने मनमोहन तिवारी के रोल के लिये अप्लाई किया था। मैंने खूबतैयारी की थी और सोचा था कि अपने अनोखे अंदाज़ से मैं उस किरदार में जान डाल दूंगा।लेकिन अडिशन के दौरान, क्रिएटिव टीम को लगा कि मेरी एनर्जी और सहजता अनोखे लाल सक्सेनाके किरदार के लिए ज्यादा फिट बैठती है। सानंद वर्मा का छुट्टी कादिन कैसा होता है? मुझे किताबें पढ़कर, फिल्मेंदेखकर या अपने प्रियजनों के साथ लंबे समय तक बातें करके समय बिताना अच्छा लगता है।इसके साथ ही में अपने आस-पास के लोगों को भी बहुत गौर से देखता हूं, जिससे मुझे रिचार्जहोने और अपने काम में नये आइडियाज को शामिल करने में मदद मिलती है। क्याआप अपने प्रशंसकों को कोई संदेश देना चाहेंगे? अनोखे लाल सक्सेना को इतनाप्यार देने और मेरी जिंदगी में खुशियां भरने के लिये आप सभी को बहुत-बहुत शुक्रिया।आपके सपोर्ट से मुझे और भी ज्यादा मेहनत करने और आप सभी का मनोरंजन करते रहने की प्रेरणामिलती है। ‘भाबीजी घर पर हैं’ देखते रहिये, क्योंकि ‘आई लाइक इट! ‘भाबीजी घर पर हैं’ में सानंद वर्मा को अनोखेलाल सक्सेना के रूप में देखिये, हर सोमवार से शुक्रवार, रात 10:30 बजे, सिर्फ एण्डटीवीपर!