शिक्षा
रविवि सेमेस्टर एग्जाम इस बार भी हो सकता है ऑनलाइन आज कार्यपरिषद की बैठक
रायपुर 3 जून । रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय की सेमेस्टर परीक्षा इस बार भी ऑनलाइन मोड में हो सकती है । विश्वविद्यालय ने इसकी तैयारी कर ली है । शुक्रवार को रविवि में होने वाली कार्यपरिषद की बैठक में इसी फार्मूले पर मुहर लगने की संभावना है । उधर , दुर्ग विवि की सेमेस्टर परीक्षा ऑनलाइन मोड पर शुरू हो गई है । इसे लेकर माना जा रहा है कि रविवि में भी इसके अनुसार ही परीक्षा होगी । कोरोना संक्रमण की वजह से दो साल से रविवि की परीक्षाएं ऑनलाइन मोड पर चल रही है । पिछली बार वार्षिक परीक्षा के पेपर भी छात्रों ने घर से लिखकर जमा किए । अब सेमेस्टर के लिए भी यही फार्मूला लागू करने की तैयारी है ।
व्यापम ने जारी किए शिक्षक भर्ती परीक्षा के परिणाम
छत्तीसगढ़ : छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मण्डल द्वारा शिक्षक, सहायक शिक्षक एवं व्याख्याता के लिए आयोजित भर्ती परीक्षा के परिणाम जारी कर दिए गए हैं। अभ्यर्थी व्यापम की वेबसाइट vypam.cgstate.gov.in में अपनी प्रोफाईल में लॉगिन कर परिणाम देख सकते हैं। व्यापम द्वारा ली लिखित परीक्षा में प्राप्त कुल अंकों में अतिथि शिक्षकों के बोनस अंक जोड़कर परीक्षा परिणाम घोषित किए गए हैं।
मेरिट लिस्ट और रिजल्ट देखें -
सहायक शिक्षक (ई. एवं टी. संवर्ग), भर्ती परीक्षा (SEAT23) - 2023 के
Result - vyapamonline.cgstate.gov.in/online/
Merit List - vyapam.cgstate.gov.in/sites/default/files/2023-07/MERIT_ASSISTANT_TEACHER.pdf
शिक्षक (ई. एवं टी. संवर्ग), भर्ती परीक्षा (SEAT23) - 2023 के
Result - vyapamonline.cgstate.gov.in/online/
Merit List - vyapam.cgstate.gov.in/sites/default/files/2022-12/MERIT_TEACHER.pdf
व्याख्याता (वाणिज्य) भर्ती परीक्षा (SEAT23) - 2023 के
Result - vyapamonline.cgstate.gov.in/online/
Merit List - vyapam.cgstate.gov.in/sites/default/files/2023-07/MERIT_LECTURER_COMMERCE.pdf
व्याख्याता (गणित) भर्ती परीक्षा (SEAT23) - 2023 के
Result - vyapamonline.cgstate.gov.in/online/
Merit List - vyapam.cgstate.gov.in/sites/default/files/2023-07/MERIT_LECTURER_MATH.pdf
व्याख्याता (भौतिकी) भर्ती परीक्षा (SEAT23) - 2023 के
Result - vyapamonline.cgstate.gov.in/online/
Merit List - vyapam.cgstate.gov.in/sites/default/files/2023-07/MERIT_LECTURER_PHYSICS.pdf
'जादुई पिटारा' से शिक्षा-दीक्षा
रायपुर । आगामी शिक्षण सत्र 16 जून 2024 से छत्तीसगढ़ के तीन से आठ वर्ष की आयु के सभी बच्चों अर्थात् बालबाड़ी तथा कक्षा 1 व 2 में ‘जादुई पिटारा’ के माध्यम से पढ़ाई-लिखाई कराने की कार्ययोजना और रणनीति बनायी जा रही है ।
स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने राज्य के सभी बालबाड़ी शिक्षकों, प्राथमिक शाला के शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की महत्वपूर्ण उद्देश्यों में से एक और प्रमुख ‘जादुई पिटारा’ (खेल-आधारित शिक्षण संसाधन प्रणाली) से जुड़ने एवं संसाधनों के आधार पर नवाचार करते हुए आगामी शिक्षा सत्र से दक्षतापूर्वक क्रियान्वयन व संचालन हेतु आव्हान किया है। उन्होंने कहा है कि ‘जादुई पिटारा’ के क्षेत्र में उत्कृष्टता का प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों तथा विशेष सहयोग प्रदान करने वाले स्थानीय लोक कलाकारों, तकनीकी कार्यकर्ता को राज्य स्तर पर उनके योगदान के लिए विशेष रूप से पुरस्कृत किया जायेगा ।
इसी अनुक्रम में - राज्य के सभी प्राथमिक शालाओं के प्रधान पाठकों सहित सभी बीआरसी, सीआरसी और आँगनबाड़ी शिक्षक और कार्यकर्ताओं के प्रारंभिक तौर पर क्षमता विकास और उन्मुखीकरण हेतु राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, छत्तीसगढ़ द्वारा कल दिनांक 2 मई को प्रातः 10 बजे से ऑनलाईनदक्षता विकास हेतु राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन भारत सरकार के एनसीईआरटी के विशेषज्ञों और शिक्षाविदों के सहयोग से किया जा रहा है ।
नई शिक्षा नीति-2020 के तहत राष्ट्रीय स्तर पर विचार-विमर्श करते हुए तथा पंचकोश तैत्तिरीय उपनिषद से प्रेरणा लेते हुए, ‘जादुई पिटारा’ की अवधारणा को शामिल किया गया है और इसमें शारीरिक विकास, सामाजिक,भावनात्मक और नैतिक विकास के लिए मूलभूत चरण के लिए पहचाने गए डोमेन और पाठ्यचर्या लक्ष्यों के साथ विभिन्न कोषों - अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय और आनंदमय को शामिल किया गया है ।
शिक्षाशास्त्रियों के अनुसार इस पद्धति से संज्ञानात्मक विकास, भाषा और साक्षरता विकास, सौंदर्य और सांस्कृतिक विकास, और पाठ्यचर्या विकास के आधार के रूप में सकारात्मक सीखने की आदतों का विकास जैसे बुनियादी उद्देश्यों की प्राप्ति की अपेक्षा और आकलन किया गया है।
इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त संचालक जे.पी.रथ ने बताया है कि - ‘जादुई पिटारा’ 3-8 आयु समूह के मूलभूत चरण अर्थात् नन्हें विद्यार्थियों के पाठ्यपुस्तक की जगह स्वयं में पाठ्यक्रम या पाठ्यवस्तु है, जो मूलतः खेल-आधारित शिक्षण-शिक्षण की एक किट (बॉक्स)के रूप में स्वीकृत और मानकीकृत होगी । इस किट में खिलौने, पहेलियाँ, कठपुतलियाँ, पोस्टर, फ्लैश कार्ड, वर्कबुक, पोस्टर, शिक्षक की मार्गदर्शिका पुस्तिका आदि शामिल होंगी ।
इसमें प्रत्येक स्कूलों को स्थानीय आधार पर जादुई पिटारा को पाठ्यक्रम को आवश्यकता, संस्कृति, स्थानीय संसाधनों और संदर्भ के अनुसार संशोधित, और बेहत्तर बनाने का विकल्प (छूट) भी दिया जा सकेगा । परिमाण स्वरूप कक्षा शिक्षकों को जादुई पिटारा में इन सामग्रियों के निर्माण हेतु नवाचार कर अपनी उत्कृष्टता को साबित करने का अवसर मिल सकेगा, जिसका परीक्षण और मूल्याँकन कर राज्य स्तर पर भी एक समान लागू करने का प्रयास किया जायेगा । जादुई पिटारा बुनियादी तौर पर रचनात्मक प्रक्रियाओं की एक श्रृंखला को आत्मसात करने के लिए प्राथमिक शाला के शिक्षकों का प्रोत्साहन और उन्हें अवसर उपलब्ध कराना है ताकि वे बच्चे और शिक्षक को भाषा के विकास के लिए खोज-बीन करने, खुलकर बात करने, कहानियाँ पढ़ने, पहेलियाँ सुलझाने का अवसर भी प्राप्त हो सके । बच्चे आलोचनात्मक सोच के लिए परिस्थितियाँ बनाने, अपने खिलौने, कविताएँ, चित्र आदि बनाने के लिए स्वतः प्रोत्साहित हो सकें ।
‘जादुई पिटारा’ योजना की एक मुख्य विशेषता यह भी होगी कि न केवल स्कूल शिक्षा विभाग, शिक्षक, प्रशिक्षक बल्कि विद्यार्थियों के माता-पिता, स्कूल, कला, संस्कृति और तकनीक के क्षेत्र में कार्य करी स्वयंसेवी संस्थाएँ भी स्थानीय खिलौने, खेल और कठपुतलियाँ, स्थानीय स्वाद वाली गतिविधि पुस्तकें, स्थानीय कहानी की किताबें और कार्ड, स्वयं के पोस्टर बनाकर, स्थानीय कविताओं को एकत्रित करके अपना खुद का ‘जादुई पिटारा’ बना कर विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध करा सकते हैं ।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय, एनसीईआरटी द्वारा जादुई पिटारा को दीक्षा प्लेटफॉर्म-पोर्टल पर भी डिजिटल रूप से उपलब्ध कराया जा रहा है और डिजिटल सामग्री, डाउनलोड और ऑडियो आदि के लिए इसे पूरी तरह से एक्सेस किया जा सकता है । राज्य शासन के मंशानुरूप स्थानीय एससीआरटी द्वारा ई-जादुई पिटारा निर्माण की कार्ययोजना पर कार्य किया जा रहा है ताकि बच्चे ऑनलाइन जादुई पिटारा का उपयोग कर अपनी समझ विकसित कर सकें ।
जिले के सभी 71 परीक्षा केंद्रों में शांतिपूर्वक ढंग से हुई परीक्षा
अम्बिकापुर । छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल द्वारा संचालित हायर सेकेंडरी की परीक्षा शुक्रवार से शुरू हो चुकी है। जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया है कि हायर सेकण्डरी स्कूल सर्टिफिकेट मुख्य परीक्षा 2024 जिले के 71 परीक्षा केंद्रों में आयोजित हुई, शुक्रवार को हिन्दी विषय की परीक्षा सम्पन्न हुई। कलेक्टर विलास भोस्कर द्वारा परीक्षा में नकल एवं अनैतिक कार्यों आदि साधनों के उपयोग में अंकुश लगाने परीक्षा केन्द्रों के निरीक्षण हेतु उड़नदस्ता दल गठित किया गया है।गठित उडनदस्ता टीम द्वारा शा.उ.मा.वि. कतकालो, बालक करजी, कन्या करजी, बालक दरिमा, खैरबार, सरगंवा, डि.हिलाक्स, सेजेस लखनपुर, कन्या लखनपुर, केदमा, डांडगांव, आदर्श जीवनदीप जजगा, गेरसा, भूसू, बालक सीतापुर, कन्या सीतापुर, क्रिश्चियन सूर्यापारा, कन्या बतौली, बा०लुण्ड्रा में निरीक्षण किया गया। वहीं जिला शिक्षा अधिकारी अम्बिकापुर द्वारा गठित उड़नदस्ता टीम द्वारा शा. बहु.उ.मा.वि.अम्बिकापुर का आकस्मिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान सभी केन्द्रों में परीक्षा शांतिपूर्वक संचालित होना पाया ।
छत्तीसगढ़ में कल जारी होंगे ओपन स्कूल की 10वीं और 12वीं के नतीजे, जानिए कैसे करें चेक
रायपुर| छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल बोर्ड के छात्रों को नतीजों का इंतजार खत्म होनेवाला है. छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल की कक्षा 10वीं और 12वीं के नतीजे कल दोपहर 12 बजे जारी किए जाएंगे. 10वीं और 12वीं क्लास के नतीजे एक साथ आएंगे. छात्र शुक्रवार को ओपन स्कूल की वेबसाइट http://www.sos.cg.nic.in और http://www.result.cg.nic.in पर नतीजे देख सकते हैं.
कल दोपहर 12 बजे जारी होंगे नतीजे
लीनेस क्लब द्वारा उत्कृष्ट कार्य
लीनेस क्लब रायपुर की लीनेस बहनों ने प्रज्ञा मूक-बधिर स्कूल (डी.डी.यू.रायपुर) के बच्चों के हौसले को जगाने हेतु उत्कृष्ट कार्यक्रम का आयोजन किया, जिस कार्यक्रम में वहां के बच्चों का नि:शुल्क आई चेक-अप अरविन्दों नेत्र चिकित्सालय के द्वारा किया गया, जिसमें 61 बच्चे लाभान्वित हुए। उनके उड़ान को लक्ष्योन्मुख करने रिटायर्ड एडिशनल कमिश्नर डॉ जे.के.डागा जी ने कहा कि "समस्या पर ध्यान न दें समाधान पर ध्यान दें,यदि समस्या पर ध्यान देंगे तो समस्या बनी रहेगी उन्होंने बच्चों से कहा कि आप सभी को दिव्य अंग प्राप्त हैं स्वयं को पहचाना है।
ओटिस इंडिया ने भारत माता स्कूल के छात्रों को सम्मानित किया
बिलासपुर, 2024: आधुनिकता के साथ आगे बढ़ने से सबसे अधिक नुकसान यदि किसी को पहुँचा है, तो पर्यावरण को। यदि इसके समाधान पर विचार किया जाए, तो बच्चों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने से न सिर्फ नई पीढ़ी हरित भविष्य की संरक्षक बनकर खड़ी होगी, बल्कि पर्यावावैं भी तेज गति से बेहतर हो सकेगा। इसे समझते हुए ओटिस इंडिया ने 'मेड टू मूव कम्युनिटीज़' ग्लोबल चैलेंज में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित भारत माता हायर सेकेंडरी स्कूल के आठ छात्रों को सम्मानित किया। इन छात्रों ने 'गो-ग्रीन' नामक प्रोजेक्ट के तहत पर्यावरण के अनुकूल यातायात समाधान प्रस्तुत किया।
गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर, 1 अक्टूबर 2024 को खादी फैशन शो का आयोजन किया
गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर, MATS स्कूल ऑफ फैशन डिजाइनिंग एंड टेक्नोलॉजी ने 1 अक्टूबर 2024 को खादी फैशन शो का आयोजन किया, जो वास्तव में MATS विश्वविद्यालय, रायपुर द्वारा आयोजित और प्रचारित सबसे प्रतिष्ठित कार्यक्रमों में से एक है। यह कार्यक्रम भारत की समृद्ध कपड़ा विरासत का एक प्रमाण है, जो खादी कपड़ों की बहुमुखी प्रतिभा और सुंदरता का जश्न मनाने के लिए डिजाइनरों, मॉडलों और फैशन के प्रति उत्साही लोगों को एक साथ लाया। रनवे को रंगों और बनावट के कैनवास में बदल दिया गया क्योंकि मॉडल ने शानदार खादी परिधानों में मंच की शोभा बढ़ाई। यह समारोह कई विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में MATS विश्वविद्यालय, रायपुर में आयोजित किया गया था।
विद्यार्थियों एवं पालकों में परीक्षा परिणाम से उत्पन्न तनाव की रोकथाम हेतु प्रेरक आलेख
आपने छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल, रायपुर द्वारा आयोजित हाईस्कूल/हायर सेकण्डरी 2024 की परीक्षाएँ दी है जिसका परिणाम सन्निकट भविष्य में घोषित किए जाएंगे, जो उत्तीर्ण होंगे उन्हें मेरी ओर से ढे़र सारी अग्रिम बधाइयाँ, परन्तु जो छात्र-छात्राएँ कतिपय कारणवश सफल नहीं हो पाएंगे, उन्हें अधिक निराश होने की आवश्यकता नहीं, मन में निराश या ग्लानि के भाव को तनिक भी स्थान न दें।
इतिहास में अनेक उदाहरण ज्ञात है असफल होने के बाद भी पुनः प्रयास करते रहने पर उनके लिए सफलता के स्वर्णिम द्वार खुल जाते हैं। दुनिया को बल्ब की रोशनी से प्रकाशमान करने वाले प्रख्यात वैज्ञानिक ‘‘थामस एल्बा एडिसन’’ बिजली के बल्ब के अविष्कार करने में एक या दो या तीन बार नहीं अपितु दस हजार बार से भी अधिक बार असफल हुए, फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी, अपनी माँ की प्रेरणा से अनवरत प्रयास करते रहे, फलस्वरूप विद्युत बल्ब बनाने में सफल हुए।
स्वामी विवेकानंद जी ने अपने अनुयायियों को प्रेरित करते हुए कहा कि ‘‘उठो जागो और तब तक मत रूको, जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए।’’ उठने से उनका स्पष्ट आशय है आलस्यता का त्याग करके परिश्रमरत रहने को है। महाकवि गोस्वामी तुलसीदास जी ने प्रसंग वक्ता श्री जामवन्त जी के मुख से श्री हनुमान जी को उनकी भूली हुई शक्ति को जगाने के उद्देश्य से कहते हैं - ‘‘कवन सो काज कठिन जग माही, जो नहि होत तात तुम्ह पाही।’’ तदुपरान्त श्री हनुमान जी के कार्य सर्वविदित एवं वंदनीय है।
आप में भी अकूत शक्ति विद्यमान है उसे पहचानिए एवं अपने कर्तव्यपथ पर नए सिरे से जुट जाइए, सफलता आपके कदमों को अवश्य ही चूमेगी। कवि वृन्द की प्रसिद्ध पंक्ति का स्मरण कर उसका पालन कीजिए -
‘‘करत करत अभ्यास से, जड़मति होत सुजान।
रसरी आवत जात ही सिल पर पड़त निशान।।’’
बार-बार अभ्यास करते रहने से निर्जीव पत्थर पर चिन्ह पड़ जाते हैं, आप तो उर्जावान, ज्ञानवान, संवेदनशील व देश के भावी नागरिक हैं, निरंतर अभ्यास व परिश्रम करने के लिए कमर कस लीजिए आपके लिए असंभव बिल्कुल नहीं है।
अन्त में हिन्दी साहित्य के प्रख्यात कवि ‘‘श्री श्रीकृष्ण सरल जी’’ की पंक्ति का उल्लेख करते हुए नैराश्यता का भाव त्यागने व लक्ष्य बनाकर परिश्रम करने के लिए विनम्र अपील करता हूँ। संकल्पित होइए सफलता मिलने की शत्-प्रतिशत गारंटी है।
‘‘अगर तुम ठान लो तो तारे गगन का तोड़ सकते हो,
अगर तुम ठान लो तो वायु का पथ मोड़ सकते हो।’’
यदि पहले प्रयास में असफलता मिली है तो दूसरा प्रयास पूरी तैयारी और सकारात्मक सोच के साथ करना चाहिए तभी सफलता प्राप्त होगी। एक बात याद रखिए कि जब उम्मीद का अंत होता है तो निराशा/असफलता का प्रारंभ होता है इसलिए हताश न हो स्वयं पर भरोसा रखंे भरोसा भी ऐसा कि ‘‘कुछ न कुछ तो कर ही जाऐंगे। किन्तु बिना लक्ष्य के आगे बढ़ा नहीं जा सकता। जिसके लिए सही कार्य योजना/मार्गदर्शन प्राप्त कर आगे बढ़ें। निश्चित आप अपनी मंजिल तक जरूर पहुचेंगे। अतः परिणामों को जीवन का अंतिम पड़ाव मत समझिए। महत्वपूर्ण यह है कि अगर चलते-चलते कदम डगमगा गए, गिर गए तो पुनः उन्हें और संभल कर, समझ कर पुनः चलना प्रारंभ करें अर्थात् परिणाम आशा अनुरूप आने में क्या कमी रह गई है। उन्हें समझे, आकलन करें बस उसके अनुरूप अध्ययन की कार्ययोजना के साथ आगे बढ़े। निश्चित ही अगला परिणाम आपको एक मुस्कुराहट देगा।
प्रेस विज्ञप्ति डॉ भारती अग्रवाल (प्राचार्य )को सशक्त नारी अवार्ड से सम्मानित किया गया
प्रदेश की सामाजिक साहित्यिक संस्थान वक्ता मंच के द्वारा प्रतिवर्ष विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य के द्वारा अपना विशिष्ट स्थान बनाने वाली 100महिला विभूतियों का सम्मान किया जाता है। जिसमें घरेलू महिला से लेकर शासकीय अशासकीय महिला जिनकी उपलब्धि साहित्य,कला ,समाजिक, शिक्षा,स्वास्थ्य आदि के क्षेत्रों मे रहती है। वक्ता मंच ऐसी महिलाओ को चिन्हांकित कर सम्मानित करती है और इन्हें आगे बढ़ने को प्रोत्साहित करती है। इसी क्रम में डॉ भारती अग्रवाल (प्राचार्य)को उनकी समाजिक साहित्यिक और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के फलस्वरूप सशक्त नारी अवार्ड से सम्मानित किया गया। डॉ भारती अग्रवाल ने वक्ता मंच को आभार व्यक्त करती है।
पढ़ाई में सफलता के लिए मन की एकाग्रता जरूरी: ब्रह्माकुमारी अंशु दीदी
रायपुर । प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के शिक्षाविद सेवा प्रभाग द्वारा बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए विश्व शान्ति भवन चौबे कालोनी में आयोजित समर कैम्प प्रेरणा में मन का मालिक बनें (Master Your Mind) विषय पर ब्रह्माकुमारी अंशु दीदी ने बच्चों को उपयोगी टिप्स दिए।
ब्रह्माकुमारी अंशु दीदी ने कहा कि मन का मालिक बनने और पढ़ाई में सफलता पाने के लिए एकाग्रता बहुत जरूरी है। हम जिस समय और जो कार्य करते हैं उस समय केवल उसी कार्य के विषय में हमारा ध्यान केन्द्रित होना चाहिए। मन को नियंत्रित करने के लिए अच्छा तरीका यह है कि मन को अपना दोस्त बना लें। अपने मन से बातें करें उसे खाली न रखें। राजयोग मेडिटेशन से एकाग्रता और स्मरण शक्ति दोनों बढ़ती है। अपने मन को एकाग्र करने के लिए राजयोग सीखना जरूरी है।
ब्रह्माकुमारी अंशु दीदी ने एकाग्रता के लाभ गिनाते हुए कहा कि इससे हमारी कार्यक्षमता का विकास होता है। कार्य में परिपूर्णता आती है। निर्णय क्षमता का विकास होता है। स्मरण शक्ति बढ़ती है और मन के संकल्प शान्त होते हैं। उन्होंने एकाग्रता की शक्ति बढ़ाने के उपायों की चर्चा करते हुए कहा कि हमें वही बातें याद रहती है जिसमें हमारी रूचि होती है। इसलिए सबसे पहले हमें अपनी पढ़ाई के प्रति रूचि पैदा करना जरूरी है। कभी भी पढ़ाई को बोझ न समझें।
उन्होंने बतलाया कि राजयोग माना परमात्मा से जुड़कर उनसे शक्तियाँप्राप्त करना। राजयोग में स्वयं की पहचान जरूरी है। आत्मा और शरीर का सम्बन्ध मोबाईल और सिम की तरह हैं। हमारा शरीर मोबाईल है तो आत्मा उसकी सिम है। मन बुद्घि और संस्कार आत्मा की तीन शक्तियाँ हैं। मन का कार्य है विचार करना। बुद्घि का कार्य है निर्णय करना और बार-बार किए गए कर्मों से हमारे संस्कार बनते हैं। अब हमें सकारात्मक विचारों को ही अपने मन में जगह देना है।