छत्तीसगढ़ / कबीरधाम

कबीरधाम में यात्रियों की तकलीफ पर मौन परिवहन विभाग

 कबीरधाम में यात्रियों की तकलीफ पर मौन परिवहन विभाग : महिला सुरक्षा और यात्री सुविधा पर भारी लापरवाही, निजी बस संचालकों की मनमानी से जनता परेशान


विकाश शुक्ला
कवर्धा।कबीरधाम जिले में यात्री बस सेवा व्यवस्था बदहाल होती जा रही है। यात्रियों को न केवल असुविधा का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा भी खतरे में है। जिले में संचालित होने वाली अधिकतर निजी बसों में नियमों को ताक पर रखकर बसों का संचालन किया जा रहा है, और जिम्मेदार परिवहन विभाग पूरे मामले पर पूरी तरह से चुप्पी साधे बैठा है।

बसों में यात्रियों की ठूंस-ठूंसकर भरमार , नियमों की उड़ रही धज्जियाँ
जिले के विभिन्न मार्गों पर चलने वाली अधिकांश निजी यात्री बसों में क्षमता से कई गुना अधिक यात्री भरे जा रहे हैं। बसें परमिट में निर्धारित संख्या से अधिक लोगों को बैठाकर, यहां तक कि खड़ा कर सफर कराने में जरा भी हिचकिचाहट नहीं दिखा रही हैं। यह न केवल परिवहन नियमों का उल्लंघन है, बल्कि एक संभावित खतरे को भी जन्म दे रहा है।

कई बार बसों में इतनी भीड़ हो जाती है कि यात्रियों को सांस लेने तक की जगह नहीं मिलती। खासकर महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे बच्चों के साथ यात्रा करने वाले लोग बुरी तरह परेशान रहते हैं। उन्हें न बैठने की जगह मिलती है और न ही सफर के दौरान सुरक्षा का अहसास।

महिलाओं के लिए सीट की सुविधा नाम मात्र की – सुरक्षा पर सवाल
बसों में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का प्रावधान है, लेकिन इसका पालन जमीन पर होता नजर नहीं आता। महिलाएं कई बार पुरुषों के बीच खड़ी यात्रा करने को मजबूर हो जाती हैं। उन्हें असहज और असुरक्षित स्थिति में लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। यह महिला सुरक्षा के दावों पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।

इसके अलावा, कई बार महिलाओं को पुरुषों के बीच बैठना पड़ता है, जिससे उन्हें मानसिक असहजता और असुरक्षा का अनुभव होता है। यह स्थिति न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी चिंताजनक है।

प्रशासन की चुप्पी – क्या मिलीभगत है?
स्थिति यह है कि परिवहन विभाग इस समस्या से पूरी तरह अवगत होते हुए भी कोई कार्रवाई नहीं कर रहा। कई बार यात्रियों ने इसकी शिकायतें भी की हैं, लेकिन न तो कोई निरीक्षण होता है और न ही किसी पर कार्रवाई। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या बस संचालकों को प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है? क्या कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से ही यह अव्यवस्था फल-फूल रही है?

जनता में आक्रोश – मांगा कड़ा एक्शन
स्थानीय नागरिकों और नियमित यात्रियों का कहना है कि अगर जल्द ही बसों में नियमों का पालन सुनिश्चित नहीं किया गया, तो वे विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। लोगों की मांग है कि –

प्रत्येक बस का नियमित रूप से निरीक्षण किया जाए।

महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों की व्यवस्था सुनिश्चित हो।

निर्धारित परमिट सीट से अधिक सवारियों को भरने पर तत्काल जुर्माना और कार्रवाई की जाए।

परिवहन विभाग की जवाबदेही तय की जाए।


कबीरधाम जैसे शांत जिले में यदि परिवहन व्यवस्था इसी तरह अव्यवस्थित रही, तो यह भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना या जन आक्रोश का कारण बन सकती है। समय रहते यदि प्रशासन और परिवहन विभाग ने सख्त कदम नहीं उठाए, तो यात्रियों की तकलीफें और बढ़ेंगी। लोगों को बेहतर, सुरक्षित और नियमों के अनुरूप यातायात सेवा देना प्रशासन की जिम्मेदारी है और इससे अब और अधिक समय तक मुंह नहीं मोड़ा जा सकता।

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