पुराने कच्चे मकान में रह रहे हितग्राही, फिर किस आधार पर पूरी हुई पीएम आवास योजना,
कबीरधाम |
2026-06-09 18:18:16
जनगणना सर्वे ने खोली जमीनी हकीकत
मिलापा पति तीजउ और दशरु पिता शेखू आज भी पुराने मकानों में, हालिया सर्वेक्षण ने खड़े किए कई गंभीर सवाल
सहसपुर लोहारा /पंडरिया-- प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में कथित अनियमितताओं को लेकर जनपद पंचायत सहसपुर लोहारा अंतर्गत ग्राम पंचायत भेंडरा के आश्रित ग्राम बोटेसुर से सामने आ रहे मामले में अब एक नया और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। जिन हितग्राहियों के नाम पर आवास निर्माण के लिए राशि जारी होने और निर्माण प्रगति दर्ज किए जाने की बात सामने आ रही है, उनमें मिलापा पति तीजउ एवं दशरु पिता शेखू प्रमुख रूप से शामिल हैं। ग्रामीणों का दावा है कि ये हितग्राही आज भी अपने पुराने मकानों में निवास कर रहे हैं और हाल ही में हुए मकान एवं जनगणना सर्वेक्षण में भी उन्होंने अपने पुराने घरों का ही सर्वे कराया है।
यह तथ्य सामने आने के बाद प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। यदि संबंधित हितग्राहियों के नाम पर आवास निर्माण की राशि जारी हो चुकी है अथवा निर्माण प्रगति दर्ज की गई है, तो वे आज भी पुराने मकानों में क्यों रह रहे हैं और यदि नया आवास तैयार है तो हालिया सर्वेक्षण में पुराने घर का विवरण क्यों दर्ज कराया गया। यही वे तथ्य हैं जिनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक मानी जा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार मिलापा पति तीजउ और दशरु पिता शेखू सहित अन्य हितग्राहियों का वास्तविक आवास निर्माण धरातल पर दिखाई नहीं देता। इसके बावजूद योजना के रिकॉर्ड में क्या स्थिति दर्ज है, यह अब जांच का विषय बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि जनगणना और मकान सर्वेक्षण जैसे सरकारी दस्तावेज स्वयं इस बात की ओर संकेत कर रहे हैं कि हितग्राही पुराने घरों में ही निवासरत हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि हितग्राही पुराने मकानों में रह रहे हैं तो प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्माण कार्य का सत्यापन किस आधार पर किया गया। योजना के नियमों के अनुसार प्रत्येक किश्त जारी करने से पहले जियो टैगिंग, फोटोग्राफी और भौतिक सत्यापन अनिवार्य होता है। ऐसे में बिना वास्तविक निर्माण के यदि राशि जारी हुई है तो यह पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ मामलों में निर्माण प्रगति दर्शाने के लिए हितग्राहियों की तस्वीरें अन्य मकानों के सामने खींचकर अपलोड किए जाने की भी आशंका है। यदि यह आरोप जांच में सही साबित होता है तो मामला केवल लापरवाही का नहीं बल्कि सरकारी रिकॉर्ड में तथ्यात्मक हेरफेर और योजना के दुरुपयोग का बन सकता है।
स्थानीय स्तर पर योजना के संचालन में आवास मित्र, ग्राम रोजगार सहायक, पंचायत सचिव और संबंधित अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में अब सवाल केवल हितग्राहियों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन सभी जिम्मेदार व्यक्तियों तक पहुंच रहा है जिन्होंने निर्माण सत्यापन, प्रगति रिपोर्ट और भुगतान प्रक्रिया में अपनी भूमिका निभाई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।
यह मामला इसलिए भी चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि यह क्षेत्र प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत मंत्री तथा क्षेत्रीय विधायक विजय शर्मा के निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आता है। ऐसे में ग्रामीणों का कहना है कि गरीबों के लिए बनाई गई योजना में यदि वास्तव में गड़बड़ी हुई है तो दोषियों के खिलाफ उदाहरणात्मक कार्रवाई होनी चाहिए।
ग्रामीणों ने मांग की है कि मिलापा पति तीजउ, दशरु पिता शेखू तथा अन्य संबंधित हितग्राहियों के मामलों की अलग-अलग भौतिक जांच कराई जाए। साथ ही जनगणना सर्वे रिकॉर्ड, मकान क्रमांक विवरण, जियो टैग फोटो, बैंक भुगतान अभिलेख और वास्तविक निर्माण स्थल का मिलान किया जाए। उनका मानना है कि इस जांच से स्पष्ट हो जाएगा कि सरकारी रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत में कितना अंतर है।
बोटेसुर का यह मामला अब केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता, जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को भी उजागर कर रहा है। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इन गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाता है या फिर गरीबों के आवास से जुड़े मुद्दों पर ठोस कार्रवाई करता है।