श्रमिकों को योजनाओं का लाभ दिला पाने में साय सरकार असफल : विनोद चंद्राकर
महासमुंद।
पूर्व संसदीय सचिव छग शासन व महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवन लाल चंद्राकर ने श्रम विभाग की निष्क्रिय प्रणाली को श्रमिक के साथ अन्याय करार देते हुए कहा कि पूरे प्रदेश सहित महासमुंद जिले में श्रम विभाग की कार्यप्रणाली पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है और सरकार का प्रशासनिक तंत्र आम श्रमिकों के हितों की रक्षा करने में पूरी तरह असफल साबित हुआ है। आज श्रमिक वर्ग अपने आप को सबसे ज्यादा ठगा हुआ और परेशान महसूस कर रहा है। एक ओर सरकार बड़ी–बड़ी घोषणाएं कर रही है, दूसरी ओर धरातल पर योजनाओं का क्रियान्वयन नदारद है।
उन्होंने कहा कि श्रम विभाग द्वारा वर्तमान में नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना, नोनी सशक्तिकरण योजना, सियान सहायता योजना, दिव्यांग एवं श्रमिक मृत्यु सहायता योजना, पेंशन योजना, मिनीमाता महतारी जतन योजना, दीदी ई रिक्शा सहायता योजना और दीर्घायु स्वास्थ्य योजना जैसी योजनाएं संचालित होने का दावा किया जा रहा है। लेकिन हकीकत यह है कि नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना के पिछले साल भरे गए आवेदनों की राशि आज तक हितग्राहियों को नहीं मिली है। नोनी सशक्तिकरण योजना के तहत महासमुंद जिले में निराकरण की गति अन्य जिलों की तुलना में बेहद धीमी है। सायकल सहायता योजना, श्रमिक औजार योजना, सुरक्षा उपकरण सहायता योजना और सिलाई मशीन सहायता योजना जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं को तो पूरी तरह बंद कर दिया गया है। सबसे शर्मनाक स्थिति ई केवायसी और नवीनीकरण के नाम पर बनाई गई है। श्रमिकों को मजबूर किया जा रहा है कि वे च्वाइस सेंटर जाकर आधार देकर ई केवायसी कराएं। इसमें गरीब मजदूर का समय भी बर्बाद हो रहा है और अतिरिक्त पैसा भी खर्च हो रहा है। नवीनीकरण के नाम पर महीनों से सर्वर की समस्या बताकर फाइलों को लटकाया जा रहा है। नए मजदूर पंजीयन कार्ड के आवेदन तो लिए जा रहे हैं लेकिन उनका अप्रूवल देना बंद कर दिया गया है। श्रमिक कार्ड में संशोधन के लिए भी लोग महीनों से चक्कर काट रहे हैं।
पूर्व संसदीय सचिव ने कहा कि लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत 15 दिन में निराकरण अनिवार्य है, लेकिन इस कानून की भी खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। राशि डालने में भारी अनियमितता की जा रही है। बिना दलाल के कोई काम नहीं हो रहा है। दलालों के माध्यम से फाइलें तुरंत पास हो जा रही हैं और आम श्रमिक कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर है। यह स्थिति सीधे तौर पर सरकार की नाकामी और श्रम विभाग की मनमानी को दर्शाती है। श्री चंद्राकर ने मांग की है कि लंबित आवेदनों का तत्काल भुगतान किया जाए, नवीनीकरण और नए पंजीयन तुरंत शुरू किए जाएं, ई केवायसी की प्रक्रिया को सरल बनाकर घर बैठे सुविधा दी जाए और दलालों पर सख्त कार्रवाई की जाए।