छत्तीसगढ़ / कबीरधाम

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के घटिया निर्माण कार्य पर उठे गंभीर सवाल

 **प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के घटिया निर्माण कार्य पर उठे गंभीर सवाल**- घटिया निर्माण सामग्री से नाली निर्माण का आरोप,--""उच्चस्तरीय जांच नहीं हुई तो उग्र आंदोलन की चेतावनी"

पंडरिया/ कवर्धा--प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत  ग्राम माकरी से पटुवा तक लगभग 9.70 किलोमीटर लंबी सड़क के साथ किए जा रहे निर्माण कार्य पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। निर्माण स्थल पर लगाए गए सूचना बोर्ड के अनुसार यह कार्य पैकेज क्रमांक CG-09-M57 के अंतर्गत ₹543.92 लाख की लागत से कराया जा रहा है। कार्य की प्रारंभ तिथि 16 जनवरी 2026 तथा संभावित पूर्णता अवधि 6 माह दर्शाई गई है।
ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि ग्राम पंचायत अतरिया खुर्द में ठेकेदार द्वारा नाली निर्माण में स्थानीय हाफ नदी की मिट्टी युक्त रेत     जीरो गिट्टी का उपयोग किया जा रहा है, जिसमें मिट्टी, धूल, कचरा एवं अन्य अशुद्धियां मिली हुई हैं। आरोप है कि ऐसी निम्न गुणवत्ता वाली निर्माण सामग्री का उपयोग शासन की गुणवत्ता संबंधी शर्तों का खुला उल्लंघन है, जिससे निर्माण कार्य की मजबूती और गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की प्रयोगशाला में निर्माण सामग्री को गुणवत्ता मानकों के अनुरूप बताया जा रहा है, जबकि मौके की स्थिति इससे बिल्कुल अलग दिखाई देती है। इससे जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने मांग की है कि निर्माण सामग्री के नमूनों की जांच किसी अन्य स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय सरकारी प्रयोगशाला से कराई जाए, ताकि वास्तविक गुणवत्ता सामने आ सके और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई हो।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग तत्काल बंद नहीं किया गया, सामग्री नहीं बदली गई तथा निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो जनहित में व्यापक एवं उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार, निर्माण एजेंसी और विभागीय अधिकारियों की होगी।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण सड़क सुविधा उपलब्ध कराना है, लेकिन यदि निर्माण कार्य में ही गुणवत्ता से समझौता किया जाएगा तो करोड़ों रुपये की सरकारी राशि व्यर्थ होने के साथ-साथ जनता के विश्वास को भी गहरा आघात पहुंचेगा। इसलिए मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

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