छत्तीसगढ़ / रायपुर

भारत का राष्ट्रगान ''जन गण मन''

 भारत का राष्ट्रगान ''जन गण मन''


गुरुदेव रविन्द्रनाथ टैगौर की अमूल्य रचना |

नोबल पुरुस्कार  सन 1913

आज दिनांक 7/8/26 को शा. पूर्व. माध्य. शाला में विशवकवि , नोबल पुरुस्कार से सम्मानित महान साहित्यकार एवं शिक्षाविद गुरुदेव रविन्द्रनाथ टैगौर की पुण्यतिथि श्रद्धा एवं सम्मान के मनाई गई। कार्यक्रम का सुभारंभ गुरुदेव के छाया चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पाजंलि अर्पित कर दिया गया।

इस अवसर पर डॉ. श्रीमती नीलाजंना जैन ने गुरुदेव के बहुआयामी व्यक्त्वि एवं कृतित्व पर प्रकाश जलते हुए बताया कि  रविन्द्रनाथ टैगौर केवल महान कवि ही नही बल्कि दार्शनिक, संगीत‌कार, शिक्षाविद और मानवतावादी विचारू भी थे उन्होने 2000 गीतों की रचना की  एवं शिक्षा को प्रकृति के सानिध्य से जोडते हुए ऐसे शिक्षण की कल्पना की  जिसमें विद्यार्थियों का सर्वागीण  विकास हो । प्रकृ‌ति के प्रति उनका गहरा प्रेम उनकी  रचनाओं में स्पष्ट झलकता है। उनकी कविताओं और गीतों में वृक्ष नदियाँ, ऋतुएँ पक्षी और प्राकृतिक सौन्दर्य का अत्यंत सजीव और संवदेनशील चित्रण मिलता है। जो मनुष्य और प्रकृति के बीच आत्मीय संबंध स्थापित करता है।
गुरुदेव रविन्द्रनाथ टैगौर  को सन् 1913 में साहित्य का नोबल पुरुस्कार उनकी कात्यकृति गीतांजलि के लिए प्रदान किया गया।  पोस्टर बनाओ प्रतियोगिता में पीयूष ढीमर प्रथम स्थान पर रहे । निबंध प्रतियोगिता अनमोल रत्न गुरुदेव रविन्दुनाथ टैगौर का आयोजन किया गया।
राष्ट्रगान भारत की एकता, अखंडता विविधता और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। विद्यार्थियों से गुरुदेव के आदर्शों - मानवता प्रकृ‌ति प्रेम, ज्ञानार्जन सृजनशीलता एवं राष्ट्रप्रेम को अपने जीवन में अपनाने का माव्हान किया। । कार्यक्रम में श्रीमती शशिकला वर्मा, अमृता यादव, उषाकिरण कौशिक  ज्योति वर्मा श्रीमती अनिता ठाकुर, श्रीमती दीप्तिरांनी, श्रीम‌ती रेखा साइ, श्रीमती महेश्वरी साहू, श्रीमती तृप्ति भारतीश्रीमान आंकाश बंजारे, श्रीमान धनेश यादव, श्रीमान तक्षक बरेठ आदि उपस्थित थे।

 

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