छत्तीसगढ़ / गरियाबंद

कमार विकास प्राधिकरण की राशि के बंदरबांट का आरोप : जांच की मांग

 कमार विकास प्राधिकरण की राशि के बंदरबांट का आरोप : जांच की मांग


कमार समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कलेक्टर को सौंपा आवेदन,अफसरों की कार्यशैली पर उठाये सवाल

राधेश्याम सोनवानी,गरियाबंद :-  जिले में कमार एवं भुंजिया जनजाति के सामाजिक,आर्थिक और शैक्षणिक उत्थान के लिये गठित विकास प्राधिकरणों की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। राष्ट्रीय विशेष पिछड़ी जनजाति कमार समाज भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनसिंग सोरी ने कलेक्टर गरियाबंद को आवेदन सौंपकर कमार विकास प्राधिकरण की विकास राशि के कथित बंदरबांट और पूर्व में किये गये व्यय की जांच की मांग की है। उन्होंने कमार एवं भुंजिया जनजाति के लोगों की मूलभूत समस्याओं के समाधान सहित जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई की मांग की है।

योजनाओं का लाभ नहीं मिलने का आरोप

आवेदन में कमार समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के दूरस्थ क्षेत्रों में निवासरत कमार एवं भुंजिया समुदाय आज भी सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े हुये हैं। कई परिवार बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। शासन द्वारा जनजातियों के विकास के लिये उपलब्ध कराई जाने वाली राशि का वास्तविक हितग्राहियों को समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है।

बनसिंग सोरी ने आरोप लगाया कि कमारों के विकास के लिये स्वीकृत राशि का बंदरबांट कर फिजूल योजनाओं में खर्च किया जाता है। इससे समुदाय के लोगों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा। आवेदन में पूर्व में खर्च की गई विकास राशि की जांच कर दोषियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई करने की मांग की गई है।

1982 में कमार विकास प्राधिकरण का गठन 

बता दें कि कमार जनजाति के समुचित विकास के लिये शासन द्वारा वर्ष 1982 से गरियाबंद में पृथक कमार विकास प्राधिकरण का गठन किया गया था। इसका उद्देश्य कमार समुदाय के विकास की योजनायें बनाकर उनका प्रभावी क्रियान्वयन करना था। हालांकि, कमार समाज के कुछ वरिष्ठ नागरिकों का आरोप है कि प्राधिकरण के गठन के दशकों बाद भी जमीनी स्तर पर अपेक्षित विकास नहीं हो पाया है।

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