छत्तीसगढ़ / गरियाबंद

*गरियाबंद हाईस्कूल 1980–83 बैच का स्नेह सम्मेलन, वर्षों बाद सपरिवार मिले पुराने सहपाठी, बचपन की यादें हुईं ताजा*

राधेश्याम सोनवानी,गरियाबंद :-  गरियाबंद की मिट्टी की खुशबू आज भी वही है, बस वक्त के साथ हम सबकी पहचान और जिम्मेदारियां बदल गई हैं। गरियाबंद हाईस्कूल के 1980–83 बैच के वे साथी, जिन्होंने कभी एक साथ विद्यालय की कक्षाओं में बैठकर सुनहरे सपने देखे थे, आज अपनी प्रतिभा, ज्ञान, मेहनत और लगन से जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में प्रतिष्ठित स्थान हासिल कर चुके हैं।


किसी ने चिकित्सा के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई, तो किसी ने शिक्षा, रेलवे, प्रशासन, राजस्व, न्याय और व्यापार के क्षेत्र में गरियाबंद का नाम रोशन किया। डॉ. वर्षा, रीता प्रधान, रेलवे में लेक्चरार मधु वर्मा, प्रधान पाठक नरेश यादव, निज सचिव सोमेश्वर सिंह ठाकुर, राजस्व अधिकारी मनोज खरे, वरिष्ठ पत्रकार जीवन एस. साहू, प्रसिद्ध किराना व्यापारी जमीयत, एडवोकेट होमेश्वर यदु सहित अनेक साथियों ने अपने-अपने कार्यक्षेत्र में प्रतिभा और कर्मठता की अलग पहचान बनाई।

कभी गरियाबंद की गलियों और स्कूल परिसर में साथ-साथ घूमने वाले ये साथी आज प्रदेश के विभिन्न विभागों और क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वर्षों बाद जब सभी साथी सपरिवार स्नेह सम्मेलन में एक साथ मिले, तो ऐसा लगा मानो समय ने कुछ पल के लिए अपनी रफ्तार रोक दी हो।

पुरानी कक्षाओं की यादें, स्कूल के दिन, दोस्तों की शरारतें, शिक्षकों का मार्गदर्शन और बचपन की अनगिनत स्मृतियां फिर से आंखों के सामने जीवंत हो उठीं। उम्र बढ़ गई, जिम्मेदारियां बढ़ गईं और जीवन की राहें अलग-अलग हो गईं, लेकिन दोस्ती और अपनापन आज भी वैसा ही बना हुआ है।

यह मिलन केवल मित्रों का मिलना नहीं था, बल्कि गरियाबंद की उस मिट्टी को नमन था, जिसने सभी को संस्कार, शिक्षा और पहचान दी। आज ये साथी जिस मुकाम पर हैं, उसकी नींव कहीं न कहीं उसी गरियाबंद की धरती और विद्यालय के सुनहरे दिनों में छिपी हुई है।

*उपलब्धियों के साथ रिश्तों की मिठास भी रही बरकरार*

इस स्नेह सम्मेलन ने यह संदेश दिया कि जीवन में सफलता, पद और प्रतिष्ठा अपनी जगह हैं, लेकिन पुराने रिश्तों का अपनापन अनमोल होता है। वर्षों की दूरी और व्यस्तताओं के बावजूद एक-दूसरे के प्रति स्नेह और सम्मान ने इस मिलन को यादगार बना दिया।

पुराने साथी मिले तो यादें फिर जवान हो गईं, गरियाबंद की मिट्टी की खुशबू फिर से मन में समा गई।

गरियाबंद हाईस्कूल 1980–83 बैच का यह स्नेह सम्मेलन केवल अतीत को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए मित्रता, संस्कार और एकता की प्रेरणा भी है। 
विद्यालय से शुरू हुआ दोस्ती का यह सफर आज जीवन के कई दशक पार कर चुका है, लेकिन रिश्तों की डोर अब भी उतनी ही मजबूत है। यही इस खूबसूरत मिलन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

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