छत्तीसगढ़ / सरगुजा

सेवा की कहानी : डबरी बनी शिवबालक की आजीविका का आधार, मछली पालन से बढ़ी आमदनी

 ग्रामीण रोजगार योजना से मिली डबरी, मछली पालन से अब तक 20 से 25 हजार रुपये की आमदनी

अम्बिकापुर अक्टूबर 2026

सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत गांव में मेहनत करने वाले हाथों को जब सही संसाधन और अवसर मिल जाएं, तो आत्मनिर्भरता की राह आसान हो जाती है। विकासखंड लखनपुर के ग्राम पंचायत बगदर्री निवासी श्री शिवबालक के लिए ग्रामीण रोजगार योजना से निर्मित डबरी ऐसी ही नई उम्मीद लेकर आई है। कभी खेती-किसानी पर निर्भर रहने वाले शिवबालक अब इसी डबरी में मछली पालन कर अतिरिक्त आमदनी अर्जित कर रहे हैं और अपने परिवार की आजीविका को मजबूत बना रहे हैं।

श्री शिवबालक बताते हैं कि ग्रामीण रोजगार योजना के माध्यम से उन्होंने अपने गांव में डबरी का निर्माण कराया। इस डबरी को उन्होंने केवल पानी के संग्रहण तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे अपनी आजीविका का साधन बनाया। वर्तमान में वे इसमें कतला, रोहू, मिर्गल और ग्रास कार्प जैसी मछलियों का पालन कर रहे हैं। मछली पालन से उन्हें नियमित रूप से आमदनी का अवसर मिल रहा है। इसके लिए मैं मुख्यमंत्री जी और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी को बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं।”

शिवबालक के अनुसार अब तक वे डबरी से लगभग दो क्विंटल मछली बेच चुके हैं, जिससे उन्हें करीब 20 से 25 हजार रुपये की आमदनी हुई है। वे बताते हैं कि पारंपरिक रूप से केवल धान की खेती करने से अपेक्षित आमदनी नहीं हो पाती थी, जबकि मछली पालन से उन्हें बेहतर आर्थिक लाभ मिल रहा है। इससे उनकी आय के स्रोत में विविधता आई है और खेती के साथ एक अतिरिक्त आजीविका का साधन भी विकसित हुआ है।

उनकी मेहनत की एक खास बात यह भी है कि डबरी का पानी केवल मछली पालन के काम नहीं आ रहा, बल्कि गर्मी के मौसम में इसी पानी का उपयोग सब्जी की खेती के लिए भी किया जा रहा है। इस तरह एक ही संसाधन से मछली पालन और सब्जी उत्पादन को जोड़कर शिवबालक अपनी आजीविका को और मजबूत कर रहे हैं।

 

श्री शिवबालक की कहानी बताती है कि ग्रामीण रोजगार योजना के तहत निर्मित परिसंपत्तियां केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका उपयोग स्थायी आजीविका और आय के साधन के रूप में भी किया जा सकता है। डबरी के रूप में मिले संसाधन का बेहतर उपयोग करते हुए शिवबालक ने मछली पालन को अपनी आय का माध्यम बनाया और इसके साथ सब्जी उत्पादन को जोड़कर उपलब्ध जल संसाधन का भी सदुपयोग किया है।

आज शिवबालक के लिए यह डबरी सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि मेहनत से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदमों का आधार बन गई है। मछली पालन से हुई आमदनी और सब्जी उत्पादन की संभावना ने उनके परिवार की आजीविका को एक नया सहारा दिया है। सेवा संकल्प अभियान के तहत शिवबालक की यह कहानी इस बात की मिसाल है कि गांव में उपलब्ध संसाधनों और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग कर ग्रामीण परिवार अपनी आमदनी बढ़ाने के साथ आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ सकते हैं।

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