छत्तीसगढ़ / सरगुजा

सेवा संकल्प अभियान-2026’ : सेवा की कहानी: धान की परंपरागत खेती छोड़ गन्ने की खेती की ओर बढ़े किसान बालक दास

 कृषि विभाग की सलाह पर एक एकड़ में शुरू की गन्ने की खेती, फसल विविधीकरण की दिशा में बढ़ाया कदम

कृषक उन्नति योजना के तहत 15 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलने की जानकारी से किसान में उत्साह

अम्बिकापुर 14 अक्टूबर 2026/

 किसानों को परंपरागत खेती के साथ अन्य फसलों के उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में कृषक उन्नति योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। कृषि विभाग के मार्गदर्शन और शासन की प्रोत्साहन व्यवस्था से किसान अब धान की खेती के स्थान पर अन्य फसलों को अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं। सरगुजा जिले के किसान बालक दास ने भी इस दिशा में पहल करते हुए इस वर्ष एक एकड़ भूमि में धान के स्थान पर गन्ने की खेती शुरू की है। कृषि विभाग के अधिकारियों से मिली जानकारी और प्रोत्साहन ने उन्हें खेती के पुराने तौर-तरीकों में बदलाव करने के लिए प्रेरित किया है।

’कृषि विभाग की सलाह से लिया फसल बदलने का निर्णय’
अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत सरईटिकरा के रहने वाले किसान बालक दास ने बताया कि वे प्रतिवर्ष अपने खेत में धान की खेती करते थे। लंबे समय से धान उत्पादन से जुड़े रहने के कारण वे इसी फसल की खेती करते आ रहे थे। इस वर्ष कृषि विभाग के अधिकारियों ने उनसे संपर्क कर धान के स्थान पर अन्य फसलों की खेती करने के संबंध में जानकारी दी। अधिकारियों ने उन्हें गन्ने की खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया और कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत मिलने वाली सहायता राशि के बारे में भी बताया।

बालक दास ने बताया कि कृषि विभाग के अधिकारियों की सलाह पर उन्होंने इस वर्ष अपनी एक एकड़ भूमि में धान के स्थान पर गन्ने की फसल लगाई है। उन्होंने कहा कि विभागीय अधिकारियों से मिले मार्गदर्शन के बाद उन्हें खेती में बदलाव करने का प्रोत्साहन मिला। इसी के आधार पर उन्होंने गन्ने की खेती करने का निर्णय लिया।

’एक एकड़ में गन्ने की खेती, 15 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि’
बालक दास ने बताया कि कृषि विभाग के अधिकारियों ने उन्हें जानकारी दी थी कि धान के स्थान पर गन्ने की खेती करने पर कृषक उन्नति योजना के तहत प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्राप्त हो सकती है। योजना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने एक एकड़ में गन्ने की खेती शुरू की है। अब उन्हें योजना के प्रावधानों और पात्रता के अनुसार प्रोत्साहन राशि मिलेगी।

उन्होंने कहा कि शासन द्वारा किसानों को अन्य फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाना अच्छी पहल है। इससे किसानों को परंपरागत फसलों के अतिरिक्त दूसरी फसलों की खेती करने के लिए प्रेरणा मिल रही है। आर्थिक प्रोत्साहन की व्यवस्था किसानों को फसल विविधीकरण की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान कर रही है।

’फसल विविधीकरण से खेती में नए अवसरों की ओर बढ़ रहे किसान’
कृषि विभाग द्वारा किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत किसानों को धान के अलावा अन्य उपयुक्त फसलों की खेती के संबंध में जानकारी एवं मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है। इसका उद्देश्य किसानों को खेती के नए विकल्पों से जोड़ना और कृषि क्षेत्र में विविधता को बढ़ावा देना है।

बालक दास का प्रयास इसी दिशा में एक उदाहरण है। उन्होंने वर्षों से की जा रही धान की खेती के स्थान पर गन्ने की फसल अपनाकर बदलाव की पहल की है। कृषि विभाग का मार्गदर्शन और प्रोत्साहन राशि की जानकारी उनके इस निर्णय में सहायक बनी है। उनका यह प्रयास अन्य किसानों को भी अपनी भूमि एवं स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप वैकल्पिक फसलों की खेती पर विचार करने के लिए प्रेरित करेगा है।

’किसान बालक दास ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार’
किसान बालक दास ने बताया कि कृषक उन्नति योजना से किसानों को लाभ मिल रहा है। उन्होंने किसानों के हित में संचालित योजनाओं और कृषि विभाग द्वारा दिए जा रहे मार्गदर्शन के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, राज्य शासन एवं कृषि विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया।

बालक दास की यह पहल दर्शाती है कि विभागीय मार्गदर्शन और योजनाओं की जानकारी किसानों को खेती में नए प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। धान के स्थान पर गन्ने की खेती अपनाकर उन्होंने फसल विविधीकरण की दिशा में कदम बढ़ाया है।

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