छत्तीसगढ़ / रायपुर

*पटवा भवन में बच्चों ने नाट्य मंचन से जीवंत किए चारों दादा गुरुदेव के जीवन प्रसंग*

रायपुर। टैगोर नगर स्थित पटवा भवन में रविवार को ‘जिन शासन के सितारे, दादा गुरुदेव हमारे’ भक्तिमय कार्यक्रम का भक्तिमय आयोजन हुआ। समाज के बालक-बालिकाओं ने चारों दादा गुरुदेव के जीवन प्रसंगों, साधना और आध्यात्मिक आदर्शों पर आधारित नाट्य प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम परम पूज्य मुनि श्री संवेगरत्न सागरजी म.सा. आदि ठाणा की पावन निश्रा में हुआ।

रविवार सुबह बैंड बाजे के साथ श्री ज्ञानवल्लभ उपाश्रय से शोभायात्रा पटवा भवन पहुंची। धर्मसभा में बच्चों ने नाट्य मंचन के माध्यम से दादा गुरुदेव के जीवन और गुरु भक्ति के प्रसंगों को प्रस्तुत किया। समापन पर पटवा भवन में साधर्मिक वात्सल्य का आयोजन हुआ। 

चातुर्मास समिति के अध्यक्ष जसराज लुनिया और महासचिव सुरेश बरड़िया ने बताया कि सर्वमंगलमय वर्षावास के 21 दिवसीय दादा गुरुदेव इकतीसा जाप के  समापन के उपलक्ष्य में यह कार्यक्रम भक्तिमय कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम से नई पीढ़ी को जैन धर्म की परंपराओं, तप, त्याग और गुरु भक्ति के संस्कारों से जोड़ा गया। 

*आयम्बिल तप के बाल तपस्वी का हुआ सम्मान*

विवेकानंद नगर के ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में शाश्वत नवपद ओली की अराधान के तहत जारी आयम्बिल तप के बाल तपस्वी 12 वर्षीय अर्हम बाफना का चातुर्मास समिति ने सम्मान किया। धर्मसभा में बड़ी संख्या में उपस्थित श्रावकों ने तप की खूब अनुमोदना की।  80 साधकों का प्रतिदिन आयंबिल तप जारी है। 27 अक्टूबर को श्री रत्नप्रभुसूरीश्वर भवन में तप का सामूहिक पारण होगा।
आराधना के क्रम में आठवें दिन सम्यक चारित्र्य पद की आराधना की गई। मुनि श्री संवेगरत्न सागरजी म.सा. ने धर्मसभा में सम्यक चारित्र्य पद की महत्ता बताई। 

*शरद पूर्णिमा पर पटवा भवन में होगा भक्तिमय आयोजन*

चतुर्विध संघ की पावन निश्रा में शरद पूर्णिमा के पावन प्रसंग पर सोमवार को श्री ज्ञानवल्लभ उपाश्रय से टैगोर नगर स्थित पटवा भवन तक भाव यात्रा निकाली जाएगी। यात्रा के दौरान पांच स्थानों में चैत्य वंदन करते हुए भावयात्रा टेगौर नगर पटवा भवन पहुंचेगी। यहां पर छठवां चैत्य वंदन किया जाएगा। धर्ममय वातावरण के बीच प्रभु भक्ति का भाव देखने को मिलेगा। शरद पूर्णिमा के पावन दिवस पर पांचों पांडवों सहित 20 करोड़ मुनि भगवंतों ने निर्वाण पद प्राप्त किया था। इसी पावन स्मृति और निर्वाण के भाव को नमन करते हुए यह आयोजन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ किया जाएगा।

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