छत्तीसगढ़ / बालोद

राजहरा के ‘विकास का पलायन’: सियासत की बलि चढ़ा खनिजंचल का भविष्य?

बालोद। खनिज संपदा से समृद्ध जिले के दल्ली राजहरा-डौंडी क्षेत्र इन दिनों अपनी माइनिंग की अकूत दौलत के बजाय विकास योजनाओं के ‘रफूचक्कर’ होने के रिकॉर्ड को लेकर सुर्खियों में है। यहाँ के नेताओं की ख़ामोशी और दूरदर्शिता की कमी ने इस ऐतिहासिक टाउनशिप को विकास के मामले में पिछड़ा बना दिया है। ताजा मामला डौंडी विकासखंड के ग्राम पथराटोला में लगभग 5 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले आधुनिक विज्ञान केंद्र का है, जिस पर शुरू हुए राजनीतिक घमासान और विरोध ने क्षेत्र की जनता को झकझोर कर रख दिया है।

दल्ली राजहरा से लगातार ‘रफूचक्कर’ होते प्रोजेक्ट्स

दल्ली राजहरा के हिस्से की खुशियों को अन्यत्र शिफ्ट करने का यह कोई पहला मामला नहीं है - कागज फैक्ट्री का सपना : कभी इस इलाके में एक बड़ी कागज फैक्ट्री लगने वाली थी, जो राजनीतिक कुटिलता के चलते मध्य प्रदेश के अमलाई में शिफ्ट कर दी गई। जिला मुख्यालय की अदला-बदली : जिला मुख्यालय पहले दल्ली राजहरा में प्रस्तावित था, जिसे बाद में बालोद के सिवनी गाँव में स्थापित कर दिया गया। कार्यालयों और सुरक्षा बलों का पलायन : तहसील कार्यालय और एसडीएम कार्यालय डौंडी शिफ्ट हो गए। वहीं, 15वीं वाहिनी बटालियन भी दल्ली राजहरा के बजाय बालोद के धनोरा में स्थापित हुई। यदि यह बटालियन यहाँ बनती, तो 800 से 1,000 जवानों और उनके परिवारों की उपस्थिति से स्थानीय बाजार, व्यापार, किराए के मकानों और रोजगार को भारी बढ़ावा मिलता।

नेताओं की चुप्पी और युवाओं का अंधकारमय भविष्य

जब भी जिला मुख्यालय, तहसील, एसडीएम कार्यालय या बटालियन छिनने की बारी आई, दल्ली राजहरा के तथाकथित नेता पूरी तरह मौन रहे। इन नेताओं की चुप्पी और उदासीनता का खामियाजा यहाँ का युवा और बच्चे भुगत रहे है। रोजगार के अभाव में कुछ युवा मजबूरीवश अवैध गतिविधियों की ओर भटक रहे हैं, तो कुछ नशे के दलदल में अपना जीवन अंधकारमय बना रहे हैं।

विज्ञान केंद्र रोकने की कोशिश पर जनआक्रोश

पथराटोला में प्रस्तावित विज्ञान केंद्र को रोकने की माँग पर स्थानीय नागरिकों और आदिवासी समाज ने कड़ा ऐतराज जताया है। क्षेत्र में प्रदूषण, शुद्ध पेयजल, खराब सड़कों और 100 बिस्तर अस्पताल जैसी समस्याएँ गंभीर हैं, लेकिन उनका हल बच्चों के भविष्य से जुड़ी शैक्षणिक परियोजना को रोकना नहीं है। यदि वित्तीय या तकनीकी अनियमितता का संदेह है, तो उसकी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए। स्थानीय लोगों और आदिवासी समाज ने चेतावनी दी है कि युवाओं और बच्चों के शैक्षणिक अवसरों से खिलवाड़ हुआ, तो ब्लॉक से लेकर प्रदेश स्तर तक उग्र आंदोलन किया जाएगा।

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(कार्टून इमेज AI से बनी हुई है। दिक्कत न हो तो लगा सकते हैं।)


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