बोड़ला में 41 बच्चों की हृदय जांच, 20 ऑपरेशन के लिए चिन्हांकित
कबीरधाम |
2026-10-28 18:21:00
बोड़ला में 41 बच्चों की हृदय जांच, 20 ऑपरेशन के लिए चिन्हांकित
चिरायु योजना से जन्मजात हृदय रोगों की पहचान और निःशुल्क उपचार की पहल
कवर्धा। बच्चों में जन्मजात हृदय रोगों की समय पर पहचान और जरूरतमंद परिवारों को उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कबीरधाम जिले के बोड़ला में निःशुल्क ईको कार्डियोग्राफी जांच शिविर आयोजित किया गया। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) के तहत आयोजित इस शिविर में 41 बच्चों की हृदय जांच की गई, जिनमें से 20 बच्चों को ऑपरेशन के लिए चिन्हांकित किया गया। समय पर बीमारी की पहचान और उपचार से इन बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य एवं सामान्य जीवन की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्म के निर्देशन पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बोड़ला में आयोजित शिविर में रायपुर स्थित सत्य साईं हॉस्पिटल के विशेषज्ञों ने सेवाएं दीं। बाल हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. योगेश साठे ने बच्चों की ईको कार्डियोग्राफी जांच की। जांच के बाद ऑपरेशन के लिए चिन्हांकित बच्चों को आगे के उपचार की प्रक्रिया से जोड़ने की पहल की गई।
18 वर्ष तक के बच्चों की निःशुल्क स्वास्थ्य जांच
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में जन्मजात विकृतियों, बीमारियों, पोषण संबंधी कमियों और विकास में होने वाली समस्याओं की शुरुआती अवस्था में पहचान कर उन्हें समय पर उपचार उपलब्ध कराना है। इसके तहत जिले के शासकीय प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों, अनुदान प्राप्त विद्यालयों, आवासीय विद्यालयों, आश्रमों और छात्रावासों में अध्ययनरत बच्चों के साथ आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत शून्य से 18 वर्ष तक के बच्चों की निःशुल्क स्वास्थ्य जांच की जाती है।
चिरायु दल वर्ष में एक बार विद्यालयों तथा वर्ष में दो बार आंगनबाड़ी केंद्रों का भ्रमण कर बच्चों की जांच, स्वास्थ्य परामर्श और आवश्यक उपचार की सुविधा उपलब्ध कराते हैं। गंभीर बीमारी सामने आने पर बच्चों को चिरायु वाहनों के माध्यम से शासन द्वारा अनुबंधित शासकीय एवं निजी अस्पतालों में भेजा जाता है। आवश्यकता पड़ने पर छत्तीसगढ़ शासन से अनुबंधित राज्य के बाहर के अस्पतालों में भी उपचार और ऑपरेशन की व्यवस्था की जाती है।
हृदय रोग के लक्षणों को नजरअंदाज न करें
शिविर में डॉ. योगेश साठे ने अभिभावकों को बच्चों में हृदय रोग के संभावित लक्षणों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शिशुओं में दूध पीते समय जल्दी थक जाना, सांस फूलना, अधिक पसीना आना, होंठ या नाखून नीले पड़ना, वजन नहीं बढ़ना तथा आराम के दौरान भी तेज सांस चलना हृदय रोग के संकेत हो सकते हैं।
इसी तरह बड़े बच्चों में शारीरिक गतिविधि के दौरान सांस फूलना, अत्यधिक थकान, व्यायाम करते समय सीने में दर्द, खेलते हुए चक्कर आना या बेहोशी तथा दिल की धड़कन असामान्य रूप से तेज होना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे संकेत दिखाई देने पर अभिभावकों को तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लेने की सलाह दी गई।
जांच से उपचार तक पहुंचाने पर जोर
शिविर का उद्देश्य केवल बच्चों में बीमारी की पहचान करना नहीं, बल्कि उन्हें आगे की जांच, आवश्यक ऑपरेशन और उपचार की सुविधाओं से जोड़ना भी है। शिविर में 41 बच्चों की जांच और 20 बच्चों का ऑपरेशन के लिए चिन्हांकन इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। चिन्हांकन के बाद संबंधित बच्चों को विशेषज्ञ परामर्श, आवश्यक जांच और उपचार की प्रक्रिया पूरी करानी होगी।
शिविर में जिला कार्यक्रम प्रबंधक अनुपमा तिवारी, डॉ. मुकुंद राव, शिव गोपाल, शिवेंद्र देवांगन सहित विकासखंड के अधिकारी-कर्मचारी और चिरायु दल के सदस्य उपस्थित रहे।
स्वास्थ्य विभाग बोड़ला के बी एम ओ पुरुषोत्तम राजपूत ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी लक्षणों को गंभीरता से लें, नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं और चिरायु योजना के तहत उपलब्ध निःशुल्क जांच एवं उपचार सुविधाओं का लाभ उठाएं।