छत्तीसगढ़ / राजनांदगांव

प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र मुरमुंदा में हाथीपांव (फाइलेरिया) से प्रभावित मरीजों को एमएमडीपी किट का वितरण

राजनांदगांव । जिले में फाइलेरिया उन्मूलन के लिए विभिन्न गतिविधियोंं का संचालन किया जा रहा है। इसी क्रम में डोंगरगढ़ विकासखंड के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र मुरमुंदा में हाथीपांव (फाइलेरिया) से प्रभावित मरीजों को आवश्यक सामग्री युक्त एमएमडीपी किट का वितरण किया गया। किट में मरीजों की दैनिक देखभाल एवं स्वच्छता के लिए मच्छरदानी, टब, मग, दवाइयां, तौलिया सहित अन्य आवश्यक सामग्री प्रदान की गई। 

इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नेतराम नवरतन ने फाइलेरिया पॉजिटिव मरीजों को निर्धारित उपचार पूर्ण रूप से लेने तथा प्रभावित अंग की नियमित साफ-सफाई एवं देखभाल करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने एमएमडीपी किट में उपलब्ध सामग्री का नियमित रूप से उपयोग करने की अपील की। उन्होंने बताया कि नियमित स्वच्छता, प्रभावित अंग की उचित देखभाल एवं आवश्यक उपचार से फाइलेरिया से होने वाली जटिलताओं को नियंत्रित करने तथा फाइलेरिया की ग्रेडिंग को कम करने में सहायता मिल सकती है।

उन्होंने बताया कि जिले में फाइलेरिया नियंत्रण के प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। वर्ष 2023 में डोंगरगांव एवं डोंगरगढ़ विकासखंडों में 58 माइक्रोफाइलेरिया पॉजिटिव केस पाए गए थे। उस समय जिले की माइक्रोफाइलेरिया दर 5 प्रतिशत थी। वर्ष 2024 में एमडीए राउंड आयोजित किया गया, जिसमें 96 प्रतिशत कवरेज प्राप्त हुआ। इसके बाद माइक्रोफाइलेरिया पॉजिटिव मामलों में कमी दर्ज की गई। वर्ष 2025 में पुन: एमडीए राउंड आयोजित किया गया। जिसमें 97 प्रतिशत कवरेज प्राप्त हुआ। इसके बाद माइक्रोफाइलेरिया पॉजिटिव केस घटकर 12 रह गए तथा जिले की एमएफ दर घटकर लगभग 1 प्रतिशत हो गई। वर्ष 2026 में फाइलेरिया के छिपे हुए संक्रमण की पहचान के लिए नाइट ब्लड सर्वे किया गया। सर्वे के दौरान केवल 7 माइक्रोफाइलेरिया पॉजिटिव केस पाए गए। जिससे जिले की एमएफ दर घटकर 0.3 प्रतिशत रह गई। वर्ष 2026 के एमडीए राउंड में भी 99 प्रतिशत कवरेज प्राप्त हुआ।

जिला कार्यक्रम प्रबंधक संदीप ताम्रकार ने बताया कि नाइट ब्लड सर्वे में पॉजिटिव पाए गए सभी मरीजों का पूर्ण उपचार सुनिश्चित करने एवं नियमित फॉलोअप किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया नियंत्रण के लिए पॉजिटिव मरीजों की पहचान के बाद उनका पूरा उपचार एवं नियमित निगरानी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाने के लिए फरवरी 2027 में आयोजित होने वाले एमडीए राउंड में सभी पात्र व्यक्तियों को दवा का सेवन करने की अपील की। लिम्फेटिक फाइलेरियासिस एक वेक्टर जनित रोग है, जो संक्रमित मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से स्वस्थ व्यक्ति को रोग संक्रमण होता है। जिसके कारण शरीर के अंग प्रभावित होता है। हाथ पैर में सूजन, हाइड्रोसील सहित अन्य लक्षण पाए जाते है। इस अवसर पर मलेरिया कंसल्टेंट डॉ. संगीता पांडेय, बीईटीओ ज्योति कड़े, विकासखंड कार्यक्रम प्रबंधक मुक्ता कुजूर, मलेरिया सुपरवाइजर स्वाति बोरकर एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र मुरमुंदा के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. लिमेश जोशी उपस्थित रहे।

 

 

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