नतांज स्थित परमाणु संवर्धन केंद्र पर हमले का ईरान ने दिया करारा जवाब
तेहरान।इस पूरे घटनाक्रम का सबसे खतरनाक पहलू ईरान का परमाणु भंडार है। रिपोर्टों के अनुसार ईरान के पास साठ प्रतिशत तक संवर्धित करीब चार सौ पचास किलोग्राम यूरेनियम मौजूद है। अमेरिका इस सामग्री को कब्जे में लेने की रणनीति बना रहा है, लेकिन यह काम इतना आसान नहीं है।
ईरान के परमाणु केंद्रों पर हुए ताजा हमले ने पश्चिम एशिया को बारूद के ढेर पर खड़ा कर दिया है। नतांज स्थित परमाणु संवर्धन केंद्र पर अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले ने यह साफ कर दिया है कि यह संघर्ष अब खुली टकराहट में बदल चुका है। हालात इतने विस्फोटक हो चुके हैं कि दुनिया तीसरे वैश्विक संकट की दहलीज पर खड़ी नजर आ रही है। आज हुए इस हमले के बाद ईरान ने भी जवाबी वार में कोई देर नहीं की। तेहरान ने इजराइल के बेन गुरियन हवाई अड्डे पर ईंधन टैंकों को निशाना बनाकर यह संदेश दे दिया कि वह झुकने वाला नहीं है। इतना ही नहीं, ईरान ने हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया सैन्य ठिकाने पर बैलिस्टिक मिसाइल दागकर अमेरिका और ब्रिटेन को सीधी चुनौती दे डाली। भले ही ये मिसाइल अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकीं, लेकिन उनका संदेश बेहद स्पष्ट था।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे खतरनाक पहलू ईरान का परमाणु भंडार है। रिपोर्टों के अनुसार ईरान के पास साठ प्रतिशत तक संवर्धित करीब चार सौ पचास किलोग्राम यूरेनियम मौजूद है। अमेरिका इस सामग्री को कब्जे में लेने की रणनीति बना रहा है, लेकिन यह काम इतना आसान नहीं है। अगर यह सामग्री किसी भी तरह युद्ध के बीच इजराइल ने तेहरान, इस्फहान और कराज जैसे प्रमुख शहरों पर ताजा हवाई हमले कर ईरान के भीतर गहराई तक घुसपैठ की है। दूसरी ओर लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर भी हमले तेज कर दिए गए हैं। इस युद्ध ने अब कई मोर्चे खोल दिए हैं, जिससे पूरा क्षेत्र अस्थिरता के भंवर में फंस गया है।
युद्ध का आर्थिक प्रभाव भी तेजी से सामने आ रहा है। अमेरिका ने तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी ढील दी है। इसी के चलते भारत और एशिया के कई देश फिर से ईरान से तेल खरीदने की तैयारी में हैं। भारतीय रिफाइनरियां सरकार के निर्देश का इंतजार कर रही हैं। यह स्थिति साफ बताती है कि युद्ध केवल सैन्य नहीं बल्कि ऊर्जा और अर्थव्यवस्था का भी खेल बन चुका है।