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भागवत ने जीडीपी का छह प्रतिशत शिक्षा पर खर्च करने का किया समर्थन

 मुंबई । आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी निवेश बढ़ाने की पुरज़ोर वकालत करते हुए कहा कि शिक्षा पर व्यय किया गया धन खर्च नहीं बल्कि एक निवेश है।

मुंबई में इंडिया इंटरनेशनल मॉडल यूनाइटेड नेशंस (आईआईएमयूएन) की15वीं वर्षगांठ समारोह में बोलते हुए, उन्होंने आशा जताते हुए कहा कि भारत जल्द ही अपने सकल घरेलू उत्पाद का छह प्रतिशत शिक्षा के लिए आवंटित करने के लंबे समय से लंबित लक्ष्य को प्राप्त कर लेगा। उन्होंने कहा कि ऐसा निवेश राष्ट्र के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

श्री भागवत ने कहा कि शिक्षा के लिए जीडीपी का छह प्रतिशत समर्पित करने की लंबे समय से चली आ रही मांग को वर्षों से व्यापक समर्थन मिला है और उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह जल्द ही वास्तविकता बन जाएगी। उन्होंने उल्लेख किया कि शिक्षा को सरकार पर वित्तीय बोझ के रूप में नहीं बल्कि एक राष्ट्रीय निवेश के रूप में देखा जाना चाहिए जो समाज को सशक्त बनाता है और भविष्य की पीढ़ियों को तैयार करता है।

 
 
 
 

गौरतलब है कि शिक्षा के लिए जीडीपी का छह प्रतिशत आवंटित करने की मांग की लगातार कई राष्ट्रीय शिक्षा आयोगों और दशकों से विभिन्न नीति रूपरेखाओं द्वारा सिफारिश की जाती रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 भी इस उद्देश्य को दोहराती है और पूरे देश में शिक्षा तक पहुंच, समानता और शिक्षा की समग्र गुणवत्ता में सुधार के लिए सार्वजनिक निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि का आह्वान करती है।

 

 

वर्तमान में, शिक्षा पर केंद्र सरकार का व्यय लगभग 1.3 लाख करोड़ रुपये है जो केंद्रीय बजट का लगभग 2.5 से 2.6 प्रतिशत है। यद्यपि वर्षों के दौरान शिक्षा के लिए कुल आवंटन में वृद्धि हुई है, लेकिन समग्र बजट में इसकी हिस्सेदारी धीरे-धीरे घटती गई है। जब केंद्र और राज्यों दोनों के व्यय को मिलाया जाता है, तो शिक्षा पर सार्वजनिक व्यय का अनुमान जीडीपी के लगभग 4.1 प्रतिशत के आसपास है, जो अब भी लंबे समय से निर्धारित छह प्रतिशत के लक्ष्य से कम है।

श्री भागवत की टिप्पणियों ने एक बार फिर शिक्षा में निवेश बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया है और इस बात पर ज़ोर दिया है कि समावेशी, मूल्य-आधारित और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी शिक्षा प्रणाली का निर्माण करने के लिए मज़बूत सार्वजनिक वित्तपोषण आवश्यक है जो भारत के दीर्घकालिक विकास को आगे बढ़ाने में सक्षम होगा।

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