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सीजेपी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका को अदालत से मिली जमानत

 नई दिल्ली । विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका को रिहा करने का आदेश दिया है। इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने शांति बॉन्ड मामले में दखल देने से इनकार कर दिया था। अदालत ने उन्हें राहत के लिए पहले मजिस्ट्रेट के समक्ष कार्यवाही आगे बढ़ाने का निर्देश दिया था।
विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) ने CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को रिहा करने का आदेश दिया है। 2 दिन की न्यायिक हिरासत के बाद उन्हें SEM कोर्ट के सामने पेश किया गया था। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के नेताओं सौरभ दास और आशुतोष रंका की न्यायिक हिरासत को तीन दिन और बढ़ाने की मांग की थी। इन नेताओं को बुधवार को एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पेश किया गया था।

यह घटनाक्रम दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा उनकी हिरासत के मामले में दखल देने से इनकार करने के कुछ घंटों बाद हुआ है। हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि वे SEM के फैसले का इंतजार करें और अगर उनकी शिकायतें दूर नहीं होती हैं, तो वे अपीलीय अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद ने दास और रंका को अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी। उन्होंने कहा कि 'शांति' बॉन्ड (peace bond) के कथित उल्लंघन से जुड़े "दोबारा सामने आए मामले" (repeat case) में, संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका दायर करना सही कानूनी उपाय नहीं है।

 
 
 
 
 
 
 
 

अदालत ने CJP के सह-संयोजकों से कहा कि वे पहले SEM (सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट) के समक्ष कार्यवाही आगे बढ़ाएं, जो बुधवार को इस मामले पर विचार करने वाला था। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि मजिस्ट्रेट के फैसले के बाद भी उन्हें कोई शिकायत रहती है, तो वे अपीलीय अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। दशहरा की छुट्टियों के कारण हाई कोर्ट बंद होने के बावजूद, इस याचिका पर तत्काल सुनवाई की गई।

13 अक्टूबर को हिरासत में लिए जाने के बाद, 14 अक्टूबर को दास और रंका को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। बाद में, 19 अक्टूबर को उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई, जो बुधवार को खत्म होने वाली थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील अभिक चिमनी ने दलील दी कि दोनों नेताओं को निजी मुचलके (पर्सनल बॉन्ड) पर रिहा कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि SEM के पास उनकी न्यायिक हिरासत बढ़ाने का अधिकार क्षेत्र नहीं है, और उन्होंने उनसे जमानतदार (श्योरिटी) पेश करने के लिए कहे जाने के कानूनी आधार को चुनौती दी। सरकार की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि नए जमानतदार पेश करने से जुड़ा मामला SEM के समक्ष सूचीबद्ध है।

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