संस्कृति
Saphala Ekadashi पर करें तुलसी जी के 108 नामों का जप, मिलेगी प्रभु श्रीहरि की कृपा
नई दिल्ली। हर माह में दो बार आने वाली एकादशी तिथि का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना गया है। इस दिन पर जगत पालनहार प्रभु श्रीहरि की पूजा-अर्चना और व्रत किया जाता है। इस व्रत को करने से विष्णु जी का आशीर्वाद मिलता है और साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। ऐसे में पौष माह की सफला एकादशी का व्रत गुरुवार 26 दिसंबर को किया जाएगा, जो इस साल का आखिरी एकादशी व्रत भी होने वाला है।
तुलसी जी के 108 नाम
1.ॐ श्री तुलस्यै नमः।
2.ॐ नन्दिन्यै नमः।
3.ॐ देव्यै नमः।
4.ॐ शिखिन्यै नमः।
5.ॐ धारिण्यै नमः।
6.ॐ धात्र्यै नमः।
7.ॐ सावित्र्यै नमः।
8.ॐ सत्यसन्धायै नमः।
9.ॐ कालहारिण्यै नमः।
10.ॐ गौर्यै नमः।
11.ॐ देवगीतायै नमः।
12.ॐ द्रवीयस्यै नमः।
13.ॐ पद्मिन्यै नमः।
14.ॐ सीतायै नमः।
15.ॐ रुक्मिण्यै नमः।
16.ॐ प्रियभूषणायै नमः।
17.ॐ श्रेयस्यै नमः।
18.ॐ श्रीमत्यै
19.ॐ मान्यायै नमः।
20.ॐ गौर्यै नमः।
21.ॐ गौतमार्चितायै नमः।
22.ॐ त्रेतायै नमः।
23.ॐ त्रिपथगायै नमः।
24.ॐ त्रिपादायै नमः।
25.ॐ त्रैमूर्त्यै नमः।
26.ॐ जगत्रयायै नमः।
27.ॐ त्रासिन्यै नमः।
28.ॐ गात्रायै नमः।
29.ॐ गात्रियायै नमः।
30.ॐ गर्भवारिण्यै नमः।
31.ॐ शोभनायै नमः।
32.ॐ समायै नमः।
33.ॐ द्विरदायै नमः।
34.ॐ आराद्यै नमः।
35.ॐ यज्ञविद्यायै नमः।
36.ॐ महाविद्यायै नमः।
37.ॐ गुह्यविद्यायै नमः।
38.ॐ कामाक्ष्यै नमः।
39.ॐ कुलायै नमः।
40.ॐ श्रीयै नमः।
41.ॐ भूम्यै नमः।
42.ॐ भवित्र्यै नमः।
43.ॐ सावित्र्यै नमः।
44.ॐ सरवेदविदाम्वरायै नमः।
45.ॐ शंखिन्यै नमः।
46.ॐ चक्रिण्यै नमः।
47.ॐ चारिण्यै नमः।
48.ॐ चपलेक्षणायै नमः।
49.ॐ पीताम्बरायै नमः।
50.ॐ प्रोत सोमायै नमः।
तुलसी जी को विष्णु जी का प्रिय माना जाता है, इसलिए उन्हें विष्णुप्रिया भी कहा जाता है। इसी के साथ तुलसी के बिना विष्णु जी का भोग अधूरा माना जाता है। ऐसे में आपको एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित जरूर करना चाहिए।
51.ॐ सौरसायै नमः।
52.ॐ अक्षिण्यै नमः।
53.ॐ अम्बायै नमः।
54.ॐ सरस्वत्यै नमः।
55.ॐ सम्श्रयायै नमः।
56.ॐ सर्व देवत्यै नमः।
57.ॐ विश्वाश्रयायै नमः।
58.ॐ सुगन्धिन्यै नमः।
59.ॐ सुवासनायै नमः।
60.ॐ वरदायै नमः।
61.ॐ सुश्रोण्यै नमः।
62.ॐ चन्द्रभागायै नमः।
63.ॐ यमुनाप्रियायै नमः।
64.ॐ कावेर्यै नमः।
65.ॐ मणिकर्णिकायै नमः।
66.ॐ अर्चिन्यै नमः।
67.ॐ स्थायिन्यै नमः।
68.ॐ दानप्रदायै नमः।
69.ॐ धनवत्यै नमः।
70.ॐ सोच्यमानसायै नमः।
71.ॐ शुचिन्यै नमः।
72.ॐ श्रेयस्यै नमः।
73.ॐ प्रीतिचिन्तेक्षण्यै नमः।
74.ॐ विभूत्यै नमः।
75.ॐ आकृत्यै नमः।
76.ॐ आविर्भूत्यै नमः।
77.ॐ प्रभाविन्यै नमः।
78.ॐ गन्धिन्यै नमः।
79.ॐ स्वर्गिन्यै नमः।
80.ॐ गदायै नमः।
एकादशी पर तुलसी पूजा का महत्व और भी बढ़ जाता है। बस इस बात का ध्यान रखें कि एकादशी तिथि पर तुलसी में जल अर्पित नहीं करना चाहिए और न ही पत्ते तोड़ने चाहिए। क्योंकि ऐसा माना गया है कि इस तिथि पर तुलसी जी, भगवान विष्णु के निमित्त निर्जला व्रत करती हैं।
81.ॐ वेद्यायै नमः।
82.ॐ प्रभायै नमः।
83.ॐ सारस्यै नमः।
84.ॐ सरसिवासायै नमः।
85.ॐ सरस्वत्यै नमः।
86.ॐ शरावत्यै नमः।
87.ॐ रसिन्यै नमः।
88.ॐ काळिन्यै नमः।
89.ॐ श्रेयोवत्यै नमः।
90.ॐ यामायै नमः।
91.ॐ ब्रह्मप्रियायै नमः।
92.ॐ श्यामसुन्दरायै नमः।
93.ॐ रत्नरूपिण्यै नमः।
94.ॐ शमनिधिन्यै नमः।
95.ॐ शतानन्दायै नमः।
96.ॐ शतद्युतये नमः।
97.ॐ शितिकण्ठायै नमः।
98.ॐ प्रयायै नमः।
99.ॐ धात्र्यै नमः।
100.ॐ श्री वृन्दावन्यै नमः।
101.ॐ कृष्णायै नमः।
102.ॐ भक्तवत्सलायै नमः।
103.ॐ गोपिकाक्रीडायै नमः।
104.ॐ हरायै नमः।
105.ॐ अमृतरूपिण्यै नमः।
106.ॐ भूम्यै नमः।
107.ॐ श्री कृष्णकान्तायै नमः।
108.ॐ श्री तुलस्यै नमः।
राजस्थान के मंदिरों में एक महीने तक बंटेंगे पौष बड़ा, इस भंडारे का एक लम्बा इतिहास है…
पौष बड़ा महोत्सव क्या है? पहले यह जानिए… “पौष बड़ा महोत्सव” सर्दियों के स्वागत के लिए हिंदू कैलेंडर के पौष महीने के दौरान राजस्थान के विभिन्न शहरों में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाने वाला त्योहार है. आपको बता दें कि पौष मास 16 दिसंबर से शुरू हो गया है, जो 13 जनवरी तक चलेगा. पौष मास के साथ ही मंदिरों में पौष बड़ा उत्सव भी शुरू हो गया है. पौष माह की शुरुआत से ही राजस्थान के छोटे-बड़े मंदिरों में पौषबड़ा उत्सव शुरू हो जाता है.
पौष माह के दौरान हर दिन शहर के किसी न किसी मंदिर में पौषध कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है. इस त्योहार के लिए, लोग सामूहिक रूप से एक गर्म दावत तैयार करते हैं, जिसे पहले भगवान को अर्पित किया जाता है और फिर भक्तों के बीच वितरित किया जाता है. पौषबड़ करीब 30 तरह के मसालों से बनाया जाता है. हलवा देसी घी से बनाया जाता है. सबसे पहले भगवान को पौषवड़ा और हलवे का भोग लगाया जाता है. पौषबड़े का इतिहास 250 वर्ष से भी अधिक पुराना है.
जयपुर शहर की स्थापना के साथ ही मंदिरों की रसोई में पौषबड़ा उत्सव की शुरूआत हुई, जिसके कारण शहर का कोई भी मंदिर ऐसा नहीं है, जहां पौष माह में पौषबड़ा प्रसादी का आयोजन न होता हो.
20 लाख श्रद्धालु अलग-अलग समय पर बड़ों का लुत्फ उठाएंगे
जयपुर में मोतीडूंगरी गणेश मंदिर, बंगाली बाबा आश्रम, नेहर गणेश जी और मिस्त्री खाना वाले वीर हनुमानजी सहित लगभग 20 स्थान लक्खी पौष बड़े महोत्सव की मेजबानी करेंगे. इन सभी मंदिरों के आयोजनों की बात करें तो करीब 20 लाख लोग अलग-अलग समय पर पौष बड़ों का लुत्फ उठाएंगे. जिसमें करीब 50 हजार किलो दाल और करीब 11 हजार किलो हलवे की प्रसादी बांटी जाएगी. इसमें कई किलो तेल, कई किलो घी, चीनी पाउडर और मसालों का इस्तेमाल होगा.
Paush Bada Festival: इस तरह तैयार होता है प्रसाद
पौषबड़ा प्रसादी 30 तरह के गरम मसालों से तैयार की जाती है. जीरा, हरी इलायची, बड़ी इलायची, दालचीनी, लौंग, सौंफ, चक्र फूल, जायफल, जावित्री, तेजपत्ता, धनिया, काली मिर्च, लौंग, मिर्च पाउडर, हल्दी पाउडर, अजवाइन, दाल और अन्य मसालों का उपयोग किया जाता है. इन मसालों में एंटीबैक्टीरियल और कुछ एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं. सर्दियों में इसका सेवन निर्धारित मात्रा में किया जाए तो यह सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है.
राजस्थान से प्रयागराज जाने के लिए रेलवे चलाएगा स्पेशल ट्रेनें, श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए उठाया बड़ा कदम…
जयपुर. प्रयागराज में अगले महीने शुरू होने वाले महाकुंभ मेला की तैयारियां तेज़ी से चल रही हैं. दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन में राजस्थान समेत पूरे देश से लाखों श्रद्धालु भाग लेने के लिए आएंगे. इस बार महाकुंभ में जयपुर सहित राजस्थान से 20 लाख से अधिक श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाने के लिए प्रयागराज जाएंगे. यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भारतीय रेलवे ने राजस्थान के दो प्रमुख शहरों से स्पेशल ट्रेनें चलाने का निर्णय लिया है. इसके अलावा, लगभग 15 अन्य ट्रेनें जयपुर होकर गुजरेंगी, जिनका ठहराव राजस्थान के करीब 11 प्रमुख स्टेशनों पर होगा.
रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव के निर्देश पर उत्तर-पश्चिम रेलवे ने इस संबंध में अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं. रेलवे बोर्ड को इस प्रस्ताव की मंजूरी मिल चुकी है. इन स्पेशल ट्रेनों का संचालन जनवरी से किया जाएगा, और इनकी कुल 4 से 10 यात्रा होंगी.
उदयपुर और बाड़मेर से चलेंगी स्पेशल ट्रेनें
उत्तर-पश्चिम रेलवे के अधिकारियों के अनुसार, राजस्थान से दो विशेष ट्रेनें चलाने का प्रस्ताव भेजा गया है. पहली ट्रेन उदयपुर से धनबाद के लिए जाएगी, जो जयपुर, बांदीकुई और भरतपुर होते हुए चलेगी. दूसरी ट्रेन बाड़मेर से बरौनी के लिए होगी, जो जोधपुर, जयपुर और बांदीकुई के रास्ते प्रयागराज तक जाएगी.
जयपुर से होकर गुजरेंगी 15 ट्रेनें
वेस्टर्न रेलवे ने भी कुछ ट्रेनों का प्रस्ताव भेजा है, जिनमें से करीब 10 ट्रेनें जयपुर होकर गुजरेंगी. इनमें साबरमती-बनारस, राजकोट-बनारस, भावनगर-बनारस, वेरावल-बनारस सहित अन्य प्रमुख ट्रेनें शामिल हैं. नॉर्थ सेंट्रल रेलवे की भी 5 ट्रेनें जयपुर से होकर चलेंगी. इन सभी ट्रेनों की कुल यात्रा 4 से 10 बार होगी और ये जनवरी से शुरू होंगी.
Maha Kumbh 2024: राजस्थान में इन स्टेशनों पर रुकेगी ट्रेन
राजस्थान के आबू रोड, पिंडवाड़ा, फालना, रानी, मारवाड़, ब्यावर, अजमेर, किशनगढ़, जयपुर, बांदीकुई और भरतपुर स्टेशनों पर रुकेंगी. इसी तरह, भावनगर-बनारस महाकुंभ मेला स्पेशल ट्रेन भी इन सभी स्टेशनों पर रुकेगी.
यह कदम राजस्थान के तीर्थ यात्रियों के लिए यात्रा को सुविधाजनक और आरामदायक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा.
घर में लड्डू गोपाल की कैसी मूर्ति रखनी चाहिए? जरूर जान लें सेवा के नियम
नई दिल्ली। हिंदू धर्म में लड्डू गोपाल (Laddu Gopal Puja Niyam) की सेवा को लेकर कई नियम बताए गए हैं। यदि इन नियमों का ध्यान रखा जाए, तो व्यक्ति को लड्डू गोपाल जी की सेवा का पूर्ण फल प्राप्त होता है। इसी प्रकार लड्डू गोपाल की मूर्ति को लेकर भी कई नियम बताए गए हैं, जिनका ध्यान जरूर रखना चाहिए।
कैसी होनी चाहिए मूर्ति
इस तरह करें सेवा
लड्डू गोपाल को नियमित रूप से स्नान करवाना चाहिए और प्रतिदिन उनके वस्त्र बदलने चाहिए। स्नान के बाद उनके माथे पर चंदन का तिलक लगाएं और शृंगार करें। सुबह-शाम लड्डू पूजा कर गोपाल जी की आरती करें। लड्डू गोपाल को दिन में काम-से-कम चार बार भोग लगाना चाहिए। ध्यान रहे कि उनका भोग हमेशा स्नान के बाद और सात्विक रूप से बनाना चाहिए। भोग लगाने के लिए कभी भी प्लास्टिक के बर्तनों का इस्तेमाल न करें। इसके स्थान पर धातु के बर्तनों का इस्तेमाल करना चाहिए।
इन बातों का ध्यान
घर में हमेशा लड्डू गोपाल की एक ही मूर्ति रखनी चाहिए। अगर आपके घर में एक से अधिक मूर्ति रख है, तो उनकी पूजा अलग-अलग रूप में करनी चाहिए। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि लड्डू गोपाल जी को कभी भी घर में अकेला न छोड़ें। लड्डू गोपाल की पूजा के दौरान नकारात्मक विचार मन में न लाएं और न ही नकारात्मक बातें बोलें।
अन्नपूर्णा जयंती पर इस शुभ मुहूर्त में करें पूजा, मां अन्नपूर्णा की कृपा से होगी धन की बारिश
इंदौर। मार्ग शीर्ष की पूर्णिमा पर अन्नपूर्णा जयंती शिववास योग में 15 दिसम्बर रविवार को मनाई जाएगी। पूर्णिमा को नगर के प्रमुख मंदिरों मे भगवान के विग्रह का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। श्री गिरिराज धारण की परिक्रमा भी एकादशी से शुरु हो गई है।
अन्नपूर्णा जयंती पर दान-पुण्य और पवित्र सरोबर में स्नान का विशेष महत्व है। अन्न का दान सर्वोत्तम माना गया है।
अन्नपूर्णा पूजा शुभ मुहूर्त
इस साल अगहन पूर्णिमा की तिथि 14 दिसंबर शनिवार 4 बजकर 58 से शुरू होगी, जिसका समापन 15 दिसंबर को दोपहर 2 बजकर 31 पर होगा. उदयातिथि के अनुसार अन्नपूर्णा जयंती 15 दिसंबर को पड़ रही है। मां अन्नपूर्णा को अन्नदा और शाकुम्भी भी कहते हैं।
ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि 15 को अन्नपूर्णा जयंती मनाई जाएगी। इस दिन अन्न और धन की देवी मां अन्नपूर्णा की पूजा की जाती है। इस दिन उनकी पूजा करने वाले व्रत भी रखते हैं। इस व्रत को करने से साधक पर मां अन्नपूर्णा की कृपा बरसती है। उनकी कृपा से अन्न और धन के भंडार भरे रहते हैं। जीवन में व्याप्त सभी प्रकार के दुख और संकट दूर हो जाते हैं।
इस शुभ अवसर पर साधक श्रद्धा भाव से मां अन्नपूर्णा की पूजा करते हैं। अन्नपूर्णा जयंती पर शुभ योग का निर्माण हो रहा है। इस योग का संयोग दिन भर है। मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर दुर्लभ शिववास योग का भी निर्माण हो रहा है। इस योग में भगवान शिव संग मां पार्वती की पूजा करने से साधक को सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है। अन्न और धन में वृद्धि होती है।
16 To 22 December 2024: पौष माह के पहले सप्ताह में मनाए जाएंगे ये व्रत और त्योहार
नई दिल्ली। हिंदू धर्म में 10वें महीने पौष के नाम से जाना जाता है। यह महीना जगत के पालनहार भगवान विष्णु, सूर्य देव और पितरों को समर्पित है। पंचांग के अनुसार, इस बार पौष माह की शुरुआत 16 से दिसंबर से हो रही है। वहीं, इस माह का समापन 13 जनवरी को होगा। नए माह के संग नए सप्ताह की भी शुरुआत हो रही है। 16 दिसंबर से लेकर 22 दिसंबर तक कई व्रत और पर्व मनाए जाएंगे, जिनका विशेष महत्व है। इस सप्ताह में अखुरथ संकष्टी चतुर्थी और मासिक कालाष्टमी समेत आदि पर्व मनाए जाएंगे। धार्मिक मान्यता है कि अखुरथ संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से सभी संकट दूर होते हैं और मासिक कालाष्टमी के दिन काल भैरव की उपासना करने से भय से छुटकारा मिलता है। आइए जानते हैं इस सप्ताह में पड़ने वाले व्रत और त्योहारों (Weekly Vrat Tyohar) के बारे में।
अखुरथ संकष्टी चतुर्थी 2024 शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, इस बार पौष महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 18 दिसंबर को सुबह 10 बजकर 43 मिनट से होगी। वहीं, इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 19 दिसंबर को सुबह 10 बजकर 02 मिनट पर होगा। ऐसे में अखुरथ संकष्टी चतुर्थी का पर्व 18 दिसंबर (Akhuratha Sankashti Chaturthi 2024) को मनाया जाएगा।
मासिक जन्माष्टमी 2024 डेट और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, पौष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 22 दिसंबर को दोपहर 02 बजकर 31 मिनट से होगी और वहीं, इस तिथि का समापन 23 दिसंबर को दोपहर में 05 बजकर 07 मिनट पर होगा। ऐसे में मासिक जन्माष्टमी का पर्व 22 दिसंबर को मनाया जाएगा। इसी दिन भानु सप्तमी और कालाष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। भानु सप्तमी के दिन सूर्य देव की पूजा का विधान है और कालाष्टमी पर काल भैरव की उपासना की जाती है।
शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त - प्रातः 05 बजकर 21 मिनट से 06 बजकर 16 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त - शाम 05 बजकर 27 मिनट से 05 बजकर 54 मिनट तक
निशिता मुहूर्त - रात्रि 11 बजकर 53 मिनट से रात 12 बजकर 48 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त - सुबह 11 बजकर 59 मिनट से दोपहर 12 बजकर 41 मिनट तक
अगर आपकी शादी होने में आ रही है दिक्कतें, तो करें यह उपाय से होगी जल्दी शादी…
Vivah Ke Upay: क्या आपकी भी शादी में दिक्कतें आ रही है, गुरुवार के दिन भगवान बृहस्पति की विधिपूर्वक पूजा की जाती है. यदि कुंडली में बृहस्पति मजबूत हो तो व्यक्ति जीवन में खूब तरक्की करता है. सभी कार्य सफल होंगे और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी. यदि बृहस्पति ग्रह कमजोर हो तो व्यक्ति को हर काम में असफलता के साथ-साथ आर्थिक तंगी का भी सामना करना पड़ता है. अगर आपके काम में भी रुकावट आ रही है. अगर वैवाहिक जीवन में बाधाएं आ रही हैं तो इन उपायों से उन्हें दूर किया जा सकता है.
काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के लोकार्पण को 3 साल पूरे : परिसर में 24 घंटे तक होगा रुद्राभिषेक, विश्व की मंगलकामना के लिए किया जाएगा यज्ञ
वाराणसी. काशी विश्वनाथ धाम (Vishwanath Corridor) के लोकार्पण को 13 दिसंबर 2021 को 3 वर्ष पूरे हो रहे हैं. इस अवसर पर वाराणसी में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर में विशेष अनुष्ठान और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. 13 दिसंबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी विश्वनाथ धाम का पुनः लोकार्पण किया था. जिसके बाद से मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है.
महादेव की कथा सुन रहा महादेव एप का सरगना सौरभ चंद्राकर, जांच एजेंसियों के दावों पर उठ रहे सवाल
महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी एप से जुड़े 6000 करोड़ रुपये के घोटाले का मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर को दुबई में गिरफ्तार करने की खबर दो महीने पहले सामने आई थी. यह कार्रवाई इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर हुई, जिसे प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अनुरोध पर जारी किया गया था. हालांकि सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी के बाद अब जो वीडियो सामने आया है वो जांच एजेंसियों के दावों पर सवाल खड़े कर रहा है. वायरल वीडियो में सौरभ चंद्राकर बहुत ही आराम से संस्कारी बालक की तरह दुबई के ली- मेरीडियन में भगवान शिव की कथा सुनते नजर आ रहा है. इसके साथ ही वह कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा का बकायदा मेहमाननवाजी करते भी नजर आया है.
महादेव सट्टा एप के मुख्य सरगना सौरभ चंद्राकर से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. जो वीडियो वायरल हो रहे हैं वो दो अलग-अलग है. एक वीडियो में देश के मशहूर कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा दिख रहे हैं. वीडियो में प्रदीप महाराज ब्लैक रोल्स रॉयस से तरते नजर आ रहे हैं और एक आलीशान बिल्डिंग के अंदर प्रवेश करते हैं. इस दौरान सौरभ चंद्राकर प्रदीप महाराज का स्वागत करता दिखाई दे रहा है. वहीं दूसरे वीडियो में प्रदीप महाराज के कथा को संस्कारी बालक की तरह सौरभ चंद्राकर सुनता हुआ दिखाई दे रहा है, उसके बगल में एक महिला भी बैठी हुई दिखाई दे रही है.
ऐसे में बड़ा सवाल ये उठता है कि अगर जांच एजेंसियों ने सौरभ चंद्राकर को गिरफ्तार कर लिया है तो वह ऐसे खुले में कैसे घूमते नजर आ रहा है? वायरल वीडियो ने जांच एजेंसियों के दावों को संदेहास्पद बना दिया है. हालांकि, वायरल वीडियो की सत्यता की पुष्टि लल्लूराम डॉट कॉम नहीं करता है.
भगवान चारभुजा नाथ को 1 लाख 10 हजार रुपए के नोटों से बनी पोशाकें पहनाई गईं…
Charbhuja Nath Mandir: सम्पूर्ण मेवाड़ की आस्था का प्रमुख केन्द्र भीलवाड़ा जिले के कोटडी कस्बे में भगवान चारभुजा नाथ का दरबार है. मंदिर में भगवान चारभुजानाथ के दरबार में एक भक्त ने 1 लाख 10 हजार रुपए के नोट चढ़ाए हैं. श्रद्धालु दीनानाथ वर्मा ने बताया कि नोटों की पोशाक में 500 रुपये के 100 नोट, 200 रुपये के 200 नोट, 100 रुपये के 100 नोट और 50 रुपये के 200 नोट हैं.

जया किशाेरी करने लगी हैं मॉडलिंग! तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल, आ रहे ऐसे कमेंट, जाने पूरा मामला
कथावाचक जया किशोरी (Jaya Kishori) लाखों के बैग वाले मामलें के बाद एक वायरल तस्वीर को लेकर चर्चा में आ गई है. गौ सेवा और कथा के जरिए सुर्खियों में रहने वाली जया किशोरी की मॉडलिंग (Modeling) वाली तस्वीरें सोशल मीडिया में जमकर वायरल हो गया है. वायरल तस्वीर में जया आउटफिट कपड़ो में किसी मॉडल (Model) की तरह पोज देते नजर आ रही है.
बीतें दिनों जया किशोरी अपने हाथों में Christian DIOR का बैग लेकर एयरपोर्ट पर स्पॉट हुई थी. इसके बाद उनकी बैग को लेकर उन्हें काफी ट्रोल किया गया था. लोगों ने उन पर आरोप लगाया था कि जिस ब्रांड का बैग लेकर वो चल रही है असल में इस बैग को बनाने के लिए गाय की खाल का इस्तेमाल किया जाता है.
अब फिर एक बार जया किशोरी की बताकर एक तस्वीर इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसमें वो मॉडलिंग वाले कपड़े पहने किसी मॉडल की तरह ही पोज दे रही हैं. दरअसल, सोशल मीडिया पर कई सारी पोस्ट में ये दावा किया जा रहा है कि कथित तौर पर कथावाचक जया किशोरी लाल रंग की ड्रेस में मॉडलिंग करते हुए दिखाई दे रही हैं. पहले गाय की चमड़ी का इस्तेमाल कर प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनी का पर्स इस्तेमाल करना और उसके बाद मॉडलिंग वाले कॉस्ट्यूम में नजर आने से उनके चाहने वाले आहत हुए है. सोशल मीडिया में वायरल तस्वीर को लेकर साजिश बताते हुए समर्थन कर बदनाम करने की बात कह रहे है तो वहीं कुछ लोग जया किशोरी का विरोध कर रहे हैं.
एआई जनरेटेड तस्वीर होने का दावा
बता दें कि इस तस्वीर को जया किशोरी के किसी भी ऑफिशियल अकाउंट से शेयर नहीं किया गया है और न ही मामले को लेकर कोई सफाई दी गई है, जिससे यह दावा किया जा रहा है कि तस्वीर एआई जनरेटेड है. इसके अलावा कई मीडिया रिपोर्ट्स के फैक्ट चेक से भी ये पता लगा है कि तस्वीर के साथ छेड़छाड़ की गई है और इसे एआई से विवाद पैदा करने के लिए जनरेट कर ऐसा बनाया गया है.
सोशल मीडिया यूजर्स कर रहे कमेंट
जया किशाेरी की मॉडलिंग वाली पोस्ट को @BeingSumit007 नाम के एक्स अकाउंट से शेयर किया गया है जिसे अब तक कई लोगों ने देखा है. तो कई लोगों ने इस पर अपनी रिएक्शन भी दिए है. एक यूजर ने लिखा….जया किशोरी जी को बदनाम करने में नफरती चिंटू पूरा जोर लगा रहे हैं. एक और यूजर ने लिखते है कि…हिंदू धर्म का प्रचार कर रही हो या फिर अपना. तो वहीं एक और यूजर ने लिखा…हे भगवान ये सब क्या देखना पड़ रहा है, अच्छा है मैं अंधा हूं. हालांकि ये इन तस्वीरों को पूरी तरह से फर्जी हैं बताया जा रहा है. जिन्हें लोग असली समझकर ऐसे कमेंट कर रहे हैं.
सपने में नजर आए अगर ये 6 चीजें, तो समझ जाएँ बरसने वाली है माँ लक्ष्मी की कृपा…
सोते हुए हर कोई सपने देखता है, कई बार उठने के बाद सपने याद रहते हैं तो कई बार हमे कुछ भी याद नहीं रहता है. पर स्वप्न शास्त्र के अनुसार हर सपने का कुछ न कुछ अर्थ रहता है. यानी में सपने में दिखने वाली चीजे हमे कोई न कोई संकेत देती ही हैं. आज हम आपको बताएँगे सपने में ऐसी कौन सी चीजें नजर आने का अर्थ है की आपके पास लक्ष्मी का आगमन होने वाला है. यानी बहुत जल्द आपका भंडार भरने वाला है.
प्रदोष व्रत पर अपनी राशि के अनुसार करें शिव जी का अभिषेक, कृपा बरसेगी अपरंपार
नई दिल्ली। भगवान शिव की कृपा प्राप्ति के लिए प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat December) को बहुत ही उत्तम तिथि माना जाता है। ऐसे में मार्गशीर्ष माह का अंतिम प्रदोष व्रत शुक्रवार, 13 दिसंबर 2024 को किया जाएगा। शुक्रवार के दिन पड़ने के कारण इसे शुक्र प्रदोष व्रत भी कहा जाएगा। तो चलिए जानते हैं कि आप किस प्रकार इस तिथि पर भगवान शिव को प्रसन्न कर सकते हैं।
श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी: जल्द शुरू हो सकती है आदि कैलाश और ओम पर्वत यात्रा के लिए हेली सेवा, जानिए कितना होगा किराया
देहरादून. 15 दिसंबर से आदि कैलाश और ओम पर्वत यात्रा के लिए हेली सेवा शुरू हो सकती है. इसके लिए रुद्राक्ष एविएशन कंपनी की तैयारी पूर्ण हो चुकी है. वैसे तो पहले यात्रा 15 नवंबर तय की गई थी, लेकिन बर्फबारी न होने की वजह से हेली सेवा को स्थगित कर दिया गया था.
बर्फबारी हुई तो श्रद्धालु रोज हेलीकॉप्टर से पिथौरागढ़ के नैनी सैनी एयरपोर्ट से भगवान शिव के निवास स्थान के लिए उड़ान भर सकेंगे. रुद्राक्ष का डबल इंजन एमआई 17 हेलीकॉप्टर नैनी सैनी एयरपोर्ट से हर रोज 18 श्रद्धालुओं को लेकर भगवान शिव के निवास स्थान के लिए उड़ान भरेगा.
देना होगा फिटनेस प्रमाण पत्र
कंपनी ने श्रद्धालुओं को बैठाकर इसका ट्रायल भी पूरा कर लिया है. इस यात्रा के लिए श्रद्धालुओं को अपना फिटनेस प्रमाण पत्र भी कंपनी को देना होगा. पहले नैनी सैनी एयरपोर्ट से आदि कैलाश और ओम पर्वत का प्रति श्रद्धालु कुल किराया 66 हजार रुपये तय किया गया था, जिसमें सरकार की तरफ से 26 हजार रुपये सब्सिडी के रूप में कंपनी को दिए जाने थे.
46 हजार रुपये होगा किराए
यानि एक व्यक्ति का कुल किराया 40 हजार रुपये तय किया गया था, लेकिन अब सरकार और कंपनी की नए पॉलिसी के अनुसार यह किराया 72 हजार रुपये प्रति श्रद्धालु कर दिया गया है. इसमें भी सरकार की तरफ से 26 हजार सब्सिडी देगी, जिसके बाद प्रति व्यक्ति किराया अब 46 हजार रुपये होगा.
बेल पत्र के पेड़ के नीच इन मंत्रों का जप प्रदान करता है धन और समृद्धि
जन्म कुंडली के षष्ठ, अष्टम या द्वादश भाव में चंद्रमा की उपस्थिति व्यक्ति को अतिविचारशीलता, संवेदनशीलता, कल्पनाशीलता प्रदान करके भावुक व स्वप्नदृष्टा बनाती है। लेकिन अत्यधिक संवेदनशीलता व अति भावुक होने से इनका व्यक्तित्व एकतरफा, रूखा व नाटकीय होकर इनके लाभ और सफलता पर कई बार उद्यम के अभाव में प्रभावित करता है और इनके जीवन पर नकारात्मक असर डालता है। इन्हें धन के जोखिम से बचाना चाहिए तथा सट्टे या फ़्यूचर ट्रेडिंग से दूर रहना चाहिए अन्यथा लाभ की जगह हानि होगी।
इसे भी आजमाइए
अगर घर में बार-बार वाद-विवाद रहता हो तो पूरे घर में घी से भीगे कपूर को प्रज्ज्वलित कर पूरे घर में दिखाएं। क्लेश के उन्मूलन में राहत मिलेगी, ऐसा मान्यताएं कहती हैं।
बात पते की
केतु यदि कुंडली के सप्तम भाव में आसीन हो तो अर्थ लाभ देता है। इन व्यक्तियों को जीवन में स्थिर रूप से उत्तम सुख मिलता है। इन्हें शत्रुओं और विरोधियों पर विजय हासिल होती है। ये वर्ष की आयु के बाद अपार मान-प्रतिष्ठा के भागी है। घमण्ड और झूठे वादों से ये मुसीबत में फँसते हैं। कई बार ये भ्रमित नज़र आते हैं।कभी कभी सही को ग़लत समझ बैठते हैं। इन्हें अपनों पर बार बार संदेह होता रहता है। किसी करीबी व्यक्ति के कारण इन्हें मानहानि का सामना करना पड़ता है। मित्रों से इन्हें पीड़ा मिलती है। दाम्पत्य सुख में कमी होती है। धन आने पर ये मुक्त हस्त से खर्च करते हैं, जिससे भविष्य में अर्थ कष्ट का उदय होता है। पैतृक संपत्ति का सुख इनको नहीं मिलता। शत्रुओं का भय रहता है।सरकार से इन्हें तनाव प्राप्त होता है। अधूरा ज्ञान इन्हें झमेले में फंसाता है। विरोधियों की साज़िश इनको पीड़ा पहुंचाती है।शरीर के मध्य भाग में चोट चपेट से कष्ट होता है। यह केतु अधीर, कायर, ईर्ष्यालु और अभिमानी बनाता है। जीवन के अंतिम कुछ वर्षों में इनके भीतर आध्यात्मिकता बोध प्रस्फुटित होने लगता है। इनके पैरों में कमज़ोरी आ जाती है। इनको नाना और मामा से मिलने वाले स्नेह पर नकारात्मक असर पड़ता है।
अयोध्या धाम दर्शन के लिए महासमुंद जिले से 158 तीर्थयात्रियों का जत्था 25 नवंबर को होगा रवाना
महासमुंद। राज्य सरकार द्वारा संचालित श्री रामलला दर्शन (अयोध्या धाम) योजना के अंतर्गत महासमुंद जिले से चयनित 158 तीर्थयात्रियों का जत्था रवाना होगा। यह योजना धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और नागरिकों को भगवान श्रीराम के पवित्र धाम अयोध्या के दर्शन कराने का अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से लागू की गई है। जिला नोडल अधिकारी के अनुसार, चयनित तीर्थयात्रियों में 88 ग्रामीण क्षेत्रों और 65 नगरीय निकायों से हैं। इनके साथ 5 एस्कॉट अधिकारी भी यात्रा का हिस्सा होंगे।
यह यात्रा न केवल धार्मिक अनुभव प्रदान करेगी, बल्कि अयोध्या की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को भी समझने का अवसर देगी। चयनित यात्रियों का यह समूह 25 नवंबर 2024 को अयोध्या के लिए प्रस्थान करेगा। कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने यात्रा की सफलतापूर्वक योजना और संचालन के लिए सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है।
यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं, जिसमें यात्रा के दौरान उनकी स्वास्थ्य सेवाओं और ठहरने की उचित व्यवस्था शामिल है। विदित हो कि श्री रामलला दर्शन योजना राज्य सरकार का एक अभिनव प्रयास है, जिसका उद्देश्य धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन देकर नागरिकों को आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करना है। यह यात्रा भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या की धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता से परिचित कराने का एक सशक्त माध्यम है।
Maha Kumbh Prayagraj 2025: शब्दों में नहीं बांधी जा सकती है, तीर्थों के राजा प्रयागराज की महिमा,
प्रयाग में त्रिधाराओं का संगम है, ये त्रिधाराऐं गंगा, यमुना और सरस्वती की हैं। यहां पर सरस्वती अकाररूप में हैं, यमुना उकाररूप में हैं और गंगा मकाररूप में है, इसी प्रकार प्रयाग संगम प्रणव ओंकार का साक्षात स्वरूप है। इस रूप में तीर्थों का राजा प्रयाग शब्द ब्रह्म ओंकार का प्रतीक और आध्यात्मिक, आधिभौतिक और आधिदैविक सम्पदाओं का सिद्ध केन्द्र है। जैसे ब्रह्मा, विष्णु, महेश त्रिदेव का योगदान सृष्टि के सृजन, पालन और संहार में हैं, उसी प्रकार त्रिधाराओं का मिलन त्रित्व को अपने में समाए हुए है। आज के इस डिजिटल युग में जहां लोग प्रायः शरद ऋतु की ठंडक में घर से निकलना पसंद नहीं करते हैं, वहीं प्राचीन परम्परा का निर्वाह करते हुए असंख्य लोग देश-विदेश से संगम तट पर एकत्र होकर रेती पर कुटिया बनाकर
एक माह पर्यन्त कल्पवास कर पुण्यार्जन करते हैं।
त्रिवेणी की इस त्रिविध सम्पदा को महाकुम्भ के अवसर पर प्राप्त करने के लिए देश के विभिन्न अंचलों से लोग यहां आते हैं। विदेशों से भी श्रद्धालु कुम्भ के अमृत पान की अभिलाषा से यहां उपस्थित होते हैं। त्रिवेणी संगम केवल जलधारा का मिलन नहीं, बल्कि आस्था, मोक्ष, और ऊर्जा का प्रतीक है। यहां डुबकी लगाना केवल शारीरिक शुद्धि नहीं, बल्कि आत्मिक मुक्ति का मार्ग है। पौराणिक मान्यता है कि सृष्टि के प्रारंभ में ब्रह्मा जी ने यहां यज्ञ किया था, जिससे इसे तीर्थराज की उपाधि मिली। यह वह भूमि है जहां वेदों और पुराणों की ऋचाएं गूंजती हैं।
महाकुंभ केवल मेला नहीं, यह विश्व का सबसे बड़ा आध्यात्मिक आयोजन है। साधु-संतों का समागम, मंत्रोच्चार, यज्ञ और गंगा, यमुना की गूंजती धारा इसे अद्वितीय बनाती हैं। प्रयागराज आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र है, जहां की रेती का प्रत्येक कण श्रद्धा और विश्वास से भरपूर है। माघ मास में महाकुम्भ के दौरान यज्ञ, अनुष्ठान, प्रवचन आदि अनेकानेक गतिविधियों के कारण प्रयागराज की वायु में एक विशेष प्रकार की ऊर्जा व्याप्त हो जाती है, जो प्रत्येक व्यक्ति को आत्मिक शांति और मन को स्थिरता प्रदान करती है।