शिक्षा
नवोदय विद्यालय की कक्षा 6 में प्रवेश के आवेदन की अंतिम तिथि आज
हरदा। पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय चारूवा की कक्षा 6वीं में प्रवेश के लिए चयन परीक्षा आयोजित की जाएगी। साल 2025 में होने वाली इस प्रवेश परीक्षा में शामिल होने के लिए आवेदन की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 7 अक्टूबर तक कर दिया गया था।
आज जवाहर नवोदय विद्यालय चयन परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को बंद कर देगा। लिहाजा, जो माता-पिता अपने बच्चों का जवाहर नवोदय विद्यालय में दाखिला करना चाहते हैं, उन्हें आज ही रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके लिए कुछ डॉक्यूमेंट्स की जरूरत होती है।
इन दस्तावेजों को होगी जरूरत
निर्धारित प्रारूप में छात्र के विवरण का उल्लेख करते हुए प्रधानाध्यापक द्वारा सत्यापित प्रमाण पत्र के साथ ही छात्र की फोटो, छात्र का सिग्नेचर, माता-पिता या अभिभावक का सिग्नेचर और सक्षम सरकारी प्राधिकारी द्वारा जारी आधार विवरण या निवास प्रमाण पत्र अपलोड करना होता है।
जवाहर नवोदय विद्यालय चारूवा प्राचार्य ने बताया कि इस परीक्षा में शामिल होने के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। आवेदक विद्यार्थी की जन्म तिथि 1 मई 2013 से 31 जुलाई 2015 के बीच होनी चाहिए। आवेदन हरदा जिले का मूल निवासी होना चाहिए और हरदा जिले के किसी शासकीय या अर्द्धशासकीय अथवा मान्यता प्राप्त विद्यालय में शिक्षा सत्र 2024-25 में कक्षा 5वीं में पढ़ रहा होना चाहिए।
भूल सुधार का भी मिलेगा मौका
नवोदय विद्यालय चारुवा प्राचार्य ने बताया कि भरे गए आवेदनों में सुधार का भी मौका अभिभावकों को मिलेगा। इसके लिए 8 और 9 अक्टूबर को ऑनलाइन विंडो खुलेगी। इस दौरान बच्चों के आवेदन पत्र भरते समय हुई गलतियों को आवेदक सुधार सकेंगे।
बताते चलें कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए होने वाली इस परीक्षा में ऑब्जेक्टिव सवाल पूछे जाएंगे। प्रवेश परीक्षा में मानसिक क्षमता यानी मेंटल एबिलिटी, गणित यानी अर्थमेटिक और भाषा यानी लैंग्वेज के कुल 100 नंबर्स के सवाल पूछे जाते हैं।
फिर से होगा मूल्यांकन! सीबीएसई ने 10वीं 12वीं बोर्ड रिजल्ट में पकड़ी बड़ी 'हेराफेरी'
CBSE Latest News in Hindi: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के विद्यार्थियों के लिए बड़ी खबर आ रही है। सीबीएसई बोर्ड रिजल्ट में गड़बड़ी का मामला उजागर हो रहा है। ये कोई हवा हवाई बात नहीं है, न ही कोई अफवाह है। बल्कि CBSE ने खुद इसकी जानकारी दी है। सीबीएसई वेबसाइट cbse.gov.in पर इस बारे में नोटिस जारी किया गया है। ये गड़बड़ी क्या है? बोर्ड को इसका पता कैसे चला? अब आगे क्या होगा? समझिए पूरा मामला।
सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन द्वारा गुरुवार, 6 जून को एक नोटिस सीबीएसई ऑफिशियल वेबसाइट पर अपलोड किया गया है। इसमें बोर्ड ने लिखा है-
'अपने एडवांस्ड एआई टूल की मदद से सीबीएसई ने पता लगाया है कि थ्योरी और प्रैक्टिकल के मार्क्स में एक बड़ा अंतर है। सीबीएसई से मान्यता प्राप्त देश के 500 से ज्यादा स्कूलों के रिजल्ट में गड़बड़ी पाई गई है। इन स्कूलों में पढ़ने वाले 50 फीसदी से ज्यादा स्टूडेंट्स के CBSE Practical Marks और CBSE Theory Marks में बड़ा अंतर है।'
रद्द होगा नीट रिजल्ट, दोबारा देनी पड़ेगी परीक्षा? सुप्रीम कोर्ट पहले भी कैंसिल कर चुका है मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम
NTA NEET 2024 Supreme Court Latest News in Hindi: नीट रिजल्ट निकले तीन दिन बीत चुके हैं। लेकिन कन्फ्यूजन बरकरार है। नीट पेपर लीक और NEET Result 2024 में गड़बड़ियों को लेकर उठ रहे सवालों ने लाखों बच्चों और उनके पैरेंट्स को परेशान कर रखा है। जैसे- क्या नीट 2024 रद्द हो गया है? या.. क्या नीट एग्जाम कैंसिल होगा? क्या नीट फिर से आयोजित किया जाएगा? मामला सुप्रीम कोर्ट में है। कोर्ट क्या फैसला देगा? आप इसे एक पुराने मामले से समझ सकते हैं। जब मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम स्कैम पर SC का जजमेंट आया था।
NEET Cancellation 2024: क्या है पुराना मामला?
ये बात है साल 2015 की। जब नीट का नाम भी नहीं था। एमबीबीएस, बीडीएस एडमिशन के लिए नेशनल लेवल मेडिकल प्रवेश परीक्षा AIPMT- ऑल इंडिया प्री मेडिकल टेस्ट हुआ करती थी। सीबीएसई एआईपीएमटी का आयोजन करता था।
पेपर लीक की खबर फैली थी। आरोप थे कि कई एग्जाम सेंटर्स पर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस के जरिए स्टूडेंट्स को क्वेश्चन पेपर के आंसर (Answer Key) भेज दिए गए थे। तब 3 मई को परीक्षा हुई थी और 5 जून को रिजल्ट आने थे। लेकिन कोर्ट ने 15 जून को फैसला दिया कि- मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम कैंसिल किया जाए और परीक्षा 4 हफ्ते में दोबारा से ली जाए।
दूरस्थ इलाकों में आसान हुई उच्च शिक्षा पाने की राह
आवापल्ली, कुआकोण्डा, तोंगपाल जैसे अंदरुनी इलाकों में भी खुले महाविद्यालय
एजुकेशन वर्ल्ड ऑटोनॉमस कॉलेज रैकिंग 2023-24 में राज्य के 6 कॉलेज टॉप 100 में
साढ़े 4 वर्षों में 192 से ज्यादा कॉलेजों का हुआ नैक मूल्यांकन
33 नए शासकीय महाविद्यालय खोले गए एवं 76 अशासकीय महाविद्यालय आरंभ
पहले जिन क्षेत्रों में उच्च शिक्षा पाने के लिए विद्यार्थियों को मीलों चलना पड़ता था। आज वहां नवीन महाविद्यालय के बन जाने से उच्च शिक्षा की राह बेहद आसान हो गई है, अब उन्हें कई किलोमीटर का सफर तय नहीं करना पड़ता, क्योकि आवापल्ली, कुआकोण्डा, तोंगपाल जैसे दुर्गम क्षेत्रों में अब महाविद्यालय खुल चुके हैं। कुआकोण्डा का उदाहरण लें, दंतेवाड़ा जिले के इस ब्लॉक के अंदरुनी गांवों के छात्रों को जिला मुख्यालय तक कॉलेज पहुंचने के लिए 80 किलोमीटर तक की दूरी भी तय करनी पड़ती थी। इसके कारण से हायर सेकेण्डरी के बाद काफी लोग पढ़ाई छोड़ देते थे, लेकिन अब कॉलेज प्रारंभ होने के बाद उच्च शिक्षा सहज उपलब्ध हो गई है।
मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल एवं उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल की पहल पर उच्च शिक्षा प्राप्त करने में आने वाली कठिनाई से छात्र-छात्राओं को मुक्ति मिली है। राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए महाविद्यालयों में प्रवेश लेने की आयु सीमा समाप्त कर दी है, इससे किसी कारणवश पढ़ाई बीच में ही छूट चुके लोगों को अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए एक अच्छा अवसर मिला है। महाविद्यालयों में अधोसंरचना का विकास और अध्ययन-अध्यापन के लिए संसाधनों में बढ़ोतरी हो रही है, इससे प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या में भी वृद्धि हो रही है। जहां 2018-19 में करीब 2 लाख 26 हजार 373 छात्रों ने कॉलेज में प्रवेश लिया वहीं यह संख्या वर्ष 2022-23 में 48 प्रतिशत बढ़कर 3 लाख 35 हजार 139 हो गई है, जो कि 2018-19 की तुलना में एक लाख 8 हजार 766 अधिक है। कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों की बढ़ती संख्या को देखते हुए विगत 4 वर्षों में कुल 33 नवीन शासकीय महाविद्यालय खोले गए हैं एवं 76 अशासकीय महाविद्यालय आरंभ हुए हैं।
छत्तीसगढ़ में 285 शासकीय महाविद्यालय, 12 अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालय एवं 252 अनुदान अप्राप्त अशासकीय महाविद्यालय संचालित हैं। कुल 27 विषयों पर 1384 रिक्त पदों के लिए भर्ती जारी की गई थी, जिसमें से 1167 अभ्यर्थियों को नियुक्ति आदेश जारी किए जा चुके हैं। उच्च शिक्षा में लड़कियों को प्रोत्साहन देने के लिए 26 कन्या महाविद्यालय का संचालन किया जा रहा है। वर्ष 2018-19 में जहां 91,982 छात्रों की तुलना में 1,34,391 छात्राओं ने कॉलेज में एडमिशन लिया वहीं 2022-23 में यह बढ़कर छात्रों की संख्या 1,28,310 एवं छात्राओं की संख्या 2,06,829 हो गई है। जो कि छात्रों की तुलना में छात्राओं की संख्या 61 प्रतिशत अधिक है।
अधोसंरचना एवं संसाधनों की बढ़ोतरी होने की वजह से राज्य के कॉलेजों की एक नई पहचान बन रही है। एजुकेशन वर्ल्ड ऑटोनॉमस कॉलेज रैकिंग 2023-24 में छत्तीसगढ़ के 6 कॉलेजों को टॉप 100 में जगह मिली है। इस रैंकिंग में शासकीय वी.वाय.टी. महाविद्यालय दुर्ग टॉप 10 में जगह बनाने में कामयाब रहा है, इस कॉलेज को 9वीं रैंक मिली है। बिलासपुर के शासकीय बिलासा कन्या महाविद्यालय को 14वीं रैंक, ई. राघवेन्द्र राव विज्ञान महाविद्यालय को 19वीं रैंक, शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय राजनांदगांव को 34वीं रैंक, राजीव गाँधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय अंबिकापुर को 42वीं रैंक और शासकीय नागार्जुन विज्ञान महाविद्यालय रायपुर को 54वीं रैंक प्राप्त हुई है। अभी हाल ही में उच्च शिक्षा विभाग को छत्तीसगढ़ के ‘प्रोजेक्ट असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन’ को देश के प्रतिष्ठित स्कॉच अवार्ड से नवाजा गया है। विभाग को यह अवार्ड देश के कई बड़े एवं महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के साथ प्रतियोगिता करते हुए कई चरणों की प्रस्तुतिकरण, वोटिंग एवं उपलब्धियों के कारण प्रदान किया गया है।
गौरतलब है कि शैक्षणिक सत्र के दौरान ही 7 मार्च को यूजीसी ने नेक ग्रेडिंग के संदर्भ में ट्वीट करके जानकारी दी, जिसमें छत्तीसगढ़ का स्थान पहला है। विगत 6 माह में नेक ग्रेडिंग में पूरे देश में छत्तीसगढ़ के सर्वाधिक महाविद्यालयों का मूल्यांकन किया गया है, इसमें प्रदेश के 98 महाविद्यालय शामिल हैं। वर्ष 2003 से वर्ष 2018 के मध्य यूजीसी ने केवल 36 कॉलेजों का मूल्यांकन किया था, जबकि पिछले 4 वर्षों में अब तक 192 कॉलेजों का मूल्यांकन करा लिया गया है।
शिक्षक भर्ती : नौकरी मिलने के कुछ ही दिन बाद आई इस्तीफे की बाढ़, 70 से ज्यादा टीचर्स ने ठुकराई पोस्ट, जानिए वजह…
अभी तक बिहार में 70 से अधिक नवनियुक्त शिक्षकों ने अपने इस्तीफे शिक्षा अधिकारी को सौंपे हैं. हालांकि, इन्हें अभी मंजूर नहीं किया गया है. मुजफ्फरपुर में सबसे अधिक 40 और समस्तीपुर में 30 इस्तीफे हुए हैं. इसके अलावा बेगुसराय और मधुबनी में भी शिक्षक नौकरी छोड़ रहे हैं.
नौकरी छोड़ने की क्या वजह?
रिपोर्ट की मानें तो जिन शिक्षकों ने स्कूलों में तैनाती ली है, उनको केंद्रीय विद्यालयों के अलावा कई अन्य विभागों में नौकरी मिल गई है. इस्तीफा देने वालों में सबसे अधिक संख्या उत्तर प्रदेश के शिक्षकों की है. शिक्षकों को बिहार में नौकरी रास नहीं आ रही, इसलिए वे दूसरा मौका मिलते ही नौकरी छोड़ रहे हैं. शिक्षकों के इस्तीफे के बाद आधिकारिक तौर पर जानकारी भी जारी कर दी गई है.
फिर से खाली हो गए स्कूलों में शिक्षकों के पद
बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की ओर से पिछले दिनों 1.25 लाख से अधिक अभ्यर्थियों को प्रथम चरण में स्कूलों में तैनाती दी गई थी. अचानक शिक्षकों के नौकरी छोड़कर जाने से स्कूलों में एक बार फिर शिक्षकों के पद खाली हो रहे हैं. अनुमान जताया जा रहा है कि नौकरी छोड़ने वाले शिक्षकों की संख्या 150 से अधिक हो सकती है. बता दें, BPSC जल्द ही रिक्त पदों को भरने के लिए दूसरे चरण की भर्ती निकाल सकता है.
सपनों से दूर करती यह कैसी पढ़ाई
सपनों से दूर करती यह कैसी पढ़ाई.......
- अतुल मलिकराम (लेखक एवं राजनीतिक रणनीतिकार)
दीक्षांत समारोह में भी ऑनलाइन एग्जाम कराने के लिए जारी रहा विरोध राज्यपाल के सामने ही कुलपति मुर्दाबाद के लगे नारे
छत्तीसगढ़ बस्तर । बस्तर में शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में आयोजित दीक्षांत समारोह स्थल के बाहर NSUI के छात्रों ने जमकर हंगामा किया है ।
बच्चों ने सीएम साय को पोस्टर के माध्यम से दी ‘पालक-शिक्षक मीटिंग’ एजेंडा की जानकारी
रायपुर। मेगा पालक शिक्षक बैठक में शामिल होने पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को स्कूली बच्चों ने पोस्टर के माध्यम से पालक शिक्षक मीटिंग के उद्देश्य और गतिविधियों की रूपरेखा और इससे छात्रों को होने वाले लाभ के बारे में विस्तार से बताया। बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा विभाग द्वारा 13 बिंदु पालक शिक्षक मीटिंग के लिए निर्धारित किए गए हैं, अलग अलग बच्चों ने इन बिंदुओं के बारे में बताया।
मुख्यमंत्री साय ने सभी गतिविधियों के बारे में जानकारी ली और बच्चों से इन सभी का अच्छे से लाभ उठाने के लिए कहा। उन्होंने बच्चों से उनके करियर प्लान भी पूछे और खूब मेहनत कर अपने सपनों को पूरा करने की सीख दी। उन्होंने कहा जीवन में श्रेष्ठता हासिल करने का एक मात्र माध्यम शिक्षा है। आप करियर में जिस क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते उसके लिए लगन और मेहनत से पढ़िए जिससे आप अपना उज्ज्वल भविष्य गढ़ सकें। इस दौरान मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय और स्कूल शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी भी इस दौरान साथ रहे।
पालक शिक्षक संवाद में पालकों को बच्चों के लिए यथासंभव घर में पढ़ाई के लिए मेरा कोना-स्टडी कॉर्नर के रूप में एक निश्चित स्थान तय करने की बात बताई गई। इसी प्रकार छात्रों के लिए एक आदर्श दिनचर्या कैसी हो इसकी जानकारी दी गई।बच्चों ने आज क्या सीखा के तहत पालकों की सहभागिता बढ़ाने के साथ उनकी प्रोग्रेस मॉनिटर करने में सहायता मिलेगी। ‘‘बच्चा बोलेगा बेझिझक’’ से बच्चों के अंदर स्टेज में बोलने के भय को दूर करना और पब्लिक स्पीकिंग और लीडरशिप क्वालिटी बढ़ाने पर काम होगा। बच्चों की अकादमिक प्रगति एवम परीक्षा पर चर्चा का उद्देश्य पालकों और छात्रों को परीक्षा के दौरान होने वाले तनाव को दूर करना और अच्छे अंक लाने के लिए प्रोत्साहित करना है। पुस्तक की उपलब्धता सुनिश्चित करना, बस्ता रहित शनिवार के अंतर्गत अन्य ज्ञानवर्धक गतिविधियों से छात्रों को जोड़ना, विद्यार्थियों के आयु/कक्षा अनुरूप स्वास्थ्य परीक्षण एवम पोषण की जानकारी देना, न्योता भोज के माध्यम से सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना, विभिन्न डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से शिक्षा हेतु पालकों एवम छात्रों को अवगत कराना, विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं/ छात्रवृत्ति एवम विभागीय योजनाओं की जानकारी प्रदान करने के साथ जाति/आय/निवास प्रमाण पत्र निर्माण और नई शिक्षा नीति के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
सीएम साय पालक-शिक्षक सम्मेलन में हुए शामिल
रायपुर । मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मंगलवार को जशपुर जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बंदरचुआँ में संकुल स्तरीय पालक-शिक्षक सम्मेलन में शामिल हुए और राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर शिक्षकों से चर्चा की।
बैठक में बंदरचुआं स्कूल के शिक्षक, बच्चे और पलकों से मुख्यमंत्री साय ने विस्तृत चर्चा की। इस दौरान उनके साथ उनकी धर्मपत्नी कौशल्या साय भी मौजूद रही। स्कूल में बच्चों ने प्रदर्शनी लगाई थी जिसका अवलोकन मुख्यमंत्री ने किया। बच्चों ने शिक्षा डिजिटल एप्प के संदर्भ में मुख्यमंत्री साय को विस्तृत जानकारी दी।
बच्चों से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने बच्चों को अच्छी पढ़ाई के साथ खेल और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में भी शामिल होने की बात कही। इसके साथ ही उन्होंने अभिभावकों से बच्चों के शैक्षणिक विकास और स्कूलों के माध्यम से मिल रही शिक्षा की गतिविधियों के साथ ही ग्राम के विकास की बात करते हुए बच्चों के उज्जवल भविष्य की कामना की।
हेमचंद यूनिवर्सिटी के सभी कॉलेजों में होगी ऑफ़लाइन परीक्षा.. कुलपति ने कहा प्रर्दशन छोड़ो परीक्षा की तैयारी करो
हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग व उससे संबंद्ध 118 महाविद्यालयों में वार्षिक परीक्षाएं ऑफलाइन होगी।
परीक्षा प्रणाली में सही तरीके से सुधार करना जरुरी है
लगभग 25 वर्ष पहले आइआइटी, बंबई के निदेशक पद का कार्यकाल पूरा करने के तुरंत बाद प्रो. सुहास सुखात्मे का एक साक्षात्कार प्रकाशित हुआ था। उनसे एक प्रश्न यह पूछा गया था कि पांच साल के उनके कार्यकाल की कुछ विशेष बातें क्या रहीं। उन्होंने एक पंक्ति में जवाब दिया- ‘मुझे किसी ने अपने बच्चे का प्रवेश कराने के लिए नहीं कहा।’ इस उत्तर का गहरा महत्व है। इससे पहली बात तो यह निकलती है कि आप निदेशक को प्रभावित कर प्रवेश नहीं पा सकते। दूसरी बात, ‘तंत्र’ का कोई व्यक्ति ऐसा कहने या करने की सोच भी नहीं सकता। मंत्री, उद्योगपति, राजनेता या अभिजन, कोई भी हो, प्रवेश परीक्षा के अलावा किसी अन्य तरीके से आइआइटी में दाखिला पाने के बारे में सोच नहीं सकता था। यह एक अलिखित नियम था, जो समय के साथ एक कायदा बन गया, जिसे सभी मानते थे। यह नियम संयुक्त प्रवेश परीक्षा की पवित्रता में भरोसे के कारण बना रहा और यह पवित्रता अनुल्लंघनीय थी। इसी कारण अन्य कुछ संस्थानों ने भी इस परीक्षा के अंकों को अपने यहां प्रवेश का आधार बनाया। यह प्रणाली लगभग चार दशकों तक चलती रही, जब केवल पांच आइआइटी संस्थान थे और परीक्षार्थियों की संख्या का प्रबंधन हो सकता था। परीक्षा की पूरी प्रक्रिया का संचालन बारी-बारी से आइआइटी संस्थान करते थे। आइआइटी के प्राध्यापकों की पीढ़ियों ने यह सुनिश्चित किया कि परीक्षा की शुचिता बनी रहे।
लेकिन एक समय के बाद यह संभव नहीं रहा। आपूर्ति और मांग के बीच खाई बढ़ती गयी। आइआइटी में प्रवेश के लाभ आसमान छूने लगे। कोचिंग क्लास उद्योग मनमाने तरह से चलने लगे। ऐसे में सीट बढ़ाने की जरूरत पैदा हुई। आइआइटी संस्थानों की संख्या बढ़ी, प्रवेश अधिक होने लगे और आवेदकों की तादाद भी बहुत हो गयी। साल 2013 के आसपास यह गंभीर नीतिगत चर्चा होने लगी कि सभी इंजीनियरिंग और मेडिकल संस्थानों के लिए देशभर में एक परीक्षा की व्यवस्था हो। इसका उद्देश्य छात्रों और अभिभावकों को कई प्रवेश परीक्षाओं में बैठने की मुश्किलों से राहत दिलाना था। साथ ही, इससे देश में परीक्षाओं के स्तर भी समान होते। कोचिंग उद्योग द्वारा पैदा की गयी खाई और उनकी भारी कमाई से जुड़ी चिंताएं भी थीं। सो, हम ‘एक परीक्षा’ व्यवस्था में आ गये। साल 2017 में एक अलग एजेंसी गठित की गयी, जिसे नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) नाम दिया गया। यह एजेंसी विभिन्न परीक्षाओं के साथ चार बड़ी परीक्षाएं आयोजित करती है- मेडिकल प्रवेश के लिए नेशनल एलिजीबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (नीट), इंजीनियरिंग प्रवेश के लिए ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जाम (जेइइ), यूजीसी-नेट और सेंट्रलाइज्ड यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूइटी)। बीते कुछ वर्षों से इन सभी परीक्षाओं के अनुभव गड़बड़ियों से अछूते नहीं रहे हैं। इससे छात्रों और अभिभावकों की चिंताएं बहुत बढ़ी हैं। इन परीक्षाओं की तैयारी में अमानवीय दबाव के कारण छात्रों में आत्महत्या के बढ़ते मामलों को भी नहीं भूलना चाहिए।
इस साल नीट (अंडरग्रेजुएट) और यूजीसी-नेट परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यूजीसी-नेट परीक्षा 19 जून को होने वाली थी। उसे महज एक दिन की सूचना पर रद्द कर दिया गया। इस परीक्षा में देशभर के 317 शहरों में लगभग नौ लाख छात्र बैठने वाले थे। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने इसलिए इस परीक्षा को रद्द किया क्योंकि उसे पर्चे लीक होने की आशंका थी। इससे पहले से ही नीट (अंडरग्रेजुएट) का मामला गर्म था, जिसके परिणाम चार जून को घोषित हुए थे। संयोग से उसी दिन लोकसभा चुनाव के नतीजे भी आये थे। इस परीक्षा में 571 शहरों और 4750 केंद्रों में 24 लाख छात्र शामिल हुए थे। लेकिन परिणामों में गड़बड़ियां लग रही थीं। जितने अंक लाकर पिछले साल 6800 के आसपास रैंक हासिल की जा सकती थी, इस बार उतने अंक में 21 हजार की रैंक मिली। इतना ही नहीं, 67 छात्रों को पूरे अंक मिले, जिनमें से छह छात्रों के क्रमांक एक ही अनुक्रम में थे और इनका परीक्षा केंद्र भी एक ही था। इससे रोष फैलना स्वाभाविक था। जब छात्रों ने सोशल मीडिया पर अपने अंकों को साझा किया, तो एक अजीब-सी बात देखी गयी, जिसका खुलासा एनटीए ने नहीं किया था। वह बात यह थी कि 1563 छात्रों को ग्रेस मार्क्स दिये गये थे, जिसके बारे में किसी पूर्व शर्त की घोषणा नहीं की गयी थी। ऐसे अंक दिव्यांग छात्रों को ठोस कारणों से दिये जा सकते हैं, लेकिन इस मामले में वे इसलिए दिये गये क्योंकि परीक्षा केंद्र पर प्रश्न पत्र बहुत देर से पहुंचे थे
तब तक पूरा मामला सर्वोच्च न्यायालय पहुंच चुका था। ग्रेस मार्क्स को रद्द किया गया और पुनः परीक्षा का आदेश दिया गया। बड़े पैमाने पर पर्चा लीक होने की आशंका तथा एनटीए के दोषपूर्ण प्रणाली से जुड़े सवाल अभी हैं। ऐसा लगता है कि नकल का बड़ा घोटाला हुआ है। इस संबंध में बिहार और गुजरात में कुछ गिरफ्तारियां भी हुई हैं। न तो यह कहानी अभी खत्म हुई है और न ही छात्रों और अभिभावकों का भारी तनाव कम हुआ है। आज बड़े बदलावों और सुधारों की आवश्यकता है। ऑप्टिक मार्क्स रिकॉग्निशन (ओएमआर) के इस्तेमाल वाली परीक्षाओं के लिए उनको छापने, ढोने और सुरक्षित केंद्रों पर ले जाने की जरूरत होती है। अब ऐसी व्यवस्था की प्रासंगिकता नहीं है। महाराष्ट्र की एक महत्वपूर्ण सरकारी परीक्षा एजेंसी लगभग 15 साल पहले ही स्क्रीन-बेस्ड सिस्टम को अपना चुकी है। अत्याधुनिक तकनीकों के इस दौर में हमें ओएमआर जैसे तरीके की जरूरत नहीं है।
कंप्यूटर से सवालों के क्रम को ऐसे बदला जा सकता है कि सवाल बनाने वाले को इसका पता पर्चा सामने आने पर ही लगे। तकनीक आधारित समाधानों को देश में कई जगहों पर अपनाया गया है। हमें एक परीक्षा और एक राष्ट्रीय एजेंसी पर भारी दबाव को कम करना चाहिए। हम दो या इससे अधिक टेस्ट की व्यवस्था कर सकते हैं, जो प्रतिस्पर्धात्मक हों। इसमें कुछ निजी कंपनियों को भी शामिल किया जा सकता है। तीसरा सुधार दीर्घकालिक है, जिसमें हमें मांग और आपूर्ति की बड़ी खाई को कम करना होगा। इसका यह भी अर्थ है कि हम शिक्षा क्षेत्र को जकड़न से मुक्त करें तथा उच्च शिक्षा के संस्थानों को पाठ्यक्रम तय करने, शिक्षक भर्ती करने और उनका वेतन तय करने, शुल्क का निर्णय लेने आदि में अधिक स्वतंत्रता एवं स्वायत्तता दें। अन्यथा हमारे लाखों युवा अपनी महत्वपूर्ण युवावस्था को मनोवैज्ञानिक बोझ के साथ परीक्षा की तैयारी और बार-बार परीक्षा देने में बर्बाद करते रहेंगे, जहां सफलता मिलना लॉटरी लगने से भी अधिक मुश्किल है। (ये लेखक के निजी विचार हैं।)
12वीं के बाद एयरफोर्स कैसे ज्वाइन करें? जानिए पूरी चयन प्रक्रिया
एयरफोर्स में जाने का है सपना, तो जान लें कि 12वीं पास करने के बाद आप एयरफोर्स कैसे ज्वॉइन कर सकते हैं, इसके लिए कौन सी परीक्षा देनी होती है और कैसे सेलेक्शन होता है.
हमारे देश में बड़ी संख्या में उम्मीदवार सेना में भर्ती होने का सपना देखते हैं. लेकिन कई स्टूडेंट्स को पता नहीं होता है कि वह सेना कैसे ज्वाइन करें. ऐसे में हम आपकी मदद के लिए बताने जा रहे हैं कि 12वीं पास करने के बाद एयरफोर्स में कैसे नौकरी पा सकते हैं. इसके लिए कितनी एज होनी चाहिए और कैसे सलेक्शन होता है.
बता दें कि स्टूडेंट्स 12वीं के बाद सीधे एयरफोर्स ज्वाइन कर सकते हैं. इसके लिए उन्हें NDA यानी नेशनल डिफेंस एकेडमी परीक्षा (UPSC NDA Exam) में शामिल होना होगा. इस परीक्षा का आयोजन UPSC की ओर से हर साल कराया जाता है.
वायु सेना के लिए यूपीएससी एनडीए पात्रता: परीक्षा कौन दे सकता है
फिजिक्स, केमेस्ट्री, मैथ के साथ 12वीं पास करने वाले छात्र इस परीक्षा में शामिल हो सकते हैं. वहीं स्टूडेंट की एज साढ़े 16 साल से लेकर साढ़े 19 साल के बीच होनी चाहिए. एनडीए परीक्षा का फॉर्म हर साल निकलता है. निर्धारित योग्यता रखने वाले स्टूडेंट्स नोटिफिकेशन जारी होने के बाद UPSC की वेबसाइट पर जाकर अप्लाई कर सकते हैं.
भारतीय वायु सेना चयन प्रक्रिया: चयन प्रक्रिया
यूपीएससी एनडीए परीक्षा के अंतर्गत उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा और एसएसबी इंटरव्यू के माध्यम से किया जाता है. परीक्षा क्लियर करने वालों को एसएसबी इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है.
वायु सेना के लिए यूपीएससी एनडीए परीक्षा पैटर्न: पैटर्न
लिखित परीक्षा में 2 पेपर होते हैं मैथ्स और जनरल एबिलिटी टेस्ट. मैथ सेक्शन से 300 और जनरल एबिलिटी टेस्ट से 600 अंको के प्रश्न पूछे जाते हैं. जनरल एबिलिटी टेस्ट में फिजिक्स, केमिस्ट्री, जनरल साइंस, हिस्ट्री, ज्योग्राफी और करंट इवेंट्स से प्रश्न पूछे जाते हैं.
आईएएफ एनडीए एसएसबी साक्षात्कार: एसएसबीबी साक्षात्कार
एसएसबी इंटरव्यू की प्रक्रिया 2 चरणों में 5 दिन तक आयोजित की जाती है. इसमें कई राउंड के टेस्ट होते हैं. पूरा इंटरव्यू प्रोसेस 900 अंकों का होता है. एयरफोर्स ज्वाइन करने के लिए उम्मीदवार को कंप्यूटराइज्ड पायलट सुरक्षा सिस्टम भी क्वालीफाई करना होता है.
छत्तीसगढ़ के अब इस विश्वविद्यालय में ऑनलाइन परीक्षा को लेकर उठी मांग कुलपति को राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन....
छत्तीसगढ़ बस्तर । बस्तर विश्वविद्यालय के छात्रों ने विश्वविद्यालय का घेराव कर ऑनलाइन परीक्षा की मांग की नारे बाजे की और ऑनलाइन एग्जाम के लिए कुलपति के हाथ राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा
पं . रविशंकर शुक्ल अपडेट इस बार कॉलेजों में क्षमता से ज्यादा परीक्षा फार्म , अब प्राइवेट के सेंटर बदलेंगे, अप्रैल के पहले हफ्ते में हो सकती है परिक्षा, सोमवार तक जारी हो सकते है, समय सारिणी....
रविशंकर शुक्ल में परीक्षा के लिए इस बार बड़ी संख्या में आवेदन मिले हैं ।
प्राइवेट स्कूल फीस में कैसे करते हैं हेराफेरी? शिक्षा विभाग के फॉर्म 6 में खुली पोल
Private School Fees in Haryana: शिक्षा विभाग ने फीस बढ़ोतरी की सूचना न देने वाले निजी स्कूलों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। विभाग ने फॉर्म 6 जारी किया है। यह फॉर्म निजी स्कूलों को 31 मई तक भर कर शिक्षा विभाग में जमा कराना है। यदि स्कूल प्रबंधकों ने निर्धारित तिथि तक जमा नहीं कराया तो कार्यवाही की जाएगी।
जिला शिक्षा अधिकारी अशोक बघेल ने बताया कि स्कूलों को 2021 से अब तक की फीस और अन्य जानकारी देनी होगी। Form 6 में 2021 से अब तक की स्टाफ सैलरी, प्राइवेट स्कूल फीस स्ट्रक्चर और अन्य खर्चों का पूरा विवरण देना होगा। इसकी जिम्मेदारी जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी और खंड शिक्षा अधिकारियों को सौंपी गई है।
School Fees: पहले दिखाई चालाकी, अब फंसे
विभागीय सूत्रों के मुताबिक स्कूलों का नया सत्र शुरू शुरू होने से पहले ही निजी स्कूलों को फार्म छह भरने के आदेश दिए गए थे। लेकिन स्कूलों ने जो जानकारी दी वह सही नहीं मिली। जिसके बाद विभाग ने दोबारा से MIS Portal खोल दिया। इसके लिए अब फॉर्म 6 का फॉर्मेट जारी किया गया है। नए फॉर्मेट के आधार पर ही स्कूलों को अब फीस की जानकारी देनी होगी। यही नहीं, अब स्कूल स्टाफ की सैलरी वेतन, भत्तों की भी जानकारी देनी होगी। यदि निर्धारित समय में जानकारी नहीं दी गई तो एक्शन लिया जाएगा।
Private School Fees: ऐसे होती है हेराफेरी
पलवल में प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च और वरिष्ठ माध्यमिक श्रेणी (प्राइमरी, सेकंडरी, हायर और सीनियर सेकंडरी) के 300 से अधिक स्कूल हैं। शिक्षा विभाग को सूचना मिली है कि निजी स्कूल संचालक फॉर्म 6 में दिखाया गया वेतन स्टाफ को नहीं देते हैं। वे Form 6 में टीचर की सैलरी अधिक दिखाते हैं, और वेतन उन्हें कम दिया जाता है।
ऐसे में स्टाफ के हस्ताक्षर अधिक वेतन पर करा लेते हैं। इसके अतिरिक्त चेक पर भी हस्ताक्षर करा लेते हैं। अभिभावकों से अधिक फीस लेते हैं। फॉर्म छह में कम फीस दिखाते हैं। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) अशोक बघेल ने बताया कि फॉर्म छह आने के बाद सभी तथ्यों की जांच की जाएगी।
NEET: मेरिट में आने के बाद भी एडमिशन नहीं, एक गलती पड़ सकती है भारी, सुप्रीम कोर्ट पहुंचे स्टूडेंट्स
NEET में सफल आठ स्टूडेंट ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इन स्टूडेंट्स ने यूनानी कॉलेज में प्रोविजनल दाखिला लिया था लेकिन आयुष विभाग ने इसे नियमित नहीं किया। स्टूडेंट्स ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई कि वह आयुष विभाग को निर्देश दे कि यूनानी कॉलेज में बैचलर ऑफ यूनानी मेडिसिन एंड सर्जरी (BUMS) कोर्स में उनके दाखिले को नियमित किया जाए। स्टूडेंट्स की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह एक हफ्ते बाद सुनवाई करेगा। इससे पहले स्टूडेंट्स ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से गुहार लगाई थी, जहां से राहत नहीं मिलने के बाद वे सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं।
स्टूडेंट्स ने क्या कहा?
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने नीट क्वालिफाई किया और यूनानी कॉलेज में BUMS कोर्स में 2022-23 सेशन में प्रोविजनल दाखिला लिया। ऐसे में आयुष विभाग, भोपाल को निर्देश दिया जाए कि वह उनके एडमिशन को रेग्युलराइज करे।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उनका नाम मेरिट लिस्ट में आया था लेकिन उन्हें रजिस्ट्रेशन और काउंसलिंग के लिए नहीं बुलाया गया। आयुष विभाग ने उनके नाम दाखिले की आखिरी तारीख तक एडमिशन लेटर जारी नहीं किया। इसके बाद उन्होंने यूनानी कॉलेज को अप्रोच किया ताकि उनका प्रोविजनल दाखिला हो सके। जिसके बाद प्रोविजनल एडमिशन लेटर जारी कर दिया गया। बावजूद इसके आयुष विभाग ने उनके दाखिले को रेग्युलराइज नहीं किया है।
अब हर कॉलेज में दी जाएगी CPR ट्रेनिंग, इस बड़े कारण से UGC ने दिया निर्देश
CPR Training in Universities: युवाओं समेत हर उम्र के लोगों में सडन कार्डियक अरेस्ट या अचानक मौत के बढ़ते मामले बड़ी चिंता हैं। हंसते-गाते, खेलते-कूदते और सामान्य दिखने वाला शख्स अचानक गिर जाता है और उसकी मौत हो जाती है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में मरीज की जान बचाने के लिए कुछ समय पहले सीपीआर यानी कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) की ट्रेनिंग देने का अभियान बड़े स्तर पर शुरू किया। मेडिकल, एजुकेशन समेत सभी संस्थानों में यह अभियान चला।
UGC ने क्या कहा?
अब UGC ने देश की सभी यूनिवर्सिटीज और कॉलेजों के प्रिंसिपल्स से कहा है कि डॉक्टरों और चिकित्सा बिरादरी के सहयोग से सभी स्टूडेंट्स, फैकल्टी और स्टाफ को बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) की ट्रेनिंग दी जाए।
UGC ने आंकड़े देते हुए कहा है कि देश में केवल 0.1%% लोगों को ही बीएलएस तकनीक की जानकारी है। अब एजुकेशन सेक्टर में बड़े स्तर पर इस ट्रेनिंग को शामिल किया जाना चाहिए। जितने ज्यादा लोगों को यह ट्रेनिंग मिलेगी, उतने अधिक लोगों की जान बचाना संभव हो सकेगा।