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अब रेड मड से होगी हरियाली; वेदांता और आईसीएआर-सीटीसीआरआई का बड़ा कदम

 अब रेड मड से होगी हरियाली; वेदांता और आईसीएआर-सीटीसीआरआई का बड़ा कदम


क्या आपने कभी सोचा है कि एक फैक्ट्री से निकलने वाला बेकार पदार्थ कभी खेतों को उपजाऊ बना सकता है? यदि नहीं, तो वेदांता एल्युमीनियम ने ये कर दिखाया है। भारत की सबसे बड़ी एल्युमीनियम उत्पादक कंपनी, वेदांता एल्युमीनियम ने अब रेड मड जैसे इंडस्ट्रियल वेस्ट को खेती के काम लाने का फैसला किया है।

इस पहल की शुरुआत एक खास मौके पर हुई, जब केरल के माननीय राज्यपाल श्री राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर की मौजूदगी में वेदांता एल्युमीनियम और आईसीएआर-सीटीसीआरआई के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस कार्यक्रम में आईसीएआर-सीटीसीआरआई के निदेशक डॉ. बायजू के साथ वैज्ञानिकों की एक अनुभवी टीम भी शामिल रही, जिनमें डॉ. वी. रमेश, डॉ. एम. नेदुनचेझियान और डॉ. पी. सेतुरामन शिवकुमार के नाम शामिल हैं। ये सभी विशेषज्ञ देशभर में टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहे हैं।

वेदांता एल्युमीनियम के सीईओ श्री राजीव कुमार ने कहा, "हम सिर्फ प्रोडक्शन नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं। हमारा उद्देश्य रेड मड से ग्रीन फ्यूचर बनाना है।"

आईसीएआर-सीटीसीआरआई के निदेशक डॉ. बायजू ने भी इस साझेदारी को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि इससे किसानों और पर्यावरण, दोनों को फायदा होगा।

अब तक रेड मड का इस्तेमाल सीमेंट और कंस्ट्रक्शन जैसे उद्योगों में होता रहा है, लेकिन वेदांता एल्युमीनियम ने इसे खेती की ज़मीन को बेहतर बनाने में इस्तेमाल कर एक नई राह दिखाई है।

रेड मड वह पदार्थ होता है, जो एल्युमिना बनाने की प्रक्रिया में निकलता है। अब इसे खेतों की मिट्टी को बेहतर बनाने, बंजर ज़मीन को फिर से उपजाऊ बनाने और पुराने वेस्ट ज़ोन को हरा-भरा करने में इस्तेमाल किया जाएगा। यह एक अनोखा उदाहरण है कि कैसे फैक्ट्री का वेस्ट, अब खेत की ताकत बन सकता है।

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