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पिता की वो एक बात जो नंदन नीलेकण‍ि ने नहीं मानी... कितना सही हुए साबित?

नई दिल्‍ली: इन्फोसिस के सह-संस्थापक और भारत की डिजिटल क्रांति के प्रमुख सूत्रधार नंदन नीलेकणि ने अपनी जिंदगी के एक महत्वपूर्ण मोड़ के बारे में बताया। यह किस्सा उनकी जवानी का है। यह उनके असाधारण करियर की नींव रखता है। 1950 के दशक में बेंगलुरु में जन्मे नीलेकणि उस दौर में पले-बढ़े जब बच्चों का भविष्य अक्सर उनके माता-पिता तय करते थे। ज्‍यादातर लोगों के लिए विकल्प साफ थे- इंजीनियरिंग या मेडिकल। नीलेकणि ने इंजीनियरिंग चुनी। लेकिन, उनके पिता की इच्छा के विरुद्ध जाने के फैसले ने ही असली बदलाव किया। क्‍या था यह पूरा किस्‍सा? जानते हैं।

नयनतारा ने धनुष पर लगाए कई आरोप

यह मुकदमा तब दर्ज हुआ है, जब बीते कुछ हफ्तों में नयनतारा ने धनुष और उनकी प्रोडक्‍शन कंपनी पर एक के बाद एक कई आरोप लगाए हैं। नयनतारा ने दावा किया कि उन्‍होंने धनुष से फिल्‍म के फुटेज के इस्‍तेमाल के लिए इजाजत मांगी थी, जो नहीं दी गई। एक्‍ट्रेस ने यह भी कहा कि जब उन्होंने फिल्म के फुटेज का उपयोग नहीं करते हुए डॉक्यूमेंट्री में तीन सेकेंड का एक BTS फुटेज इस्‍तेमाल किया, तब धनुष ने 10 करोड़ की मांग करते हुए एक कानूनी नोटिस भेज दिया।

नीलेकणि का जन्म 1950 के दशक में हुआ था। उस समय माता-पिता ही बच्चों का करियर चुनते थे। डॉक्टर या इंजीनियर बनना आम बात थी। नीलेकणि के पिता चाहते थे कि वह IIT मद्रास से केमिकल इंजीनियरिंग करें। उन्होंने तार भी भेजा। लेकिन, नीलेकणि ने IIT बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग चुनी। यह उनके पिता की इच्छा के खिलाफ था। उस जमाने में माता-पिता की बात टालना बड़ी बात थी। लेकिन, नीलेकणि ने ऐसा किया।

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