छत्तीसगढ़ / बस्तर
5 वर्ष तक के बच्चों के आधार पंजीकरण हेतु बैठक 14 नवंबर को
जगदलपुर 13 नवंबर 2025
जिले में 5 वर्ष तक आयु वर्ग के सभी बच्चों के आधार पंजीयन के लक्ष्य को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए एक आवश्यक बैठक का आयोजन शुक्रवार 14 नवम्बर को दोपहर 2 बजे प्रेरणा हॉल में होगी, जहाँ पंजीकरण की वर्तमान स्थिति और भावी रणनीति पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इस बैठक में सभी संबंधित अधिकारियों और ऑपरेटरों की उपस्थिति को अनिवार्य किया गया है। इसमें सभी जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी, सभी बाल विकास परियोजना अधिकारी, ई-डिस्ट्रिक्ट के जिला प्रबंधक साथ ही सभी आधार ऑपरेटर और डाक विभाग के आधार ऑपरेटर शामिल होंगे।
विकासखंड स्तरीय बस्तर ओलंपिक का भव्य आगाज : हड़मा स्टेडियम में गूंजी खिलाड़ियों की हुंकार
खिलाड़ी गढ़ेंगे नया छत्तीसगढ़, नक्सलवाद से मुक्त होगा बस्तर : मंत्री केदार कश्यप
बस्तर , 11 नवम्बर 2025




वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने आज सुकमा जिला मुख्यालय स्थित हड़मा स्टेडियम में विकासखंड स्तरीय ‘बस्तर ओलंपिक‘ खेल प्रतियोगिता का भव्य शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने न केवल खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाया, बल्कि स्थानीय खेलों को बस्तर के शांतिपूर्ण भविष्य से भी जोड़ा। मंत्री श्री कश्यप ने प्रतियोगिता में शामिल सभी खिलाड़ियों को खेल नियमों का पालन करने और सच्ची खेल भावना से खेलने की शपथ दिलाई। उन्होंने रस्साकसी और वॉलीबॉल खेलों का शुभारंभ कर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर कलेक्टर भी साथ रहे।
खिलाड़ियों में अभूतपूर्व उत्साह- 43 हजार ने कराया पंजीयन
इस आयोजन को लेकर खिलाड़ियों में जबरदस्त उत्साह है। उन्होंने कहा कि विगत वर्ष की तुलना में इस वर्ष 43 हजार खिलाड़ियों ने बस्तर ओलंपिक खेल प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए पंजीयन कराया है। यह आयोजन सुकमा के साथ-साथ कोंटा और छिंदगढ़ विकासखंड में भी किया जा रहा है।
वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में खेल-कूद अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह मानसिक व शारीरिक विकास में विशेष योगदान देता है। उन्होंने महिला क्रिकेट विश्व कप का जिक्र करते हुए कहा कि देश की महिला खिलाड़ियों ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का परचम लहराया। मंत्री श्री कश्यप ने कहा ये खेल आपके लिए एक बेहतरीन मंच हैं, यह मानकर खेलें और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दें। पिछले वर्ष बस्तर ओलंपिक में 1.65 लाख लोगों ने भाग लिया था। इस बार यह संख्या 3 लाख से अधिक हो गई है, जो बस्तर ओलंपिक खेल की लोकप्रियता को दर्शाता है।
वन मंत्री श्री कश्यप ने सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि आप सभी खिलाड़ी अपने बेहतर खेल की बदौलत हमारे सुकमा का ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करेंगे। हम आने वाले समय में बस्तर को नक्सलवाद से पूर्ण मुक्त करने का प्रयास कर रहे हैं। हमारे उप-मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने भी पुनर्वास पर जोर देने की बात कही है। कार्यक्रम को महिला आयोग की सदस्य सुश्री दीपिका सोरी और वरिष्ठ जनप्रतिनिधि श्री धनीराम बारसे ने भी संबोधित किया।
इस अवसर पर विकासखंड स्तरीय कार्यक्रम में जनपद पंचायत कोंटा अध्यक्ष श्रीमती कुसुमलता कोवासी, जनपद उपाध्यक्ष सुकमा श्रीमती रीना पेद्दी, नगर पालिका परिषद सुकमा अध्यक्ष श्री हुंगाराम मरकाम, नगर पंचायत दोरनापाल अध्यक्ष श्रीमती राधा नायक, जिला पंचायत सदस्य श्री हुंगाराम मरकाम सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं खिलाड़ी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कोलावाड़ा गांव में शिक्षा की अनोखी क्रांति-ग्रामीणों ने खुद संभाली कमान
सरपंच, पंच, ग्राम सभा अध्यक्ष, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, शिक्षक, गांव के बुजुर्ग, महिलाएं, युवा सब मिलकर ला रहे गांव में शिक्षा क्रांति
पेसा कानून के तहत बनी ग्राम स्तरीय शिक्षा समिति उठाया गांव की शिक्षा का जिम्मा
बस्तर, 11 नवम्बर 2025


जगदलपुर से महज 30 किलोमीटर दूर बस्तर के वनांचल में स्थित इस छोटे से गांव कोलावाड़ा में कुछ ऐसा हो रहा है जो हर गांव के लिए एक मिसाल बन रहा है। पेसा कानून के तहत बनी ग्राम स्तरीय शिक्षा समिति ने गांव की शिक्षा व्यवस्था को न केवल संभाल लिया है, बल्कि उसे नई दिशा भी दे रही है। सरपंच, पंच, ग्राम सभा अध्यक्ष, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, शिक्षक, गांव के बुजुर्ग, महिलाएं और युवा सभी मिलकर एक टीम बन चुके हैं।
प्रशासन भी शिक्षा समिति को कर रहा सहयोग
इस टीम के सदस्य श्री विश्वनाथ नाग और श्री प्रेमकुमार नाग ने बताया कि टीम में समर्पित सदस्यों की भूमिका सराहनीय है, जो हर कदम पर आगे बढ़कर जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इनका मकसद साफ है प्रशासन के सहयोग से बच्चों को पढ़ाना, स्कूलों पर नजर रखना एवं शाला प्रबंधन सहित आंगनबाड़ी की गतिविधियों को सुचारु करना और गांव की हर समस्या को शिक्षा के जरिए सुलझाना। इस दिशा में शिक्षा विभाग के अधिकारियों सहित शिक्षकों का भी अहम भूमिका है।
हर घर जाकर दे रहे शिक्षा का संदेश
पिछले दो महीनों से समिति के सदस्य हर पारा, हर मोहल्ले में घर घर पहुंच रहे हैं। माता-पिता से बात कर बच्चों को समझा रहे हैं कि पढ़ाई ही आगे बढ़ने का रास्ता है। स्वच्छता, स्वास्थ्य, मलेरिया से बचाव और सबसे बड़ी बात नशे से दूर रहना, इन सब पर लगातार जागरूकता फैलाई जा रही है। गांव के युवा सरकारी नौकरियों तक पहुंच सकें, इसके लिए अभी से पूरे गांववासियों ने मिलकर प्रयास शुरू कर दिया है।
रूपये इक्कट्ठे कर बच्चों को दे रहे शिक्षण सामग्री
यहां बदलाव की शुरुआत हो चुकी है। गांव के युवाओं और समिति सदस्यों ने अपनी जेब से पैसे निकाले। जागरूक ग्रामीणों ने कुल 6,050 रुपए इकट्ठे किए और इस पैसे से बच्चों की पढ़ाई के लिए अतिरिक्त सामग्री पेन, कॉपी, पहाड़ा चार्ट, तीन व्हाइट बोर्ड, बल्ब, तार और होल्डर आदि खरीदी गई। हर पारा को एक बोर्ड मिला, ताकि बच्चे ग्रुप में पढ़ सकें। शाम ढलने पर भी पढ़ाई न रुके, इसके लिए बिजली की व्यवस्था की गई।
गांव के युवा बच्चों को दे रहे निःशुल्क ज्ञान
अब गांव के ही युवा स्वयंसेवकों ने भी बच्चों को निःशुल्क पढ़ाने की जिम्मेदारी अपने कंधों पर लेकर पहली से आठवीं तक के बच्चों को पढ़ा रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई के लिए सामग्री बांटने का दिन यादगार रहा। सरपंच, पंच, शिक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, बुजुर्ग, महिलाएं पूरा गांव उमड़ पड़ा। आंगनबाड़ी से लेकर आठवीं तक के शिक्षकों की मेहनत की तारीफ हुई। बच्चों के हाथों में नई कॉपियां, पेन और बोर्ड थमाए गए। समिति ने वादा किया आगे भी सहयोग जारी रहेगा।
स्कूल से ली छुट्टी तो शिक्षा समिति पहुंचेगी घर
स्कूल से गायब बच्चे अब घर पर नहीं बैठेंगे। शिक्षा समिति उनके घर जाएगी, कारण जानेगी और स्कूल भेजेगी। नशे की लत को दूर करने के लिए भी साथ में अभियान चलाया जा रहा है। स्वच्छता और स्वास्थ्य पर कार्यक्रम हो रहे हैं। स्कूल और आंगनबाड़ी की नियमित निगरानी हो रही है। जो बच्चा पढ़ने में रुचि दिखाएगा, उसे किताबें, पेन, जरूरत की हर चीज मिलेगी। अगले सत्र में जो बच्चा प्रथम श्रेणी लाएगा, उसे ग्राम सभा और समिति की ओर से इनाम जरूर मिलेगा।
कोलावाड़ा अब सिर्फ एक गांव नहीं रहा। यह एक उम्मीद बन चुका है। जहां लोग खुद अपने बच्चों का भविष्य गढ़ रहे हैं। जहां शिक्षा कोई सरकारी योजना नहीं, बल्कि गांव की अपनी मुहिम बन गई है। बस्तर का यह कोना अब पूरे राज्य को बता रहा है जब इच्छाशक्ति हो, तो रास्ते अपने आप बनते हैं।
बस्तर में शांति, सुरक्षा और विकास सरकार की प्राथमिकता : उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा
उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने माओवादियों से हथियार छोड़ मुख्यधारा में लौटने की अपील
बस्तर, 10 नवंबर 2025



छत्तीसगढ़ शासन के उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री श्री विजय शर्मा ने अपने दो दिवसीय प्रवास के दौरान आज बीजापुर जिला कार्यालय के इन्द्रावती सभागार में बीजापुर और सुकमा जिले के जनप्रतिनिधियों, पंचायत प्रतिनिधियों, सरपंचों तथा समाज प्रमुखों, मांझी, चालकी, गायता, पुजारी और पटेलों से संवाद किया।
इस बैठक में उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि बस्तर को अमन, चैन, शांति और सुरक्षा के साथ विकास के पथ पर अग्रसर करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। राज्य सरकार हर हाल में बस्तर को हिंसा मुक्त करने के लिए संकल्पित है। बस्तर में शांति, सुरक्षा और विकास सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि वर्षों से बस्तर संभाग के आदिवासी अंचल विकास से वंचित रहे हैं, पर अब समय आ गया है कि सभी मिलकर बस्तर को शांति और प्रगति के मार्ग पर ले जाएँ। श्री शर्मा ने बताया कि माननीय प्रधानमंत्री एवं केन्द्रीय गृहमंत्री ने सशस्त्र नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए समयसीमा तय की है। इसी दिशा में शासन की ‘पुनर्वास नीति 2025’ के अंतर्गत बड़ी संख्या में माओवादी संगठन छोड़कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं।
उन्होंने उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं ग्राम प्रमुखों से आग्रह किया कि वे भटके हुए युवाओं को समाज की मुख्यधारा में वापस लाने के लिए पहल करें। श्री शर्मा ने कहा कि यदि समय रहते पुनर्वास नहीं किया तो सुरक्षा बल अपनी जिम्मेदारी निभाएँगे। जो लौट आएंगे, उनका लाल कालीन बिछा कर स्वागत किया जाएगा और उनके सुनहरे भविष्य के लिए सरकार संकल्पित है।
गृहमंत्री ने बताया कि जगदलपुर में 210 माओवादी एक साथ हथियारों छोड़कर पुनर्वास कर चुके हैं, जिनमें 92 युवा बीजापुर जिले के हैं। ये सभी पुनर्वास केंद्र में कौशल प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने संबंधित परिवारों से अपील की कि वे अपने पुनर्वासित परिजनों से मिलने जरूर जाएँ ताकि उन्हें भी प्रोत्साहन मिले एवं अन्य भटके हुए युवाओं को भी लौटने के लिए प्रेरित करें।
उन्होंने बताया कि वे स्वयं पूर्वर्ती गांव की नक्सल लीडर हिड़मा की वृद्ध माता से मिलकर उनके पुत्र को हिंसा छोड़ने और समाज की मुख्यधारा में आने के लिए प्रेरित करने का अनुरोध किया है। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती जानकी कोरसा, बस्तर कमिश्नर श्री डोमन सिंह, आईजी श्री सुंदरराज पी, कलेक्टर श्री संबित मिश्रा, डीएफओ श्री रंगानाथन रामाकृष्णन वाय, सीईओ जिला पंचायत श्रीमती नम्रता चौबे, उपनिदेशक इन्द्रावती टाइगर रिजर्व श्री संदीप बलगा, सहित जनपद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सदस्य, सरपंच, समाज प्रमुख एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
:बंदूक की गूंज से फलों और फूलों की महक तक का सफर
बस्तर में साग-सब्जी, फलों की खेती से चमत्कारिक बदलाव
बस्तर , 10 नवम्बर 2025

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की नक्सल उन्मूलन की नीतियों और किसानों की आय बढ़ाने वाली योजनाओं ने बस्तर में विकास की नई इबारत लिख दी है। बस्तर के किसानों ने पारंपरिक धान, सरसों की खेती के साथ-साथ अब साग-सब्जी, फल, फूल की खेती से भी फायदा लेना शुरू कर दिया है। अब बस्तर में गोलियों की गूंज की जगह फलों और फूलों की खुशनुमा महक बिखर रही है। बस्तर में यह बदलाव कोई संयोग नहीं, बल्कि मेहनत, नवाचार और दूरदर्शिता का परिणाम है। वर्ष 2001-02 में सब्जियों की खेती महज 1,839 हेक्टेयर में सिमटी थी और उत्पादन केवल 18,543 मीट्रिक टन था। आज वही इसमें लगातार वृद्धि हुई है जिसका परिणाम है की अब सब्जियों का रकबा 12,340 हेक्टेयर चुका है और उत्पादन 1.90 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच चुका है।

बस्तर विश्व पटल पर एक ऐसा नाम जो कभी नक्सल की काली छाया और पिछड़ेपन की गहरी खाई में डूबा माना जाता था, आज वह बस्तर कृषि के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक परिवर्तन का साक्षी बन रहा है। छत्तीसगढ़ के इस आदिवासी बहुल इलाके में अब पारम्परिक खेती के स्थान पर टमाटर और मिर्च की खेती न केवल आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही है, बल्कि पड़ोसी राज्यों के बाजारों तक अपनी पहुंच भी बना रही है। अब बस्तर की मिट्टी में ड्रैगन फ्रूट की लालिमा, अमरूद की मिठास, चकोतरा की ताजगी, पपीते का रस और मिर्च की तीखापन खेतों में लहलहा रहे हैं। वे फल एवं मसाले जो कभी यहां उत्पादित नहीं हुए अनुकूल वातावरण और वैज्ञानिक सलाह से विकास की नई गाथा लिख रहे हैं।

बस्तर में फलों की बगिया 643 हेक्टेयर से बढ़कर 14,420 हेक्टेयर तक पहुंच गई है एवं उत्पादन 4,457 मीट्रिक टन से बढ़कर 64,712 मीट्रिक टन हो गया। यहां के किसानों द्वारा राज्य निर्माण के पूर्व कभी व्यापारिक स्तर पर फूलों की खेती नहीं की गयी थी आज वहां 207 हेक्टेयर में 13 सौ मीट्रिक टन फूलों का उत्पादन हो रहा है। इसी प्रकार मसाले इस क्षेत्र में सीमित मात्रा में उत्पादित होते थे अब 11 सौ हेक्टेयर से 9,327 मीट्रिक टन मसालों का उत्पादन यहां हो रहा है। औषधीय एवं सुगंधित पौधे जो कभी सीमित मात्रा में होते थे उनका भी किसानों द्वारा 66 सौ मीट्रिक टन से अधिक का उत्पादन किया जा रहा है।
इस हरित क्रांति में शासन की योजनाओं एवं आधुनिक तकनीक से आमूल चूल परिवर्तन दिखाई दिए हैं। एक ओर जहां किसानों को रियायती दरों पर आदान समाग्री प्राप्त हुई है वहीं शेडनेट योजना, प्रधानमंत्री सूक्ष्म सिंचाई योजना, राष्ट्रीय बागबानी मिशन से किसानों का उद्यानिकी फसलों की ओर रुझान बढ़ा है। जिसका मुख्य कारण लगातार तकनीकी मार्गदर्शन और सहायतासे है। जिससे किसानों ने लाभ लेकर जिले में 3.80 लाख वर्गमीटर क्षेत्र में शेडनेट हाउस लगाए गए हैं, करीब 19 हजार वर्गमीटर में पॉली हाउस, शेडनेट द्वारा 1.47 लाख वर्गमीटर में हाईब्रिड बीज भी तैयार किए जा रहे हैं जिनके लिए उन्हें शासन द्वारा अनुदान भी प्राप्त हुआ है।जगदलपुर के आसना में प्लग टाइप वेजिटेबल सीडलिंग यूनिट भी स्थापित है जो रोग-मुक्त पौधे न्यूनतम कीमत पर किसानों को मुहैय्या करवा रहे हैं।
सिंचाई के क्षेत्र में भी लगभग 3.5 हजार हेक्टेयर में ड्रिप इरिगेशन सिस्टम बिछाकर पानी की हर बूंद को सोना बनाया जा रहा है। ऑयल पाम योजना के तहत 735 हेक्टेयर में 499 किसानों द्वारा आधुनिक तरीकों से पाम की खेती की जा रही है वहीं बास्तानार में 58.64 हेक्टेयर में विशेष रूप से कॉफी एवं 20 हेक्टेयर में ड्रैगन फ्रूट की कृषि की जा रही है।
बस्तर की यह यात्रा आंकड़ों से कहीं आगे है, यह उन सैकड़ों किसानों की मुस्कान है, जो कभी बादलों के रहम पर जीते थे और आज तकनीक, प्रशिक्षण और सरकार की योजनाओं के सहारे अपने सपने बुन रहे हैं। माओवादियों की बंदूकें अब खामोश हैं, और खेतों में नई फसलें गुनगुना रही है। बस्तर के लोग अब आजीविका के समुचित साधनों के जरिए जीवन-यापन को बेहतर करने सहित खिलखिला रह रहे हैं।
उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा पहुंचे गीदम के साप्ताहिक बाजार
स्थानीय ग्रामीणों ने नक्सल भय से मुक्ति पर जताया आभार
रायपुर, 09 नवम्बर 2025




उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा आज अपने बस्तर संभाग के दौरे के दौरान गीदम पहुंचे, जहां उन्होंने स्थानीय साप्ताहिक बाजार का दौरा किया। अपने सहज और मिलनसार स्वभाव के लिए प्रसिद्ध श्री शर्मा ने बाजार में घूमते हुए ग्रामीणों और व्यापारियों से आत्मीय बातचीत की तथा उनके हाल-चाल पूछे।
बाजार में मौजूद स्थानीय व्यापारियों ने उपमुख्यमंत्री से चर्चा करते हुए बताया कि शासन की नीतियों से अब व्यापार में सुगमता आई है। उन्होंने कहा कि जीएसटी दरों में कमी से सामान सस्ते हुए हैं, जिससे उपभोक्ताओं और व्यापारियों दोनों को राहत मिली है। व्यापारियों ने यह भी कहा कि अब नक्सल भय समाप्त होने से वे निडर होकर बाजारों में अपना व्यापार कर पा रहे हैं, और ग्रामीणों तक सही कीमत पर आवश्यक वस्तुएं पहुंच रही हैं।
ग्रामीणों ने भी उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा के समक्ष शासन द्वारा नक्सल समस्या के समाधान के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में अब शांति और विकास की नई सुबह दिखाई दे रही है। नक्सली विचारधारा से भटके युवा अब मुख्यधारा में लौट रहे हैं, जिससे बस्तर में स्थायी शांति की नींव मजबूत हो रही है।
श्री शर्मा ने बाजार भ्रमण के दौरान स्थानीय फलों का स्वाद लिया और जनसाधारण से आत्मीयता से बातचीत की। उन्होंने कहा कि बस्तर के विकास के लिए स्थायी शांति सबसे आवश्यक है, और सरकार इस दिशा में निरंतर प्रयासरत है। इस अवसर पर बस्तर संभाग आयुक्त श्री डोमेन सिंह एवं पुलिस महानिरीक्षक श्री सुंदरराज पी भी उपस्थित रहे।
बस्तर ओलंपिक का जिला स्तरीय प्रतियोगिता 12 से 14 नवम्बर तक कांकेर में
जिला पंचायत सीईओ ने ली समीक्षा बैठक
उत्तर बस्तर कांकेर, 09 नवम्बर 2025
बस्तर ओलंपिक का जिला स्तरीय प्रतियोगिता 12 से 14 नवम्बर तक कांकेर स्थित पीएमश्री शासकीय नरहरदेव उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के खेल मैदान में आयोजित किया जाएगा। उक्त प्रतियोगिता में तीरंदाजी प्रतियोगिता शासकीय कन्या क्रीड़ा परिसर कांकेर में आयोजित होगी, शेष सभी प्रतियोगिताएं नरहरदेव उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के खेल मैदान में आयोजित किया जाएगा। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री हरेश मंडावी ने अधिकारियों की बैठक लेकर जिला स्तरीय बस्तर ओलंपिक की तैयारियों के संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश दिए। उनके द्वारा प्रतियोगिता में भाग लेने वाले बच्चों को जिला मुख्यालय तक लाने के लिए खुली वाहनों का उपयोग नहीं करने के लिए अधिकारियों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया, साथ ही भोजन, पेयजल सहित अन्य सुविधाओं पर भी विशेष रूप से ध्यान देने के निर्देश दिए गए। विभिन्न प्रकार के दायित्वों के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने कहा गया, क्रीड़ा स्थल पर चिकित्सा दल की ड्यूटी भी लगाने के निर्देश दिए गए। बैठक के दौरान बताया गया कि बस्तर ओलंपिक के जिला स्तरीय प्रतियोगिता में एथलेटिक्स-100 मी., 200 मी. और 400 मी., लंबी कूद, ऊंची कूद, शॉटपूट, डिस्कस थ्रो, जैवलिन थ्रो 4ग100 मी. रिले रेस, तीरंदाजी, फुटबॉल, कबड्डी, खो-खो, बैडमिंटन, हॉकी, कराते, व्हॉलीबॉल, वेटलिफ्टिंग तथा महिला सीनियर वर्ग के लिए रस्साकस्सी की प्रतियोगिता होगी। जूनियर वर्ग में बालक-बालिकाओं के लिए आयु सीमा 14 से 17 वर्ष निर्धारित है, वहीं सीनियर वर्ग में महिला-पुरूष दोनों वर्ग के लिए आयुबंधन नहीं है।
चिकित्सकों के लिए मानव स्वास्थ्य सेवा से बढ़कर, कोई खुशी और आनंद नहीं - उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा
बस्तर संभाग के संवेदनशील ग्रामों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के संबंध में उप मुख्यमंत्री, विधायक ने की चिकित्सकों से चर्चा


छत्तीसगढ़ शासन के उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा अपने संक्षिप्त एक दिवसीय प्रवास के दौरान स्व बलिराम स्मृति मेडिकल कॉलेज के चरक सभागार में मेडिकल कॉलेज के अध्ययनरत चिकित्सकों से संवाद करते हुए कहा कि सुरक्षा कैंपों के समीप संवेदनशील ग्रामों में मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों द्वारा आयोजित स्वास्थ्य शिविर एक नई पहल है, जो चिकित्सकों को बस्तर क्षेत्र की जनता से जुड़ने के साथ एक अनोखा अनुभव प्राप्त करने का अवसर है। हमारे सुझाव को स्वीकार कर कालेज के डीन और उनकी टीम के द्वारा संवेदनशील ग्रामों में एक-दो दिवसीय स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया इसके लिए बधाई। इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा देने में जो खुशी-आनंद की अनुभूति होगी,ओ पैसा से नहीं खरीदी जा सकती है। यहां चिकित्सकों के अलावा रायपुर के बड़े बड़े चिकित्सकों ने बस्तर संभाग के जिलों में आकर स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए। कालेज में तैयार हो रहे नए चिकित्सक भी ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए अपना मनोभाव जरूर बनाएं। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने स्वास्थ्य शिविर में शामिल हुए 18 सदस्यों से परिचय प्राप्त कर उनके कार्य की सराहना की। साथ ही कालेज में अध्ययनरत बस्तर संभाग के चिकित्सकों से भी उनके जिले की जानकारी के साथ परिचय प्राप्त किया।
इस अवसर पर जगदलपुर विधायक श्री किरण सिंह देव ने कहा कि सरकार द्वारा बस्तर में शांति बहाली के लिए सराहनीय कार्य किया जा रहा है। इसके अलावा जनता के बीच बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने की संवेदनशील ग्रामों में मेडिकल शिविर आयोजित करना भी एक नई पहल का स्वागत है। बस्तर मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों का दल जिन्होंने स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया उन्हें बहुत बहुत बधाई। बस्तर जैसे प्राकृतिक सुंदरता वाले इलाके में कला, संस्कृति को जानने-समझने के साथ चिकित्सा सेवा देना एक बेहतरीन अवसर मिला। इस प्रकार के कार्यक्रम में सभी चिकित्सकों को जाना चाहिए, इसका बहुत अच्छा प्रभाव क्षेत्र की जनता को मिलेगा। कार्यक्रम में आई जी श्री सुन्दरराज पी. ने भी चिकित्सकों को बधाई देते हुए आगे की कार्ययोजना पर स्वास्थ्य टीम, मेडिकल कालेज की टीम से चर्चा कर संवेदनशील क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने की बात कही।
कार्यक्रम में विधायक चित्रकोट श्री विनायक गोयल, कमिश्नर श्री डोमन सिंह, कलेक्टर हरिस एस, पुलिस अधीक्षक श्री शलभ सिंहा, डीन डॉ प्रदीप बेक, अस्पताल अधीक्षक डॉ अनुरूप साहू सहित अध्ययनरत चिकित्सक सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
वन्दे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर जगदलपुर में जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन
वन्दे मातरम् की 150 वीं वर्षगांठ के अवसर पर टाऊन हाल में किया गया कार्यक्रम का आयोजन
वन्दे मातरम के 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन शहर के श्यामा प्रसाद मुखर्जी (टाउन हाल) में किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि देश की आजादी का शस्त्र और देश को एकता के सूत्र में पिरोने वाले राष्ट्रीय गीत वन्दे मातरम् की रचना का 150 वीं वर्षगांठ के लिए देश-प्रदेश के सभी क्षेत्रों में कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्व. श्री बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय द्वारा 7 नवम्बर 1875 में रचना की गई थी, जिसका प्रकाशन आनंदमठ में हुआ था। रचना की प्रारम्भिक पंक्तियों को राष्ट्रीय गीत के रूप अपनाया गया। उन्होंने इसके इतिहास के सम्बद्ध में उल्लेख करते हुए कहा कि वन्दे मातरम् की 150 वीं वर्ष के लिए 7 नवम्बर से विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।
कार्यक्रम में वन्दे मातरम के 150वीं वर्षगांठ पर आधारित कार्यक्रम का शुभारंभ माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा किया गए। राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम का प्रसारण दूरदर्शन के माध्यम से समस्त शासकीय कार्यालय, शैक्षणिक संस्थान में किया गया। उक्त कार्यक्रम में स्कूली बच्चों के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी गई। सेजस और सरस्वती शिशु मंदिर के विद्यार्थियों द्वारा वन्दे मातरम् गीत का गायन किया गया। साथ ही जनप्रतिधियों और स्कूली बच्चों के द्वारा टाउन हॉल से सिटी ग्राउंड तक रैली भी निकली गई। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती वेदवती कश्यप, नगर निगम के सभापति श्री खेमसिंह देवांगन, पूर्व विधायक श्री बैदूराम कश्यप, कलेक्टर श्री हरिस एस, सीईओ जिला पंचायत श्री प्रतीक जैन, नगर निगम आयुक्त श्री प्रवीण वर्मा, एमआईसी के सदस्य, पार्षदगण, गणमान्य जनप्रतिनिधि, आम नागरिक, स्कूली छात्र-छात्रों उपस्थित रहे। इसके अलावा कलेक्टर कार्यालय, जिला पंचायत-जनपद कार्यालय सहित जिले के सभी शासकीय कार्यालयों में वन्दे मातरम् के 150 वीं वर्षगांठ पर आधारित कार्यक्रम और राष्ट्रीय गीत का गायन किया गया।
वंदे मातरम के 150 वर्ष कमिश्नर कार्यालय में किया गया वन्दे मातरम् का सामूहिक गायन
भारत के राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर शुक्रवार 07 नवंबर को कार्यालय कमिश्नर बस्तर संभाग में प्रातः 11 बजे वंदे मातरम् का सामूहिक गायन किया गया। साथ ही इस दौरान देश की राजधानी नई दिल्ली में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा उदघाटन किए जा रहे राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम को वर्चुअल तौर पर सभी अधिकारी-कर्मचारियों ने तन्मयता के साथ देखा। इस मौके पर कमिश्नर बस्तर श्री डोमन सिंह सहित डिप्टी कमिश्नर श्री बीएस सिदार एवं गीता रायस्त और कमिश्नर कार्यालय समेत कोष-लेखा एवं पेंशन, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण कार्यालयों के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। इस ऐतिहासिक अवसर पर कलेक्टोरेट सहित जिला पंचायत और अन्य सभी शासकीय कार्यालयों में भी अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा वंदे मातरम् का सामूहिक गायन किया गया।
उल्लेखनीय है कि भारत का राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम रचना के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम आगामी एक वर्ष तक आयोजित किया जाएगा। जो 7 नवंबर 2025 को शुरू होगा और चार चरणों में आयोजित होते हुए 07 नवम्बर 2026 तक चलेगा। इस दौरान शासकीय कार्यालयों, शिक्षण संस्थाओं और विभिन्न संगठनों द्वारा वंदे मातरम पर आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सांस्कृतिक गतिविधियों के अंतर्गत, प्रमुख गायकों द्वारा राष्ट्रगीत पर आधारित विशेष संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियाँ दी जाएंगी, और शैक्षणिक संस्थानों में नेशनल कैडेट कोर, राष्ट्रीय सेवा योजना और स्काउट-गाइड जैसे संगठनों की सहभागिता से वाद-विवाद, प्रश्नोत्तरी और गीत गायन जैसी विशिष्ट गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
प्राकृतिक आपदा पीड़ित 04 परिवारों को दी गई 16 लाख रूपए की आर्थिक सहायता
कलेक्टर श्री हरिस एस. द्वारा राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4 के तहत् प्राकृतिक आपदा पीड़ित 04 परिवारों को 16 लाख रूपए की आर्थिक सहायता राशि प्रदान करने की स्वीकृति दी गई है। कलेक्टर द्वारा तहसील लोहण्डीगुड़ा ग्राम मारडूम निवासी चिंता मंडावी की मृत्यु पानी में डूबने से पुत्र संपत मंडावी को, तहसील बास्तानार ग्राम बडे़ काकलूर निवासी सुनिता मंडावी की मृत्यु सांप काटने से माता श्रीमती कोसी का,े तहसील तोकापाल ग्राम करंजी निवासी राजनन्दिनी मंडावी की मृत्यु पानी में डूबने से पिता श्री आयतु मंडावी को और तहसील जगदलपुर ग्राम मारकेल निवासी चेतन की मृत्यु पानी में डूबने से पत्नि श्रीमती तुलावती को चार-चार लाख रूपए की सहायता राशि प्रदान करने की स्वीकृति दी गई है।
लखपति दीदी योजना से महिलाओं ने गढ़ी स्वरोजगार से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल
बस्तर, 06 नवम्बर 2025



बस्तर जिले की महिलाएँ आज लखपति दीदी योजना से स्वरोजगार से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल गढ़ रही हैं। स्व सहायता समूह की सदस्य कलाबत्ती पोयाम, मंगतीन, कमली कश्यप, प्रमिला ठाकुर और शोभा बघेल ने अपने परिश्रम और संकल्प के बल पर “लखपति दीदी योजना” के अंतर्गत सफलता की नई ऊँचाइयाँ हासिल की हैं।
कलाबत्ती और मंगतीन ने पशुपालन से अर्जित की अतिरिक्त आय
तोकापाल विकासखंड के ग्राम पंचायत भडिसगाँव की उजाला स्व सहायता समूह की सदस्य श्रीमती कलाबत्ती पोयाम और मंगतीन, जो पहले सीमित आय से परिवार का भरण - पोषण करती थीं, आज कृषि कार्य और पशुपालन से सालाना लाखों की आमदनी अर्जित कर रही हैं। समूह से जुड़कर बिहान योजना से जुड़ने के एक पश्चात सामुदायिक निवेश कोष और बैंक लिंकेज की राशि से श्रीमती कलाबत्ती पोयाम ने बतख पालन का और श्रीमती मंगतीन ने बकरी पालन पशुपालन को अतिरिक्त आय के साधन के रूप में विकसित किया। साथ ही आधुनिक खेती के तौर-तरीके अपनाए है अब उनकी मेहनत का परिणाम यह है कि उनके घर में आर्थिक समृद्धि आई है और वे अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन गई हैं।
कमली ने किराना दुकानदार बन तय की आत्मनिर्भरता की राह
वहीं मटकोट निवासी कमली कश्यप और प्रमिला ठाकुर ने कृषि कार्य, पशुपालन के साथ - साथ किराना दुकान संचालन के माध्यम से अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएं हैं। इन दोनों ने छोटे स्तर से शुरुआत की, लेकिन समूह की सहायता और लखपति दीदी योजना के मार्गदर्शन से आज वे स्थायी आय के साथ परिवार की मजबूत आर्थिक आधारशिला बन चुकी हैं। बिहान योजना से जुड़ने के एक पश्चात सामुदायिक निवेश कोष और बैंक लिंकेज की राशि से कमली ने दो एकड़ में मक्का की खेती करते हुए 45 हजार का मुनाफा कमाया, उसी राशि से छोटा किराना की दुकान खोली, साथ में मुर्गी पालन का व्यवसाय भी कर रही। वहीं प्रमिला ठाकुर ने बिहान योजना से जुड़ने के एक पश्चात सामुदायिक निवेश कोष और बैंक लिंकेज की राशि से कृषि कार्य और बतख पालन का कार्य के लिए सहयोग मिला।
शोभा कर रहीं जूट निर्माण का कार्य
ग्राम परचनपाल की शोभा बघेल ने अपने कौशल का उपयोग करते हुए सीसल जूट सामग्री निर्माण का कार्य शुरू किया। उनकी मेहनत और रचनात्मकता ने न केवल उन्हें आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि स्थानीय स्तर पर अन्य महिलाओं को भी रोजगार के अवसर दिए। उनके द्वारा तैयार उत्पाद अब स्थानीय बाजारों में लोकप्रिय हो रहे हैं।
इन सभी महिलाओं की यह यात्रा साबित करती है कि यदि अवसर और मार्गदर्शन मिले, तो ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएँ भी आर्थिक रूप से सशक्त होकर “लखपति दीदी” बनने की राह पर आगे बढ़ सकती हैं।लखपति दीदी योजना ने न केवल इन महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार किया, बल्कि उनके आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान को भी नई ऊँचाई दी है। आज ये महिलाएँ समाज में प्रेरणा की मिसाल हैं - आत्मनिर्भर भारत के सशक्त प्रतीक।
बस्तर में हजारों आदिवासी परिवारों को मिला वन भूमि का अधिकार
जगदलपुर । छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में अनुसूचित जनजातियों और अन्य पारंपरिक वन निवासियों को एक बड़ी सौगात मिली है, जब हजारों परिवारों को उन्हें उनके पारंपरिक काबिज वन भूमि का अधिकार प्रदान किए गए हैं। यह कदम न केवल आदिवासी समुदायों की आजीविका को मजबूत कर रहा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में भी एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। अनुसूचित जनजाति और अन्य परम्परागत वन निवासी अधिनियम के तहत बस्तर जिले में व्यक्तिगत वन अधिकार पट्टों के तहत 35,180 आवेदनों में से 22,775 हेक्टेयर क्षेत्र की मंजूरी दी गई है। यह पट्टे उन आदिवासियों को दिए गए हैं जो पीढ़ियों से जंगलों में रहते आए हैं और अब अपनी काबिज वन भूमि का कानूनी हक पा रहे हैं। इससे वन अधिकार प्राप्त हितग्राहियों को खेती-किसानी को बढ़ावा देकर आजीविका संवर्धन में सहूलियत हो रही है।
अनुसूचित जनजाति और अन्य परम्परागत वन निवासी अधिनियम के तहत जिले में सामुदायिक वन अधिकार पट्टों के अंतर्गत 6,209 आवेदनों को मंजूरी मिली है जिसमें 24,506 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल है। इन क्षेत्रों का स्कूल, अस्पताल, आंगनबाड़ी केन्द्र, चारागाह इत्यादि सार्वजनिक प्रयोजन के लिए उपयोग किया जा रहा है। वहीं सामुदायिक वन संसाधन अधिकार के तहत 348 आवेदनों पर 1,25,962 हेक्टेयर क्षेत्र का वितरण किया गया है। ये वनाधिकार स्थानीय समुदायों को वनोपज संग्रहण एवं जड़ी-बूटी का समुचित दोहन सहित वनों के प्रबंधन, संरक्षण और उपयोग की जिम्मेदारी मिली है, जिससे जैव विविधता की रक्षा होती है और वनों की सुरक्षा एवं प्रबंधन में स्थानीय समुदाय की सहभागिता को सुनिश्चित हो रही है। साथ ही उक्त वन संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के फलस्वरूप इन वन निवासियों की आर्थिक स्थिति को सुधारने में सहायता मिल रही है। ये वनाधिकार पट्टे न सिर्फ भूमि उपयोग का अधिकार देते हैं, बल्कि सशक्तिकरण का माध्यम बनते हैं। इससे उनके सामाजिक अधिकारों की रक्षा होने सहित विकास योजनाओं में उनकी भागीदारी बढ़ी है। वहीं सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षण करने में व्यापक पैमाने पर मदद मिल रही है।
राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता का हुआ आगाज, कांकेर जिले को मिली मेजबानी
बस्तर सहित सरगुजा, बिलासपुर, रायपुर और दुर्ग जोन के 280 खिलाड़ी करेंगे प्रदर्शन
विधायक श्री नेताम ने खेल भावना से उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की अपील की
उत्तर बस्तर कांकेर, 06 नवम्बर 2025
25वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता के चार दिवसीय आयोजन का शुभारम्भ आज नरहरदेव उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के खेल परिसर में किया गया। उक्त राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में प्रदेश के 05 जोन बस्तर, सरगुजा, बिलासपुर, रायपुर तथा दुर्ग जोन के 280 खिलाड़ी खो-खो (बालक-बालिका, अंडर-19), हैण्डबॉल (बालिका, अंडर-17) और क्रिकेट (बालिका अंडर-17) खेलों की प्रतियोगिता में सम्मिलित होंगे। इस दौरान मुख्य अतिथि के तौर पर विधायक श्री आशाराम नेताम ने खेल प्रतियोगिता के विधिवत् शुभारम्भ की घोषणा की।
अपने उद्बोधन में विधायक श्री नेताम ने कहा कि यह हर्ष की बात है कि कांकेर जिले को राज्यस्तरीय खेल प्रतियोगिताओं की मेजबानी का अवसर मिला है। सभी खिलाड़ी खेल को समरसता के साथ खेल भावना के साथ खेलें। उन्होंने आगे कहा कि खेलों के माध्यम से परस्पर जोड़ने का सतत् प्रयास प्रदेश सरकार कर रही है। केन्द्र व राज्य सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति और लगातार कार्रवाई के चलते बस्तर नक्सलमुक्त की ओर सतत् अग्रसर है। विधायक ने सभी खिलाड़ियों से अपील करते हुए अपनी खेल प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की अग्रिम शुभकामनाएं दीं। इस मौके पर उन्होंने सभी खिलाड़ियों को 25वीं राज्य स्तरीय क्रीड़ा प्रतियोगिता में खेल भावना से प्रदर्शन करने की शपथ दिलाई। कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर ने अपने उद्बोधन में कहा कि राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी खिलाड़ी पहले ही अपने बेहतरीन खेल प्रदर्शन यहां तक पहुंचे हैं। आज के दौर में खेल को भावी कैरियर के रूप में देखा जा रहा है। श्रेष्ठ खिलाड़ी अपने समाज, जिला, प्रदेश ही नहीं, देश में अपनी विशिष्ट छाप छोड़ता है। उन्होंने सभी खिलाड़ियों को टीम स्पिरिट के साथ अपने जीवन का श्रेष्ठ प्रदर्शन करने की बात कही। विशिष्ट अतिथि के तौर पर उपस्थित राज्य मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष श्री भरत मटियारा ने भी अपने संबोधन में खेल के माध्यम से अपने जिला व प्रदेश को गौरवान्वित कर अनुशासन के साथ बेहतर प्रदर्शन करने की अपील उपस्थित खिलाड़ियों से की।
इसके पहले, जिला शिक्षा अधिकारी ने 25वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता के आयोजन के संबंध में प्रतिवेदन का वाचन कर जानकारी दी। शुभारम्भ अवसर पर नरहरदेव विद्यालय के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से आकर्षक नृत्य की प्रस्तुति दी। साथ ही सभी जोन के खिलाड़ियों ने खेल मैदान में मार्चपास्ट किया। इस अवसर पर राज्य हस्तशिल्प बोर्ड की अध्यक्ष श्रीमती शालिनी राजपूत, नगरपालिका कांकेर के अध्यक्ष श्री अरूण कौशिक, जिला पंचायत की उपाध्यक्ष श्रीमती तारा ठाकुर, जिला पंचायत के सीईओ श्री हरेश मंडावी, पूर्व विधायक श्रीमती सुमित्रा मारकोले सहित पार्षदगण एवं नागरिकगण और काफी संख्या में पांचों जोन से पहुंचे खिलाड़ी, मैच रैफरी, कोच एवं आयोजन समिति के पदाधिकारी मौजूद थे।
समर्थन मूल्य पर धान खरीदी 2025 : जिले में धान खरीदी की निगरानी हेतु इंटीग्रेटेड कमांड एवं कंट्रोल सेंटर गठित
जगदलपुर, 06 नवम्बर 2025
खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की व्यवस्था को सुदृढ़, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के उद्देश्य से कलेक्टर श्री हरिस एस द्वारा जिला स्तरीय इंटीग्रेटेड कमांड एवं कंट्रोल सेंटर एवं नियंत्रण कक्ष का विधिवत गठन करते हुए अधिकारी-कर्मचारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग मंत्रालय नया रायपुर से प्राप्त निर्देशों और जिला स्तरीय उड़नदस्ता दल की अनुशंसा के आधार पर यह पहल किया गया है। इस सेल का प्राथमिक उद्देश्य धान खरीदी के दौरान संभावित अनियमितताओं पर नियंत्रण रखना और धान के अवैध पुनर्चक्रण को रोकना है, ताकि वास्तविक किसानों को ही उनकी उपज का सही मूल्य मिल सके।
उक्त जिला स्तरीय कंट्रोल सेल जिला विपणन अधिकारी कार्यालय जगदलपुर में स्थापित की गई है, जहाँ नियुक्त अधिकारी और कर्मचारी प्रभावी ढंग से निगरानी सुनिश्चित करेंगे। सेल में तैनात अधिकारियों में डिप्टी कलेक्टर श्री सत्येन्द्र कुमार बंजारे मोबाइल नंबर +91-78884-78891 को प्रभारी अधिकारी का दायित्व सौंपा गया है। उनके साथ सहायक प्रोग्रामर श्रीमती मेहरुन निशा मोबाइल नंबर 94079-43643 और श्री अघम भास मोबाइल नंबर +91-89628-49662 तकनीकी सहायक और डेटा प्रबंधन का कार्य देखेंगे। साथ ही डाटा एंट्री ऑपरेटर श्री अभिषेक पाण्डेय मोबाइल नंबर +91-96699-66770 और श्री अभिषेक राव मोबाइल नंबर +91-79993-64923) डेटा प्रविष्टि एवं संचालन में सहायता करेंगे। वहीं जिला विपणन कार्यालय के लेखा अधिकारी श्री बलिराम कश्यप मोबाइल नंबर +91-99070-80814 को इस महत्वपूर्ण सेल का नियमित रूप से सुचारू संचालन एवं मॉनिटरिंग की जवाबदेही सौंपी गई है। कंट्रोल सेल अपने कामकाज में संपूर्ण पारदर्शिता बनाए रखने के लिए एक रजिस्टर का उपयोग करेगा, जिसमें समस्त गतिविधियों को पृथक से दर्ज किया जाएगा। इसके अलावा सेल का एक मुख्य कार्य जिला स्तरीय एवं तहसील स्तरीय सूचना का त्वरित निराकरण सुनिश्चित करना होगा। समस्त प्राप्त शिकायतें व सुझाव और निराकरण की जानकारी नियंत्रण कक्ष नंबर +91-74898-70170 पर संकलित की जाएगी और तत्पश्चात इसे खाद्य शाखा जगदलपुर को प्रेषित किया जाएगा।
बस्तर में विद्युत क्रांति : 25 वर्षों में हर गांव तक पहुंची बिजली की रोशनी
दूरस्थ ग्रामीण इलाकों तक हो रहा उजियारा
रायपुर, 02 नवम्बर 2025

बस्तर की पावन धरा अब सिर्फ जंगलों और आदिवासी संस्कृति की गवाह नहीं रह गई, बल्कि बिजली की रोशनी हर गांवों में पहुंची है। पिछले पच्चीस वर्षों में जगदलपुर ग्रामीण संभाग ने विद्युतीकरण के क्षेत्र में जो छलांग लगाई है, वह किसी क्रांति से कम नहीं है। वर्ष 2000 में जहां एक गांव तक बिजली पहुंचाना चुनौती थी, वहीं 2025 में हर मजरा-टोला, हर घर रोशनी से जगमगा रहा है। अब बस्तर जिले में विद्युतीकरण का स्तर सौ फीसदी हो चुका है। आदिवासी बहुल इस इलाके के लिए यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। गांव-गांव में फैले विद्युत सुविधा ने जनजीवन को आसान किया। खेती-बाड़ी के लिए सिंचाई में भी किसानों को बड़ी सहूलियत हो रही है।

कार्यपालन अभियंता जगदलपुर ग्रामीण संभाग श्री पीके अग्रवानी ने बताया कि जगदलपुर ग्रामीण संभाग के 577 गांव और शहर क्षेत्र का एक गांव मिलाकर कुल 578 गांव अब पूरी तरह बिजली से जुड़ चुके हैं। मजरा-टोलों की संख्या जहां बस्तर में राज्य निर्माण के समय 3989 थी अब बढ़कर 5107 हो गई है, और इनमें से हर एक तक विद्युत की लाइनें पहुंच चुकी हैं।
यह बदलाव सिर्फ तारों और खंभों की कहानी नहीं, बल्कि बुनियादी ढांचे की लंबी कल्याणकारी क्रांति का परिणाम है। 33/11 केवी सब स्टेशनों की संख्या महज छह से बढ़कर 27 हो गई, जिनकी क्षमता 24 मेगावोल्ट एम्पीयर से छलांग लगाकर 138.70 मेगावोल्ट एम्पीयर तक जा पहुंच चुकी है। वहीं 11 केवी लाइनों का जाल 1390 किलोमीटर से बढ़कर 4850 किलोमीटर तक विस्तृत हो चुका है, जबकि कम वोल्टेज की लाइनें 2257 किलोमीटर से बढ़कर 6017 किलोमीटर तक पहुंच गई हैं।
इस सफर में चुनौतियां भी कम नहीं रहीं। इस दौरान झारा घाटी में माओवादियों ने बिजली के टावर को गिरा दिया था, जिसके कारण 20 दिनों से अधिक समय तक आधे से अधिक बस्तर संभाग में बिजली गुल की भयावह समस्या उत्पन्न हुई थी। उसके बाद फिर ब्लैक आउट हुआ था। इन विद्युत अवरोध की स्थिति को देखते हुए बस्तर के समीप परचनपाल में लगभग 450 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित 400 केवी सब स्टेशन का निर्माण किया गया, जो क्षेत्रीय ग्रिड को मजबूत बनाते हुए बिजली की स्थिरता और गुणवत्ता सुनिश्चित कर रहा है। इसी क्रम में 132 केवी क्षमता का एक सब स्टेशन भी स्थापित की गई है, साथ ही 132 केवी लाइनें 180 किलोमीटर से 254 किलोमीटर तक विस्तारित हुई हैं। इन उच्च वोल्टेज सब स्टेशनों के साथ ट्रांसफॉर्मरों में नई क्षमताएं जुड़ीं है और दो गुणा तीन सौ पंद्रह, दो गुणा एक सौ साठ और पांच गुणा चालीस मेगावोल्ट एम्पीयर-जो वोल्टेज ड्रॉप को कम कर बिजली की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार ला रही हैं।
इसके अतिरिक्त, 220 केवी और 33 केवी स्तर पर भी आधारभूत कार्य पूरे हो चुके हैं, जो दूरस्थ क्षेत्रों में भी निर्बाध और उच्च गुणवत्ता वाली विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित कर रहे हैं। इन आंकड़ों के पीछे की वास्तविक स्थिति उपभोक्ताओं की बढ़ती संख्या है। वर्ष 2000 में जहां कुल उपभोक्ता 5380 थे, वहीं आज दो लाख 19450 घरों तक बिजली का मीटर लग चुका है। सामान्य उपभोक्ता 59000 से बढ़कर एक लाख 68 हजार हो गए हैं। विद्युत पंप उपभोक्ता 900 से 9083 हो गए हैं और बीपीएल उपभोक्ताओं की संख्या 30 हजार से बढ़कर एक लाख 14 हजार तक जा पहुंची है।
कार्यपालन अभियंता जगदलपुर ग्रामीण संभाग श्री प्रदीप अग्रवानी के अनुसार यह चमत्कार केंद्र की सौभाग्य योजना और दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना सहित मुख्यमंत्री मजरा-टोला विद्युतीकरण योजना का नतीजा है। अब बस्तर में बिजली की कमी से न ही उद्योगों के विकास रुकेंगे और न ही सिंचाई रुकेगी और न ही गांव अंधियारे में रहेंगे।
यह विकास बस्तर को आत्मनिर्भर बनाने के साथ पूरे छत्तीसगढ़ के लिए मिसाल बन रहा है। आने वाले वर्षों में नवीकरण ऊर्जा पर जोर के साथ यह रोशनी और दूर तक चमकेगी। बस्तर अब अंधेरे का पर्याय नहीं, उजाले का नया ठौर बन गया है।