छत्तीसगढ़ / बस्तर
विभागीय परीक्षा माह जनवरी 2026 हेतु अधिकारियों-कर्मचारियों से 22 दिसंबर तक आवेदन पत्र आमंत्रित
जगदलपुर, 28 अक्टूबर 2025
राज्य शासन द्वारा उन अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए (जिनके लिए विभागों द्वारा विभागीय परीक्षा निर्धारित की गई हों) विभागीय परीक्षा माह जनवरी-2026 के तहत 27 जनवरी से 03 फरवरी 2020 तक विभागीय परीक्षा आयोजित किए जाने परीक्षा कार्यक्रम घोषित किया गया है। उक्त निर्देश के परिप्रेक्ष्य में कमिश्नर बस्तर संभाग श्री डोमन सिंह द्वारा सभी कलेक्टर्स को जारी परिपत्र में कहा गया है कि उपरोक्त विभागीय परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए जिले के समस्त विभागों एवं कार्यालयों को सूचना प्रसारित किया जाए।
इस विभागीय परीक्षा में बैठने के इच्छुक अधिकारियों एवं कर्मचारियों से विषयवार आवेदन पत्र भरने की अंतिम तिथि 22 दिसंबर 2025 तक नियत की गई है। निर्धारित तिथि तक प्राप्त आवेदनों को संकलित कर संलग्न प्रारूप में सूची तैयार कर 31 दिसंबर 2025 के पूर्व कार्यालय कमिश्नर बस्तर संभाग जगदलपुर को अनिवार्य रूप से प्रेषित किया जाए, ताकि विभागीय परीक्षा में बैठने हेतु इच्छुक अधिकारियों-कर्मचारियों के विषयवार प्रश्न-पत्रों की मांग राज्य शासन से किया जा सके। साथ ही परीक्षा आयोजन संबंधी आवश्यक तैयारी एवं व्यवस्था सुनिश्चित किया जा सके। निर्धारित तिथि के बाद अथवा विलंब से प्राप्त आवेदन पत्रों पर विचार नहीं किया जाएगा।
CRPF जवानों ने जगदलपुर में लगाई दौड़
जगदलपुर । छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में शनिवार को 80 बटालियन केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल ने एक भारत श्रेष्ठ भारत के तहत फ्रीडम दौड़ लगाई। पुलिस उप महानिरीक्षक आईपीएस रेंज कार्यालय जगदलपुर एस अरुल कुमार के मार्गदर्शन में एवं कमाण्डेन्ट, जितेन्द्र कुमार के नेतृत्व में एक भारत श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम-2025 का आयोजन जगदलपुर में किया गया।
एक भारत श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम-2025 कार्यक्रम में खेल मंत्रालय के निर्देशानुसार सीआरपीएफ फिट इंडिया फ्रीडम रन 80 वीं वाहिनी केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के अधिकारी, अधिनस्थ अधिकारी, जवानों के साथ-साथ लालबाग फिटनेश एकेडमी जगदलपुर के युवक-युवतियों एवं आमजनो ने सीआरपीएफ फिट इंडिया फ्रीडम रन में दौड लगाई एवं कार्यकम में बढ-चढ भाग लिये। दौड़ का आयोजन मुख्यालय 80 वीं वाहिनी से रेलवे स्टेशन जगदलपुर एवं वापसी तक दौड कराया गया जिसमें बढ़-चढ के भाग लिये।
एक भारत श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम में कमांडेंट जितेन्द्र कुमार द्वारा भारत की एकता एवं महत्वता के बारें में बृहद् जानकारी साझा कर जागरुक किया गया कि यह पहल भारत सरकार द्वारा किया गया अग्रीण प्रयास है। जिससे देश में लोगो को एक- दूसरे से जोड़कर एकता और सदभावना का बढ़ावा दिया जा सके। यदि हर व्यक्ति फिट इंडिया फीडम में अपने दिनचर्या में दौड, व्ययाम एवं योग शामिल कर स्वस्थ्य रहे। जिससे हमारा घर, परिवार एवं देश स्वस्थ्य रहे। ताकि, सभी बीमारियों से निजात पाया जा सके।
गुजरात में मोदी-शाह को बस्तर का विकास दिखाएंगे रिखी, गौर नृत्य से होगी शुरुआत
बस्तर। प्रख्यात लोकवाद्य संग्राहक रिखी क्षत्रिय व उनका समूह छत्तीसगढ़ बस्तर की तरक्की को गौर नृत्य के माध्यम से समूचे देश को दिखाएगा। स्वतंत्र भारत के प्रथम गृह मंत्री और उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं जन्म जयंती के आयोजनों की श्रृंखला में राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम स्टैच्यू ऑफ यूनिटी एकता नगर गुजरात में 31 अक्टूबर को होने जा रहा है।
खास बात यह कि इस आयोजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी रहेगी। यहां देश भर से 7 राज्यों के चुनिंदा सांस्कृतिक दलों को आमंत्रित किया गया है। जिसमें लोकवाद्य संग्राहक रिखी क्षत्रिय और उनका समूह छत्तीसगढ़-बस्तर की झांकी संग गौर नृत्य की प्रस्तुति देगा। रिखी व उनका समूह बुधवार को भिलाई से गुजरात के लिए रवाना हो गया है।
उल्लेखनीय है कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के दो साल के समारोह की शुरुआत पिछले वर्ष 31 अक्टूबर 2024 को हुई थी। इसी कड़ी में इस वर्ष 31 अक्टूबर को भव्य आयोजन होने जा रहा है।
इस झांकी के साथ रिखी क्षत्रिय का समूह गुजरात में 02 नवम्बर तक एकता नगर, गुजरात में रहेगा। छत्तीसगढ़ शासन की ओर से इस संबंध में रिखी क्षत्रिय के नाम पत्र जारी किया गया है। जिसके मुताबिक जनसंपर्क संचालनालय की ओर से सहायक जनसंपर्क अधिकारी तेज बहादुर सिंह भुवाल टीम लीडर होंगे।
रक्षा/गृह मंत्रालय की समिति ने किया है चयन
गुजरात में प्रदर्शित होने वाली छत्तीसगढ़ राज्य की झांकी की थीम ‘’बस्तर की धरती-संस्कृति, सृजन और प्रगति की गाथा” है। इसका चयन रक्षा/गृह मंत्रालय भारत सरकार की विशेषज्ञ समिति ने किया है। इस महत्वपूर्ण अवसर को देखते हुए रिखी क्षत्रिय व उनकी टीम ने भी खूब मेहनत की है। कुहूकी कला ग्राम मरोदा सेक्टर में इस विशेष प्रस्तुति के लगातार अभ्यास चलता रहा। रिखी क्षत्रिय ने बताया कि झांकी में गौर नृत्य की प्रस्तुति होगी, जिसके लिए वहां जाने वाले दल के सभी कलाकारों ने तैयारी की है।
गुजरात जाने वाले कलाकारों में प्रदीप ठाकुर बालोद, भीमेश सतनामी बेमेतरा, सुनील कुमार बालोद, पारस रजक कैंप दो भिलाई, वेद प्रकाश बालोद, प्रियंका साहू कुम्हारी दुर्ग, हेमा पाटन, तुलसी ध्रुव भिलाई चरोदा, लीना ध्रुव भिलाई चरोदा, नेहा देवांगन कैंप-2 और सीमा विश्वकर्मा कलंगपुर बालोद शामिल हैं।
प्राकृतिक आपदा पीड़ित परिवार को दी गई आर्थिक सहायता राशि
जगदलपुर । कलेक्टर हरिस एस. द्वारा राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4 के तहत् प्राकृतिक आपदा पीड़ित 01 परिवार को 4 लाख रूपए की आर्थिक सहायता राशि प्रदान की गई है। कलेक्टर द्वारा तहसील लोहाण्डीगुड़ा ग्राम नेगानार निवासी मैतुराम की मृत्यु पानी में डूबने के कारण पुत्र सुखदेव को चार लाख रूपए की आर्थिक सहायता राशि प्रदान करने की स्वीकृति दी गई है।
बस्तर ओलिंपिक 2025 : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में खेलों के माध्यम से शांति और समरसता का संदेश
बस्तर संभाग के 7 जिलों से 3 लाख 91 हजार 289 खिलाड़ियों ने कराया पंजीयन
रायपुर, 23 अक्टूबर 2025
छत्तीसगढ़ के अनुसूचित जनजातीय बाहुल्य बस्तर संभाग में युवाओं की ऊर्जा, उत्साह और प्रतिभा को निखारने के उद्देश्य से ‘बस्तर ओलंपिक 2025’ का आयोजन किया जा रहा है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में गृह (पुलिस) विभाग और खेल एवं युवा कल्याण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में होने वाला यह आयोजन प्रदेश के रजत जयंती वर्ष में बस्तर की नई पहचान बनेगा।
बस्तर ओलंपिक 2025 के प्रति लोगों में उत्साह का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि अब तक बस्तर संभाग के 7 जिलों से 3 लाख 91 हजार 289 खिलाड़ियों ने पंजीयन कराया है। इनमें 1 लाख 63 हजार 668 पुरुष और 2 लाख 27 हजार 621 महिला खिलाड़ी शामिल हैं। यह संख्या न केवल बस्तर के युवाओं का खेलों के प्रति बढ़ते उत्साह को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि बस्तर की धरती पर अब खेल एक नई सामाजिक चेतना और समान भागीदारी का प्रतीक बन चुके हैं।
बस्तर की खेल प्रतिभा को राष्ट्रीय मंच पर लाने की पहल
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य बस्तर के युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ना और उनके भीतर निहित नैसर्गिक खेल प्रतिभा को पहचानना है। यह पहल केवल खेल आयोजन नहीं, बल्कि शासन और जनता के बीच विश्वास व संवाद का सेतु बनेगी। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भी अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में कहा था – “बस्तर ओलंपिक केवल एक खेल आयोजन नहीं है, यह ऐसा मंच है जहां विकास और खेल का संगम हो रहा है, जहां हमारे युवा अपनी प्रतिभा को निखार रहे हैं और एक नए भारत का निर्माण कर रहे हैं।"यह मॉडल पूरे देश में ‘खेल के माध्यम से शांति और विश्वास’ की अनूठी पहल के रूप में देखा जा रहा है।
प्रतियोगिता में एथलेटिक्स, तीरंदाजी, फुटबॉल, बैडमिंटन, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल, कराते, वेटलिफ्टिंग और हॉकी जैसे खेल शामिल हैं। इसमें न केवल आधुनिक खेलों को बढ़ावा दिया जाएगा, बल्कि स्थानीय परंपरा से जुड़े खिलाड़ियों को भी मंच मिलेगा।
बस्तर ओलंपिक में जूनियर (14-17 वर्ष) और सीनियर वर्ग के अलावा विशेष श्रेणी के प्रतिभागियों—नक्सल हिंसा से दिव्यांग हुए व्यक्ति और आत्मसमर्पित नक्सलियों—को भी सम्मिलित किया जा रहा है। यह पहल खेल के माध्यम से पुनर्वास, पुनर्जीवन और सामाजिक एकीकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।
प्रतियोगिताएं तीन स्तरों—विकासखण्ड, जिला और संभाग स्तर—पर आयोजित हो रही हैं। विकासखण्ड स्तर पर प्रतियोगिता 25 अक्टूबर से, जिला स्तर पर 5 नवम्बर से और संभाग स्तर पर 24 नवम्बर से आयोजित की जाएगी। विजेताओं को जिला और संभाग स्तर पर नगद पुरस्कार, मेडल, ट्रॉफी और शील्ड प्रदान की जाएगी। नगद राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से खिलाड़ियों के बैंक खाते में जमा की जाएगी। संभागीय स्तर के विजेता खिलाड़ियों को “बस्तर यूथ आइकॉन” के रूप में प्रचारित किया जाएगा। यह ‘स्पोर्ट्स फॉर पीस’ मॉडल बस्तर में नई सामाजिक चेतना का प्रतीक बनेगा।
‘बस्तर ओलंपिक 2025’ के लिए वन भैंसा और पहाड़ी मैना को शुभंकर (Mascot) बनाया गया है, जो बस्तर की जीवंतता और सामुदायिक शक्ति का प्रतीक हैं। यह आयोजन न केवल खेलों का, बल्कि बस्तर की संस्कृति, सौहार्द और विकास के नए युग का उत्सव बनेगा।
अनुसूचित जाति के मेधावी विद्यार्थियों के लिए ‘श्रेष्ठ योजना’ हेतु आवेदन की अंतिम तिथि 30 अक्टूबर
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए देश के श्रेष्ठ निजी आवासीय विद्यालयों में मिलेगा प्रवेश अवसर
जगदलपुर, 23 अक्टूबर 2025
अनुसूचित जाति के मेधावी विद्यार्थियों को देश के सर्वश्रेष्ठ निजी आवासीय विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से भारत सरकार की “श्रेष्ठ योजना” (Scheme for Residential Education for Students in High Schools in Targeted Areas – SHRESHTA) के तहत आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 30 अक्टूबर 2025, शाम 5 बजे निर्धारित की गई है। इस योजना के अंतर्गत प्रतिवर्ष राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा के माध्यम से कक्षा 9 और 11 में प्रवेश के लिए 3 हजार नए विद्यार्थियों का चयन किया जाता है, जो कक्षा 12वीं तक की शिक्षा पूरी करते हैं। स्कूलों का आबंटन योग्यता और विद्यार्थियों की प्राथमिकता के आधार पर आनलाइन काउंसिलिंग के माध्यम से किया जाता है।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा वर्ष 2022-23 से संचालित यह योजना राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों के माध्यम से अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों को कक्षा 9वीं एवं 11वीं में प्रवेश का अवसर प्रदान करती है। इसके लिए राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) द्वारा “राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा (श्रेष्ठ)” (NETS) का आयोजन किया जाता है। आगामी परीक्षा दिसंबर 2025 में संभावित है।
श्रेष्ठ योजना के अंतर्गत प्रत्येक वर्ष सर्वोत्तम निजी आवासीय विद्यालयों का चयन का मापदंड ऐसे विद्यालय हैं जो न्यूनतम पाँच वर्षों से सतत रूप से संचालित हों, पिछले तीन वर्षों में कक्षा 10वीं एवं 12वीं की परीक्षाओं में कम से कम 75 प्रतिशत या उससे अधिक उत्तीर्णता दर प्राप्त कर चुके हों, तथा जिनके पास कक्षा 9वीं और 11वीं में अतिरिक्त रूप से कम से कम 10 अनुसूचित जाति विद्यार्थियों को समायोजित करने हेतु आवश्यक एवं उपयुक्त बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध हों।
इस योजना के अंतर्गत चुने गए विद्यार्थियों को शिक्षण एवं छात्रावास शुल्क का पूरा व्यय भारत सरकार द्वारा वहन किया जाता है। विद्यार्थियों को किसी प्रकार का शुल्क या अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होता। साथ ही शैक्षणिक समायोजन में सहायता हेतु ‘ब्रिज कोर्स’ के लिए वार्षिक शुल्क का 10 प्रतिशत तक का प्रावधान है।
योजना अंतर्गत ऑनलाइन आवेदन एनएटीए की वेबसाइट पर किया जा सकता है। आवेदन सुधार हेतु विंडो 1 से 2 नवंबर 2025 तक खुली रहेगी। विस्तृत दिशा-निर्देश एवं सार्वजनिक सूचना https://cdnbbsr.s3waas-gov.in/s388a839f2f6f1427879fc33ee4acf4f66/uploads/2025/10/202510101384621454.pdf पर उपलब्ध हैं।
राज्य शासन ने सभी जिलों में स्कूलों, वेबसाइटों और सोशल मीडिया के माध्यम से इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने कहा, ताकि पात्र विद्यार्थी समय पर आवेदन कर सकें और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के इस अवसर का लाभ उठा सकें।
प्राकृतिक आपदा पीड़ित 01 परिवार को दी गई 4 लाख रूपए की आर्थिक सहायता राशि
जगदलपुर, 23 अक्टूबर 2025
कलेक्टर श्री हरिस एस. द्वारा राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4 के तहत् प्राकृतिक आपदा पीड़ित 01 परिवार को 4 लाख रूपए की आर्थिक सहायता राशि प्रदान की गई है। कलेक्टर द्वारा तहसील लोहाण्डीगुड़ा ग्राम नेगानार निवासी मैतुराम की मृत्यु पानी में डूबने के कारण पुत्र श्री सुखदेव को चार लाख रूपए की आर्थिक सहायता राशि प्रदान करने की स्वीकृति दी गई है।
जगदलपुर में नियम तोड़ने वाले निजी चिकित्सा संस्थानों पर जिला प्रशासन की सख्त कार्यवाही
क्लीनिक-लैब सील, भारी जुर्माना
बस्तर, 22 अक्टूबर 2025
बस्तर जिला प्रशासन ने निजी चिकित्सा संस्थानों में अनियमितताओं के खिलाफ अपनी मुहिम को और तेज कर दिया है। कलेक्टर श्री हरीश एस. के स्पष्ट निर्देश और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय बसाक के नेतृत्व में नर्सिंग होम एक्ट 2013 और छत्तीसगढ़ चिकित्सा अधिनियम 2010 के तहत गठित विशेष निरीक्षण दल ने जगदलपुर शहर के विभिन्न निजी क्लीनिकों और डायग्नोस्टिक लैबों पर छापेमारी की। इस दौरान कई संस्थानों में गंभीर खामियां पाए जाने के बाद कठोर कार्रवाई की गई।
निरीक्षण दल ने पाया कि कुछ चिकित्सा संस्थान बिना वैध पंजीकरण और निर्धारित मानकों के संचालित हो रहे थे, जो मरीजों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। निरीक्षण के आधार पर कुम्हारपारा में संचालित डॉ. मोहनराव क्लीनिक में अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर क्लीनिक को तत्काल सील कर दिया गया और 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया। इसके साथ ही बालाजी डायग्नोस्टिक लैब द्वारा पूर्व में लगाए गए 20 हजार रुपए के जुर्माने का भुगतान न करने के कारण लैब को सील करने की कार्रवाई की गई। लालबाग में संचालित शिव शक्ति मेडिकल स्टोर के साथ संचालित क्लीनिक में छत्तीसगढ़ चिकित्सा अधिनियम 2013 का पालन न करने पर 20 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय बसाक ने कहा, "यह कार्रवाई जिले के सभी निजी चिकित्सा संस्थानों के लिए एक सख्त संदेश है कि नियमों का पालन अनिवार्य है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य बस्तर की जनता को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना है।" उन्होंने कहा कि इस तरह की औचक निरीक्षण और कार्रवाई आगे भी निरंतर जारी रहेगी। हमारी प्राथमिकता स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। नियम तोड़ने वाले संस्थानों के खिलाफ ऐसी कार्रवाइयां भविष्य में भी बिना किसी रियायत के जारी रहेंगी।"
इस अवसर पर जिला प्रशासन ने बस्तर के नागरिकों से आग्रह किया है कि वे उपचार के लिए केवल पंजीकृत और अधिकृत चिकित्सा संस्थानों का ही चयन करें। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि गैर-पंजीकृत या अनधिकृत संस्थानों में उपचार कराने से स्वास्थ्य जोखिम हो सकता है। नागरिकों से यह भी अनुरोध किया गया है कि वे किसी भी अनियमितता की सूचना प्रशासन को दें।
जगदलपुर में प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई को नागरिकों ने सराहा है। स्थानीय निवासियों का मानना है कि यह कदम निजी चिकित्सा संस्थानों में मानकों का पालन सुनिश्चित करने और मरीजों की सुरक्षा बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित होगा।
जिला प्रशासन ने संकेत दिया है कि इस तरह की निरीक्षण प्रक्रिया को और सघन किया जाएगा। सभी निजी चिकित्सा संस्थानों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने पंजीकरण और अधिनियम के प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करें, अन्यथा भविष्य में और सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव की पहल पर जशपुर और बस्तर जिले में 4 नवीन महाविद्यालयों के लिए 132 पद स्वीकृत
उच्च शिक्षा विभाग को कक्षाएं प्रारंभ करने की अनुमति
बस्तर, 21 अक्टूबर 2025
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग मंत्रालय ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में प्रावधानित 4 नवीन शासकीय महाविद्यालयों की स्थापना को स्वीकृति प्रदान कर दी है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार इन महाविद्यालयों की स्थापना फरसाबहार (जिला-जशपुर), करडेगा (जिला-जशपुर), नगरनार (जिला-बस्तर) तथा किलेपाल (जिला-बस्तर) में की जाएगी।
मुख्यमंत्री की इस पहल से जशपुर एवं बस्तर जैसे जनजाति बहुल एवं भौगोलिक रूप से दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को अब उनके इलाके में ही उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध होंगे। उन्होंने कहा है कि प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराना उनकी सरकार की प्राथमिकता है। दूरस्थ अंचलों की बेटियों और बेटों को अब कॉलेज की पढ़ाई के लिए अब अपने घरों से दूर अन्यत्र नही जाना पड़ेगा। उच्च शिक्षा की पहुंच हर इलाके में हो, इसके लिए राज्य सरकार शिक्षा के ढांचे को सुदृढ़ बना रही है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि शिक्षा ही प्रदेश के सर्वांगीण विकास की आधारशिला है और सरकार युवाओं को अवसर, संसाधन तथा बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
गौरतलब है कि इन चारों महाविद्यालयों के लिए कुल 132 पदों (प्रति महाविद्यालय 33 पद) के सृजन की स्वीकृति के साथ ही कक्षाएं प्रारंभ करने की अनुमति भी राज्य शासन ने दे दी है। स्वीकृत पदों में प्राचार्य, सहायक प्राध्यापक, ग्रंथपाल, क्रीड़ाधिकारी, सहायक ग्रेड-1 एवं प्रयोगशाला कर्मी आदि शामिल हैं। मुख्यमंत्री श्री साय की इस पहल से आदिवासी एवं दूरस्थ क्षेत्रों में उच्च शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय युवाओं की शिक्षा, रोजगार एवं कौशल वृद्धि के अवसर बढ़ेंगे। प्रदेश में समान और संतुलित शैक्षणिक विकास को गति मिलेगी।
तीरथगढ़ में बांस की नाव पर रोमांच
इको टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा: वन मंत्री श्री केदार कश्यप
रायपुर, 21 अक्टूबर 2025

छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध तीरथगढ़ जलप्रपात क्षेत्र में अब पर्यटकों के लिए एक नया आकर्षण जुड़ गया है। यहां बांस से बनी नावों पर राफ्टिंग की शुरुआत की गई है, जो रोमांच और प्राकृतिक सुंदरता का अनोखा संगम पेश करती है।
वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने तीरथगढ़ पहुंचकर इस नई पहल का जायजा लिया और मूंगाबाहर नाले में स्वयं बांस की नाव (बांबू राफ्टिंग) और कायाकिंग का अनुभव किया। उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियाँ इको टूरिज्म को बढ़ावा देंगी और स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर प्रदान करेंगी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ग्रामीण और वन क्षेत्रों में पर्यटन के माध्यम से आजीविका के साधन उपलब्ध कराने प्रतिबद्ध है, जिससे स्थानीय लोगों को अपने ही क्षेत्र में रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसर प्राप्त हों।
इस अवसर पर वन मंत्री श्री कश्यप ने इको विकास समिति के सदस्यों से बातचीत करते हुए कहा कि राज्य सरकार की योजनाओं के तहत बस्तर संभाग में पर्यटन को नए स्वरूप में विकसित किया जा रहा है। तीरथगढ़ जैसे प्राकृतिक स्थलों में इको टूरिज्म की पहल न केवल क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाएगी, बल्कि छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक और सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान देगी।
अब गणपति, देवजी और हिड़मा फोर्स के निशाने पर
जगदलपुर। माओवादी आंदोलन के इतिहास में यह सप्ताह निर्णायक साबित हुआ है। छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में बीते तीन दिनों के भीतर पोलित ब्यूरो सदस्य एवं केंद्रीय क्षेत्रीय ब्यूरो (सीआरबी) सचिव भूपति और केंद्रीय समिति सदस्य तथा दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी) प्रवक्ता रूपेश उर्फ विकल्प समेत 271 माओवादियों के सामूहिक रुप से पुर्नवासित होकर पुर्नजीवन की ओर बढ़ने के कदम ने संगठन की कमर तोड़ दी है।
इस घटना के साथ ही बस्तर में माओवादी हिंसा के विरुद्ध संघर्ष का अंतिम अध्याय प्रारंभ हो गया है। बस्तर, कोंडागांव और दंतेवाड़ा जिले पहले ही माओवादी प्रभाव से मुक्त घोषित हो चुके हैं। नारायणपुर, कांकेर और अबूझमाड़ के जंगलों से भी माओवादी प्रभाव लगभग समाप्त हो गया है। यानी, बस्तर का आधे से अधिक भूभाग अब माओवादी मुक्त हो चुका है।
अब माओवादी प्रभाव केवल दक्षिण बस्तर के बीजापुर और सुकमा जिलों के सीमावर्ती इलाकों तक सिमट गया है। सुरक्षा बलों की रणनीति अब इन्हीं क्षेत्रों में निर्णायक दबाव बनाने पर केंद्रित होगी। फिलहाल पोलित ब्यूरो सदस्य और सेंट्रल मिलिट्री कमीशन प्रमुख देवजी, पूर्व महासचिव गणपति, केंद्रीय समिति सदस्य एवं बटालियन प्रभारी हिड़मा, तेलंगाना स्टेट कमेटी सचिव चंद्रन्ना और डीकेएसजेडसी सदस्य बारसे देवा को संगठन के शेष नेतृत्व के रूप में देखा जा रहा है।
पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन’: दण्डकारण्य के 210 माओवादी कैडर लौटे समाज की मुख्यधारा में
बस्तर, 17 अक्टूबर 2025


राज्य शासन की व्यापक नक्सल उन्मूलन नीति और शांति, संवाद एवं विकास पर केंद्रित सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप बस्तर संभाग में आज नक्सल विरोधी मुहिम को ऐतिहासिक सफलता मिली है। ‘पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन’ कार्यक्रम के अंतर्गत दण्डकारण्य क्षेत्र के 210 माओवादी कैडरों ने हिंसा का मार्ग त्यागकर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है।
यह आत्मसमर्पण विश्वास, सुरक्षा और विकास की दिशा में बस्तर की नई सुबह का संकेत है। लंबे समय से नक्सली गतिविधियों से प्रभावित अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर क्षेत्र में यह ऐतिहासिक घटनाक्रम नक्सल उन्मूलन अभियान के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ के रूप में दर्ज होगा।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा अपनाई गई व्यापक नक्सल उन्मूलन नीति ने क्षेत्र में स्थायी शांति की मजबूत नींव रखी है। पुलिस, सुरक्षा बलों, स्थानीय प्रशासन, सामाजिक संगठनों और सजग नागरिकों के समन्वित प्रयासों से हिंसा की संस्कृति को संवाद और विकास की संस्कृति में परिवर्तित किया जा सका है।

यह पहली बार है जब नक्सल विरोधी अभियान के इतिहास में इतनी बड़ी संख्या में वरिष्ठ माओवादी कैडरों ने एक साथ आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पण करने वालों में एक सेंट्रल कमेटी सदस्य, चार डीकेएसजेडसी सदस्य, 21 डिविजनल कमेटी सदस्य सहित अनेक वरिष्ठ माओवादी नेता शामिल हैं। इन कैडरों ने कुल 153 अत्याधुनिक हथियार—जिनमें AK-47, SLR, INSAS रायफल और LMG शामिल हैं—समर्पित किए हैं। यह केवल हथियारों का समर्पण नहीं, बल्कि हिंसा और भय के युग का प्रतीकात्मक अंत है—एक ऐसी घोषणा, जो बस्तर में शांति और भरोसे के युग की शुरुआत का संकेत देती है।
मुख्यधारा में लौटने वाले प्रमुख माओवादी नेताओं में सीसीएम रूपेश उर्फ सतीश, डीकेएसजेडसी सदस्य भास्कर उर्फ राजमन मांडवी, रनीता, राजू सलाम, धन्नू वेत्ती उर्फ संतू, आरसीएम रतन एलम सहित कई वांछित और इनामी कैडर शामिल हैं। इन सभी ने संविधान पर आस्था व्यक्त करते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था में सम्मानजनक जीवन जीने का संकल्प लिया।

यह ऐतिहासिक आयोजन जगदलपुर पुलिस लाइन परिसर में हुआ, जहाँ आत्मसमर्पित कैडरों का स्वागत पारंपरिक मांझी-चालकी विधि से किया गया। उन्हें संविधान की प्रति और शांति, प्रेम एवं नए जीवन का प्रतीक लाल गुलाब भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) श्री अरुण देव गौतम ने कहा कि “पूना मारगेम केवल नक्सलवाद से दूरी बनाने का प्रयास नहीं, बल्कि जीवन को नई दिशा देने का अवसर है। जो आज लौटे हैं, वे बस्तर में शांति, विकास और विश्वास के दूत बनेंगे।” उन्होंने आत्मसमर्पित कैडरों से समाज निर्माण में अपनी ऊर्जा लगाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर एडीजी (नक्सल ऑपरेशन्स) श्री विवेकानंद सिन्हा, सीआरपीएफ बस्तर रेंज प्रभारी, कमिश्नर श्री डोमन सिंह, बस्तर रेंज आईजी श्री सुंदरराज पी., कलेक्टर श्री हरिस एस., बस्तर संभाग के सभी पुलिस अधीक्षक, वरिष्ठ अधिकारी और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
कार्यक्रम के दौरान पुलिस विभाग द्वारा आत्मसमर्पित माओवादियों को पुनर्वास सहायता राशि, आवास और आजीविका योजनाओं की जानकारी दी गई। राज्य शासन इन युवाओं को स्वरोजगार, कौशल विकास और शिक्षा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि वे आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जी सकें।
मांझी-चालकी प्रतिनिधियों ने कहा कि बस्तर की परंपरा सदैव प्रेम, सहअस्तित्व और शांति का संदेश देती रही है। जो साथी अब लौटे हैं, वे इस परंपरा को नई शक्ति देंगे और समाज में विश्वास की नींव को और मजबूत करेंगे।
कार्यक्रम के अंत में सभी आत्मसमर्पित कैडरों ने संविधान की शपथ लेकर लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त की। उन्होंने प्रतिज्ञा ली कि वे अब हिंसा के बजाय विकास और राष्ट्रनिर्माण की दिशा में योगदान देंगे।
‘वंदे मातरम्’ की गूंज के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। यह क्षण केवल 210 माओवादी कैडरों के आत्मसमर्पण का नहीं, बल्कि बस्तर में विश्वास, विकास और शांति के नए युग की शुरुआत का प्रतीक बन गया।
बस्तर पुलिस ने दिवाली से पहले पकड़ी 100 पेटी गोवा व्हिस्की, तस्कर फरार
बस्तर । दिवाली से पहले छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में पुलिस ने शराब तस्करों पर बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने मध्य प्रदेश से आ रही गोवा व्हिस्की की तस्करी करते हुए एक वाहन को पकड़ा, जिसमें भारी मात्रा में शराब थी। हालांकि, वाहन चालक पुलिस को देखकर फरार होने में कामयाब रहा। मिली जानकारी के अनुसार यह मामला बड़ांजी थाना क्षेत्र का है। पुलिस को सूचना मिली थी कि एक वाहन (नंबर CG 17 LA 9565) में भारी मात्रा में शराब की तस्करी की जा रही है। सूचना के आधार पर पुलिस ने ग्राम टकरागुड़ा-बेलर मार्ग पर रेड की कार्रवाई की।
घटना के दौरान वाहन चालक ने अंधेरे का फायदा उठाकर गाड़ी वहीं छोड़ दी और फरार हो गया। पुलिस ने गाड़ी की तलाशी ली, जिसमें गोवा व्हिस्की की 100 पेटी बरामद हुई। बरामद शराब की कीमत लगभग 6 लाख 40 हजार रुपए आंकी गई है। पुलिस ने गाड़ी को जब्त कर थाने लेकर आई। बड़ांजी थाना के पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपी युवक की तलाश जारी है और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और तस्करी में शामिल अन्य लोगों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
स्थानीय लोगों ने इस कार्रवाई को सराहा है और पुलिस से कहा कि ऐसे प्रयास तस्करी और अवैध शराब की बिक्री पर नियंत्रण रखने में मदद करेंगे। पुलिस अधिकारियों ने भी जनता से अपील की है कि अवैध शराब की जानकारी मिलने पर तुरंत सूचना दें, ताकि कार्रवाई समय पर की जा सके। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई दिवाली के त्योहार के मद्देनजर की गई थी, ताकि अवैध शराब की बिक्री और तस्करी से संबंधित अपराधों को रोका जा सके। उन्होंने बताया कि जिले में शराब तस्करी की घटनाओं पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और ऐसे मामलों में पुलिस कड़ी कार्रवाई करती रहेगी।
बड़ांजी थाना क्षेत्र में यह कार्रवाई अवैध शराब की तस्करी रोकने के लिए एक अहम कदम मानी जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि शराब तस्करों पर सख्त निगरानी रखी जा रही है और आने वाले दिनों में ऐसे अन्य प्रयास भी किए जाएंगे। पुलिस ने यह भी कहा कि वाहन के साथ पकड़ी गई शराब की सही गिनती और मात्रा की पुष्टि के लिए आगे जांच जारी है। इसके अलावा, यह भी पता लगाया जा रहा है कि शराब कहां से लाई जा रही थी और इसके वितरण में कौन-कौन लोग शामिल थे।
इस घटना से जिले में अवैध शराब तस्करी पर नियंत्रण के प्रयासों को और मजबूत माना जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल एक उदाहरण है और आगे भी ऐसी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। बस्तर पुलिस ने यह स्पष्ट किया है कि शराब तस्करी और बिक्री के मामलों में कोई भी अपराधी बख्शा नहीं जाएगा। फरार आरोपी युवक की जल्द गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। इस पूरे मामले ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस की तत्परता को दिखाया है। पुलिस का मानना है कि त्योहार के मौसम में समय पर कार्रवाई करने से अवैध शराब की तस्करी और बिक्री पर नियंत्रण रखना आसान होगा और जनता को सुरक्षित वातावरण मिलेगा।
उत्तर बस्तर और अबूझमाड़ हुए नक्सलमुक्त — बस्तर में शांति और विकास का नया युग : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय
हिंसा की राह देती है अंतहीन दर्द, आत्मसमर्पण देता है जीवन को नई दिशा- मुख्यमंत्री श्री साय
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में नक्सल उन्मूलन अभियान ऐतिहासिक सफलता की ओर
बस्तर, 16 अक्टूबर 2025
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि उत्तर बस्तर और अबूझमाड़ का नक्सलमुक्त होना यह प्रमाण है कि अब बस्तर भय नहीं, बल्कि विश्वास और विकास की नई पहचान बन चुका है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में भारत आज नक्सलवाद के अंत की दहलीज़ पर खड़ा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बीते दो दिनों में 258 नक्सलियों का आत्मसमर्पण इस बात का प्रतीक है कि बंदूक नहीं, बल्कि विश्वास की शक्ति जीत रही है। उन्होंने कहा कि बीते 22 महीनों में छत्तीसगढ़ में 477 नक्सली मारे गए, 2110 ने आत्मसमर्पण किया और 1785 गिरफ्तार हुए — यह आँकड़े हमारे राज्य को नक्सलमुक्त बनाने के अडिग संकल्प के साक्षी हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ को पूरी तरह नक्सलमुक्त बनाने का लक्ष्य अब बहुत निकट है। यह परिवर्तन राज्य सरकार की “नक्सलवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025” तथा “नियद नेल्ला नार योजना” की सफलता का प्रत्यक्ष परिणाम है। डबल इंजन सरकार की संवेदनशील नीतियों, बस्तर में लगातार स्थापित हो रहे सुरक्षा शिविरों और वनांचलों में शासन के प्रति बढ़ते विश्वास ने इस सकारात्मक परिवर्तन को संभव बनाया है। उन्होंने कहा कि अब तक नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 64 नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे न केवल सुरक्षा सुदृढ़ हुई है, बल्कि विकास और विश्वास की किरण भी हर गांव तक पहुँची है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने हमारे वीर सुरक्षाबलों के अदम्य साहस और बलिदान को नमन करते हुए कहा कि उनके समर्पण से ही आज बस्तर भयमुक्त हुआ है और शांति की राह पर अग्रसर है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर नक्सल आतंक से पूर्णतः मुक्त हो चुके हैं, जबकि दक्षिण बस्तर में यह लड़ाई अपने निर्णायक चरण में है। “नियद नेल्ला नार” जैसी योजनाओं ने बस्तर में संवाद, विकास और संवेदना की नई धरती तैयार की है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार की नीति दो टूक है — हिंसा का कोई स्थान नहीं। जो नक्सली शांति और विकास का मार्ग चुनना चाहते हैं, उनका स्वागत है। लेकिन जो बंदूक उठाकर समाज में आतंक फैलाने की कोशिश करेंगे, उन्हें सुरक्षा बलों की सख़्त कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने सभी नक्सलियों से अपील की — “हिंसा की राह अंतहीन पीड़ा देती है, जबकि आत्मसमर्पण जीवन को एक नई दिशा देते हुए एक नई शुरुआत का रास्ता खोलता है। अपनी मातृभूमि के भविष्य और अपने परिवारों के उज्जवल कल के लिए हथियार त्यागें और विकास की रोशनी में कदम रखें।”
उल्लेखनीय है कि देश में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही निर्णायक लड़ाई ने एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट कर जानकारी कि छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर जैसे क्षेत्र, जो कभी नक्सल आतंक के गढ़ हुआ करते थे, अब पूरी तरह नक्सलमुक्त घोषित किए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि यह न केवल भारत की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी सफलता है, बल्कि विकास, विश्वास और संवेदना की नई कहानी भी है। बीते दो दिनों में देश में कुल 258 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण किया है।
केंद्रीय गृह मंत्री श्री शाह ने कहा कि यह परिवर्तन इस बात का प्रमाण है कि बंदूक नहीं, बल्कि संविधान पर विश्वास की शक्ति जीत रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के निरंतर प्रयासों से नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में है।
केंद्रीय गृह मंत्री श्री शाह ने आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों की सराहना करते हुए कहा कि यह कदम उनके बेहतर भविष्य और देश की एकता के प्रति समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने सभी नक्सलियों से अपील की कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटें और देश की प्रगति में सहभागी बनें।
बीजापुर की संस्कृति और स्वाद ने मोह लिया मन
बस्तर राइजिंग’ टीम ढोल-नृत्य संग हुई मंत्रमुग्ध
बस्तर, 15 अक्टूबर 2025


‘बस्तर राइजिंग’ अभियान के तहत बीजापुर पहुँचे प्रतिनिधिमंडल का पारंपरिक नृत्य, स्थानीय व्यंजन और लोक संस्कृति के साथ गर्मजोशी से स्वागत किया गया। मुख्य कार्यक्रम ऐतिहासिक लोहा डोंगरी में हुआ, जहाँ विभिन्न विभागों द्वारा बीजापुर की कला, संस्कृति और जीवनशैली को दर्शाते हुए सुंदर स्टॉल लगाए गए। ‘बस्तर राइजिंग’ के माध्यम से बीजापुर की संस्कृति, पारंपरिक खान-पान और जनजीवन को जो पहचान मिल रही है, वह न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि आदिवासी समाज की गौरवशाली परंपरा को नई ऊँचाई भी प्रदान करेगी।
कार्यक्रम में बीजापुर की आदिवासी रसोई के पारंपरिक स्वाद की झलक देखने को मिली। इस अवसर पर पारंपरिक व्यंजनों ने सभी का मन जीता लिया। महुआ की चाय, चापड़ा चटनी, तिखुर का हलवा, मड़िया पेज और लांदा जैसे स्थानीय व्यंजनों का स्वाद चखकर प्रतिनिधिमंडल बीजापुर की सांस्कृतिक मिठास में डूब गया। प्रतिनिधियों ने इन व्यंजनों की परंपरागत विधियों और उनके सांस्कृतिक महत्व के बारे में जानकारी भी ली।
ढोल-मांदर की थाप पर थिरके प्रतिनिधि
कार्यक्रम का सबसे आकर्षक हिस्सा रहा गौर नृत्य। जब ढोल और मांदर की थाप बजी, तो पूरा माहौल उत्सवमय हो उठा। प्रतिनिधिमंडल के सदस्य भी कलाकारों के साथ नृत्य में शामिल होकर बीजापुर की जीवंत संस्कृति का आनंद लेते दिखे। इस आयोजन में स्व-सहायता समूहों की महिलाएँ, गारमेंट फैक्ट्री की महिला कर्मचारी, स्पोर्ट्स अकादमी के खिलाड़ी, बीजादूत स्वयंसेवक और अन्य स्थानीय लोग शामिल हुए। यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक मिलन का अवसर बना, बल्कि बीजापुर की सामाजिक और आर्थिक संभावनाओं को सामने लाने वाला सशक्त मंच भी साबित हुआ।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व श्री प्रतूल जैन, फ्रेनो डिसूजा और पलक चौधरी ने किया। उन्होंने कहा कि बस्तर की संस्कृति, खान-पान और प्राकृतिक सुंदरता अद्वितीय है। ‘बस्तर राइजिंग’ अभियान का उद्देश्य इस समृद्ध परंपरा को देश और दुनिया तक पहुँचाना है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में यह प्रयास वास्तव में सराहनीय है। इस अवसर पर सीईओ जिला पंचायत श्रीमती नम्रता चौबे, संयुक्त कलेक्टर श्री जागेश्वर कौशल, डिप्टी कलेक्टर श्री नारायण प्रसाद गवेल, जिला शिक्षा अधिकारी उपस्थित रहे। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को बीजापुर की विकास यात्रा और सांस्कृतिक पहचान से अवगत कराया।
सिंचाई विभाग के निरीक्षण गृह और कार्यालय भवनों निर्माण हेतु 8 करोड़ रूपए से अधिक राशि स्वीकृत
रायपुर, 15 अक्टूबर 2025
छत्तीसगढ़ शासन, जल संसाधन विभाग द्वारा बस्तर जिले के विकासख्ण्ड-जगदलपुर में जल संसाधन उप संभाग के कार्यालय भवनों और निरीक्षण गृह निर्माण कार्य के लिए 8 करोड़ 9 लाख 89 हजार रुपये स्वीकृत किये गये हैं। इसमें निरीक्षण गृह के लिए 3 करोड़ 85 लाख 46 हजार रुपये तथा उप संभाग के कार्यालय भवनों के निर्माण कार्य के लिए 4 करोड़ 24 लाख 43 हजार रुपये स्वीकृत किये गये हैं। निर्माण कार्यों को कराने के लिए जल संसाधन मंत्रालय महानदी भवन से मुख्य अभियंता जल संसाधन विभाग जगदलपुर को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है।
बस्तर के आसना में खुलेगा राज्य का पहला वन विज्ञान केन्द्र
संचालन के लिए सलाहकार समिति बनी
15 अक्टूबर 2025
छत्तीसगढ़ में बस्तर वन मंडल के आसना में राज्य के पहले वन विज्ञान केन्द्र की स्थापना की जायेगी। राष्ट्रीय कैम्पा मिशन भारत सरकार द्वारा इसकी स्वीकृति दे दी गई है। राष्ट्रीय कैम्पा की 23वीं क्रियान्वयन समिति की बैठक में पायलट बेसेस पर झारखंड, छत्तीसगढ़, उड़िसा, महाराष्ट्र, उत्तराखंड और मध्यप्रदेश में एक-एक वन विज्ञान केन्द्र शुरू करने का निर्णय लिया गया है। छत्तीसगढ़ में बस्तर के आसना में वन विज्ञान केन्द्र शुरू होगा। इसके संचालन, प्रशिक्षण और पाठ्यक्रमों के निर्धारण के लिए मुख्य वन संरक्षक जगदलपुर वृत्त की अध्यक्षता में प्रदेश स्तरीय सलाहकार समिति का गठन किया गया है। इस समिति में 8 विषय विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है।
वन विज्ञान केन्द्र की सलाहकार समिति में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति डॉ. गिरिश चंदेल सहित जशपुर के श्री राजेश गुप्ता, शहीद महेन्द्र कर्मा विश्वविद्यालय बस्तर के सह-प्राध्यापक डॉ. संजीवन कुमार, रायपुर के श्री गिरीश कुबेर, श्री राजीव शर्मा, डॉ. एम.एल. नायक, श्री सुबोध मनोहर पांडे और पूणे महाराष्ट्र के डॉ. राहुल मुंगीकर को शामिल किया गया हैै। सरगुजा वृत्त के मुख्य वनसंरक्षक भी समिति के सदस्य होंगे। बस्तर के वन मंडलाधिकारी को समिति का सदस्य सचिव मनोनित किया गया है। समिति में नामांकित विषय विशेषज्ञों को वन विज्ञान केन्द्र के संचालन, प्रशिक्षण और पाठ्यक्रम निर्धारण में सहयोग के लिए किसी प्रकार का मानदेय या वेतन नहीं दिया जायेगा।