कवर्धा। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का उद्देश्य गरीब और बेघर परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराना है, लेकिन कबीरधाम जिले के जनपद पंचायत सहसपुर लोहारा अंतर्गत ग्राम पंचायत भेंडरा के आश्रित ग्राम बोटेसुर से सामने आए आरोप इस योजना की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कई हितग्राहियों के नाम पर आवास निर्माण की राशि का आहरण कर लिया गया, जबकि वास्तविकता में उनके मकान आज तक नहीं बन पाए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार मिलापा पति तीजउ एवं दशरु पिता शेखू सहित अन्य हितग्राहियों के नाम पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत राशि जारी की गई, लेकिन उनके आवास का निर्माण नहीं हुआ। सबसे गंभीर आरोप यह है कि निर्माण कार्य की प्रगति दर्शाने के लिए कुछ हितग्राहियों की तस्वीरें उनके स्वयं के निर्माणाधीन स्थल के बजाय अन्य लोगों के बने हुए मकानों के सामने खींचकर अपलोड की गईं, ताकि रिकॉर्ड में निर्माण कार्य पूर्ण अथवा प्रगतिरत दिखाया जा सके।
यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला केवल लापरवाही का नहीं बल्कि सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर, फर्जी प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने और सरकारी धन के दुरुपयोग का बन सकता है। प्रश्न यह भी उठ रहा है कि जब प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रत्येक किश्त जियो टैगिंग, फोटो सत्यापन और भौतिक निरीक्षण के बाद जारी की जाती है, तब बिना निर्माण कार्य के राशि आहरित होने की स्थिति कैसे निर्मित हुई।
स्थानीय स्तर पर योजना के संचालन और निगरानी में आवास मित्र, ग्राम रोजगार सहायक, पंचायत सचिव तथा संबंधित अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में ग्रामीणों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच किए बिना वास्तविक जिम्मेदारों तक पहुंचना संभव नहीं होगा। ग्रामीणों ने आशंका व्यक्त की है कि यदि गहन जांच कराई जाए तो इसी प्रकार के कई अन्य मामले भी सामने आ सकते हैं।
यह मामला इसलिए भी अधिक संवेदनशील हो जाता है क्योंकि यह क्षेत्र प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत मंत्री तथा क्षेत्रीय विधायक विजय शर्मा और जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरीय साहू का निर्वाचन क्षेत्र है। सार्वजनिक मंचों से कई बार यह कहा गया है कि पंचायत और ग्रामीण विकास योजनाओं में किसी प्रकार की गड़बड़ी पाए जाने पर जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होंगे। ऐसे में उनके ही निर्वाचन क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन पर उठ रहे सवाल प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं।
ग्रामीणों ने मांग की है कि ग्राम पंचायत भेंडरा एवं उसके आश्रित गांवों में प्रधानमंत्री आवास योजना के सभी स्वीकृत प्रकरणों की स्वतंत्र समिति गठित कर भौतिक जांच कराई जाए। साथ ही जियो टैग फोटो, भुगतान विवरण, निर्माण की वास्तविक स्थिति और लाभार्थियों के बयान के आधार पर सत्यापन किया जाए। उनका कहना है कि जांच के दौरान यदि किसी भी अधिकारी, कर्मचारी या जनप्रतिनिधि की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
गरीबों को पक्का घर उपलब्ध कराने वाली योजना में यदि वास्तव में अनियमितता हुई है तो यह केवल वित्तीय गड़बड़ी नहीं बल्कि उन जरूरतमंद परिवारों के अधिकारों का हनन भी है, जो वर्षों से अपने सपनों के घर की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को बेनकाब करता है या फिर मामला कागजों तक ही सीमित रह जाता है।