छत्तीसगढ़ / बेमेतरा

जल संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को मिलेगी नई मजबूती : जिला पंचायत सीईओ ने किया डबरी निर्माण कार्यों का निरीक्षण

मनरेगा एवं वीबी जी राम जी के तहत निर्मित डबरियों में वर्षा जल का हुआ भराव, हितग्राहियों को मछलीपालन एवं आयवर्धन गतिविधियों के लिए किया प्रेरित

बेमेतरा 05 जुलाई 2026

जिले में जल संरक्षण को बढ़ावा देने तथा ग्रामीणों की आजीविका को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) एवं वीबी जी राम जी अभियान के अंतर्गत निर्मित निजी एवं आजीविका डबरियों का शनिवार को मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत सीईओ श्रीमती प्रेमलता पद्माकर ने ग्राम पंचायत सरदा एवं भटगांव में निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान उनके साथ मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत बेरला सुश्री दिव्या ठाकुर, एपीओ श्री नवीन साहू एवं कार्यक्रम अधिकारी श्री अरविंद कश्यप उपस्थित रहे।

सीईओ श्रीमती पद्माकर ने डबरी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, निर्धारित मापदंड, आकार एवं प्रगति का निरीक्षण करते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी जल संरक्षण संबंधी कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप समय-सीमा में पूर्ण किए जाएं। उन्होंने कहा कि डबरियां केवल वर्षा जल संरक्षण का माध्यम नहीं हैं, बल्कि किसानों के लिए सिंचाई, पशुपालन, मछलीपालन और अन्य आजीविका गतिविधियों का भी मजबूत आधार बन रही हैं।

निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि हाल ही में हुई अच्छी वर्षा के कारण निर्मित डबरियों में पर्याप्त मात्रा में पानी का संचयन हो चुका है। इससे किसानों को आगामी कृषि कार्यों में सिंचाई की सुविधा मिलेगी, साथ ही भू-जल स्तर में सुधार और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

सीईओ ने हितग्राहियों से संवाद कर उन्हें डबरियों का उपयोग मछलीपालन, सब्जी उत्पादन तथा अन्य आयवर्धक गतिविधियों के लिए करने हेतु प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि मनरेगा के तहत निर्मित परिसंपत्तियों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित कर ग्रामीण परिवार अपनी आय में वृद्धि कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी निर्मित जल संरचनाओं का नियमित रखरखाव सुनिश्चित किया जाए तथा डबरियों के आसपास व्यापक वृक्षारोपण कराया जाए। साथ ही प्रत्येक घर में सोक पीट निर्माण को प्राथमिकता देने और ग्रामीणों को इसके महत्व के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि सोक पीट के माध्यम से वर्षा जल का बेहतर संचयन होगा, जिससे भू-जल पुनर्भरण बढ़ेगा और भविष्य में जल संकट की स्थिति को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

जिला पंचायत द्वारा जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन तथा ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाने के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं की सतत निगरानी की जा रही है, ताकि शासन की योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक ग्रामीण परिवारों तक प्रभावी रूप से पहुंच सके। 

Leave Your Comment

Click to reload image