पेंड्रीकला में आरसीसी सड़क निर्माण पर उठे गंभीर सवाल, क्या प्राक्कलन को ताक पर रखकर हुआ निर्माण?
कबीरधाम |
2026-07-07 16:00:02
ग्रामीणों ने उच्चस्तरीय तकनीकी जांच और लैब टेस्ट की उठाई मांग, सरकारी राशि के दुरुपयोग की आशंका
पंडरिया/कवर्धा--जनपद पंचायत पंडरिया जिला कबीरधाम क्षेत्र की ग्राम पंचायत पेंड्राकला में निर्मित आरसीसी सड़क निर्माण कार्य अब विवादों के घेरे में आ गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सड़क का निर्माण स्वीकृत प्राक्कलन (एस्टीमेट) और निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं किया गया। निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाते हुए ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच तथा निर्माण सामग्री की अधिकृत सरकारी प्रयोगशाला में जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि लाखों रुपये की लागत से बनी इस सड़क में शुरुआत से ही गुणवत्ता को लेकर संदेह बना हुआ है। उनका आरोप है कि निर्माण के दौरान न तो निर्धारित मापदंडों का पालन किया गया और न ही गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त निगरानी की गई। इससे आशंका जताई जा रही है कि सरकारी धन का सही उपयोग नहीं हुआ।
ग्रामीणों के अनुसार, तकनीकी जानकारी रखने वाले कुछ विशेषज्ञों ने प्राथमिक निरीक्षण के दौरान बताया कि सड़क की मोटाई, चौड़ाई तथा अन्य तकनीकी मानक स्वीकृत प्राक्कलन के अनुरूप नहीं दिखाई देते। यदि जांच में यह तथ्य सही पाए जाते हैं, तो यह निर्माण कार्य की गुणवत्ता और विभागीय निगरानी दोनों पर गंभीर प्रश्न खड़े करेगा।
ग्रामीणों ने मांग की है कि सड़क से कोर कटिंग (Core Cutting) के माध्यम से नमूने लेकर अधिकृत सरकारी लैब में परीक्षण कराया जाए। साथ ही सड़क की मोटाई, चौड़ाई, सीमेंट-कंक्रीट की गुणवत्ता तथा अन्य सभी तकनीकी मापदंडों की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों का उद्देश्य जनता को टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराना है, लेकिन यदि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से समझौता किया जाता है तो इससे सरकारी राशि का दुरुपयोग होने के साथ-साथ जनता का विश्वास भी कमजोर होता है।
ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर, संबंधित विभाग के कार्यपालन अभियंता तथा जनपद पंचायत के अधिकारियों से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो संबंधि सरपंच , निर्माण एजेंसी तथा जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या संबंधित विभाग ग्रामीणों की शिकायत को गंभीरता से लेकर निष्पक्ष जांच कराएगा, या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा? इसका जवाब आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्रवाई से स्पष्ट होगा।