छत्तीसगढ़ / रायपुर

भारतमाला मुआवजा घोटाले में ईडी का बड़ा एक्शन: 12 करोड़ की 62 संपत्तियां कुर्क

 रायपुर । भारतमाला परियोजना के बहुचर्चित भूमि अधिग्रहण मुआवजा घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 12.78 करोड़ रुपये मूल्य की 62 चल एवं अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। इस कार्रवाई में पहली बार अचल संपत्तियों के साथ-साथ करीब 4.69 करोड़ रुपये के शेयर और म्यूचुअल फंड निवेश भी ईडी के शिकंजे में आए हैं। एजेंसी का दावा है कि ये संपत्तियां कथित अपराध से अर्जित धन से खरीदी गईं या उसी के बराबर मूल्य की हैं।

रायपुर स्थित ईडी के क्षेत्रीय कार्यालय ने 31 जुलाई 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया। साथ ही जय प्रकाश गांधी समेत 14 अन्य आरोपियों के खिलाफ विशेष पीएमएलए अदालत में सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट भी दाखिल की गई है। ईडी के अनुसार, भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में सुनियोजित तरीके से हेरफेर कर करोड़ों रुपये का अवैध मुआवजा प्राप्त किया गया और बाद में इस राशि को वैध दिखाने के लिए विभिन्न कंपनियों, अचल संपत्तियों, शेयरों और म्यूचुअल फंड में निवेश किया गया।

ईओडब्ल्यू-एसीबी की एफआईआर के बाद शुरू हुई जांच
मामले की शुरुआत आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा 23 अप्रैल 2025 को दर्ज एफआईआर से हुई थी। एफआईआर में अभनपुर के तत्कालीन एसडीओ (राजस्व) एवं सक्षम भूमि अधिग्रहण अधिकारी (CALA) निर्भय साहू सहित कई लोगों को आरोपी बनाया गया था। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज मामले में आरोप पत्र दाखिल होने के बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की।

अधिसूचना के बाद खरीदी जमीन, फिर किया गया कथित खेल
ईडी की जांच में सामने आया कि भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी होने के बाद जमीन खरीदी गई। इसके बाद उसे छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित कर परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों के नाम बिक्री व दान विलेख के जरिए हस्तांतरित किया गया। एजेंसी का आरोप है कि इस प्रक्रिया से पात्रता बढ़ाकर कई गुना अधिक मुआवजा हासिल किया गया। जांच में भूमि मालिकों, दलालों, निजी व्यक्तियों और कुछ राजस्व अधिकारियों की कथित मिलीभगत की बात भी सामने आई है।

56 लाख की पात्रता, मिला 9.83 करोड़ का मुआवजा
ईडी के मुताबिक, जय प्रकाश गांधी और उनके परिवार को वास्तविक पात्रता के आधार पर लगभग 56.76 लाख रुपये का मुआवजा मिलना था, लेकिन कथित हेरफेर के जरिए करीब 9.83 करोड़ रुपये प्राप्त किए गए। एजेंसी का दावा है कि इससे 9.27 करोड़ रुपये की अवैध आय अर्जित हुई। जांच में यह भी सामने आया कि इस राशि को कई बैंक खातों के माध्यम से घुमाकर अचल संपत्तियों, शेयरों, म्यूचुअल फंड और अन्य निवेश माध्यमों में लगाया गया। परिवार से जुड़ी फर्मों और रिश्तेदारों के नामों का भी उपयोग किए जाने का आरोप है।

जांच के दौरान गांव उगेतारा से जुड़ा एक अन्य मामला भी सामने आया। ईडी के अनुसार, उमा तिवारी ने स्वयं को मृतक भूमि स्वामी की गोद ली हुई बेटी बताकर कथित फर्जी राजस्व अभिलेखों के आधार पर करीब 2.13 करोड़ रुपये का मुआवजा प्राप्त किया। एजेंसी अब दस्तावेजों की वैधता और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

पहले भी हो चुकी है बड़ी कार्रवाई
इस मामले में ईडी पहले भी कई बड़ी कार्रवाई कर चुकी है। 3 जून 2026 को जय प्रकाश गांधी को गिरफ्तार किया गया था। दिसंबर 2025 और अप्रैल 2026 में हुई छापेमारी के दौरान 49 लाख रुपये नकद, लगभग 89.80 लाख रुपये मूल्य की 37,133 ग्राम चांदी जब्त की गई थी। इसके अलावा 23.35 करोड़ रुपये की संपत्तियां पहले ही कुर्क की जा चुकी थीं।

ताजा कार्रवाई के बाद भारतमाला मुआवजा घोटाले में ईडी द्वारा अब तक करीब 36.14 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति
यां कुर्क की जा चुकी हैं। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि और दोष तय होना न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों एवं सुनवाई के बाद ही होगा।

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