छत्तीसगढ़ / जशपुर

जिला चिकित्सालय जशपुर में 55 वर्षीय मरीज की जटिल आपातकालीन शल्यक्रिया सफल

 जशपुरनगर । जिला चिकित्सालय जशपुर में चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों की टीम ने अत्यंत गंभीर अवस्था में भर्ती 55 वर्षीय मरीज की जटिल एवं चुनौतीपूर्ण आपातकालीन शल्यक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न की है। मरीज आंत्र छिद्र (आंत में छेद), गंभीर संक्रमण (पेरिटोनाइटिस) और सेप्टिक शॉक की स्थिति से जूझ रहा था। 

अत्यंत गंभीर परिस्थितियों के बावजूद विशेषज्ञ चिकित्सकों के त्वरित निर्णय, बेहतर आपसी समन्वय, गहन चिकित्सा एवं निरंतर निगरानी से मरीज का सफल उपचार किया गया। स्वास्थ्य में पर्याप्त सुधार के बाद मरीज को आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श एवं अनुवर्ती जांच की सलाह के साथ अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। मरीज को 25 जुलाई 2026 की रात लगभग 9 बजे जिला चिकित्सालय के आकस्मिक चिकित्सा विभाग में मल एवं गैस का निष्कासन नहीं होने, तेज पेट दर्द, पेट फूलने और उल्टी की गंभीर शिकायतों के साथ लाया गया था। चिकित्सकीय परीक्षण एवं आवश्यक जांचों के बाद आंत्र में छिद्र होने के कारण पेट के अंदर गंभीर संक्रमण की पुष्टि हुई। संक्रमण की गंभीरता के चलते मरीज का रक्तचाप काफी कम हो चुका था तथा किडनी सहित शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों के प्रभावित होने का खतरा उत्पन्न हो गया था।

गंभीर स्थिति में तत्काल शल्यक्रिया का लिया गया निर्णय :

 

मरीज की गंभीर अवस्था को देखते हुए चिकित्सकों ने तत्काल विशेषज्ञ परामर्श एवं आवश्यक उपचार प्रारंभ किया। चिकित्सकीय परीक्षण के बाद आपातकालीन शल्यक्रिया को आवश्यक उपचार विकल्प माना गया। मरीज एवं परिजनों को बीमारी की गंभीरता, शल्यक्रिया तथा बेहोशी से संबंधित संभावित जोखिमों और उपचार के दौरान उत्पन्न होने वाली जटिलताओं की जानकारी दी गई। परिजनों की सहमति के बाद जिला चिकित्सालय जशपुर में ही तत्काल शल्यक्रिया करने का निर्णय लिया गया। शल्यक्रिया के दौरान मरीज की स्थिति अत्यंत चुनौतीपूर्ण रही। ऑपरेशन के दौरान उसका रक्तचाप कई बार काफी कम हुआ। ऐसी स्थिति में विशेषज्ञ बेहोशी प्रबंधन के साथ रक्तचाप नियंत्रित रखने के लिए आवश्यक दवाओं का उपयोग किया गया। चिकित्सकीय टीम ने लगातार मरीज की स्थिति की निगरानी करते हुए आवश्यक उपचारात्मक कदम उठाए और जटिल आपातकालीन शल्यक्रिया सफलतापूर्वक पूर्ण की।

इस चुनौतीपूर्ण शल्यक्रिया में डॉ. गौरव हरदहा एवं डॉ. भूपेश भगत (सर्जरी), डॉ. आकाश कुजूर (एनेस्थीसिया), डॉ. एस.एल. सिद्धार्थ एवं डॉ. दीपांशु भोय (मेडिसिन) का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सर्जरी, एनेस्थीसिया एवं मेडिसिन विशेषज्ञों ने आपसी समन्वय के साथ मरीज की गंभीर स्थिति का प्रबंधन किया। शल्यक्रिया के बाद मरीज को गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में भर्ती कर निरंतर चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया। गंभीर संक्रमण एवं लंबे समय तक निम्न रक्तचाप के कारण कुछ समय तक रक्तचाप बनाए रखने वाली दवाओं की आवश्यकता पड़ी। चिकित्सकों, एनेस्थीसिया टीम, नर्सिंग स्टाफ एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा निर्धारित उपचार और देखभाल लगातार सुनिश्चित की गई। उपचार के दौरान मरीज के रक्तचाप में धीरे-धीरे सुधार हुआ और रक्तचाप बनाए रखने वाली दवाओं को क्रमशः बंद किया गया। संक्रमण एवं अन्य संबंधित जटिलताओं का भी सफलतापूर्वक उपचार किया गया। निरंतर उपचार एवं समन्वित प्रयासों के परिणामस्वरूप मरीज की सामान्य स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ।

स्वस्थ होकर घर लौटा मरीज, जिला स्तर पर गंभीर उपचार की क्षमता को मिली मजबूती :

वर्तमान में मरीज की स्थिति संतोषजनक है और उसे रक्तचाप बढ़ाने वाली किसी दवा की आवश्यकता नहीं है। स्वास्थ्य में पर्याप्त सुधार होने के बाद मरीज को आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श, दवा एवं अनुवर्ती जांच की सलाह के साथ जिला चिकित्सालय जशपुर से छुट्टी दे दी गई।जिला चिकित्सालय जशपुर में अत्यंत गंभीर एवं उच्च जोखिम वाले मरीज की सफल आपातकालीन शल्यक्रिया यह दर्शाती है कि समय पर बीमारी की पहचान, त्वरित चिकित्सकीय निर्णय, विशेषज्ञ सर्जरी एवं एनेस्थीसिया सेवाएं, मेडिसिन विशेषज्ञों का समन्वय, आईसीयू में सतत निगरानी तथा समर्पित नर्सिंग एवं स्वास्थ्य कर्मियों की टीम के संयुक्त प्रयासों से गंभीर मरीजों का उपचार जिला स्तर पर भी प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। यह उपलब्धि जिला चिकित्सालय जशपुर में उपलब्ध विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं एवं आपातकालीन शल्य चिकित्सा क्षमता को रेखांकित करती है। साथ ही जिले के गंभीर मरीजों को समय पर स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

 

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