पारुल के सपनों का भारत जहां बेटियों को मिले समान अवसर, सम्मान और स्वावलंबन
सेवा संकल्प अभियान में छात्रा ने साझा की विकसित भारत की परिकल्पना
सूरजपुर/19 सितम्बर 2026
ऐसा भारत, जहां महिलाओं को अपने सपने पूरे करने की स्वतंत्रता मिले, वे आत्मनिर्भर बनें और शिक्षा से लेकर रोजगार तक हर क्षेत्र में समान अवसर प्राप्त करें यह परिकल्पना है शासकीय नवीन कन्या महाविद्यालय सूरजपुर में बीए तृतीय सेमेस्टर की छात्रा पारुल की।
सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत पारुल ने अपने सपनों के भारत की तस्वीर प्रस्तुत करते हुए महिला सशक्तिकरण, समान अधिकार और सम्मान की आवश्यकता पर अपना विचार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि देश की बेटियों को घर से बाहर निकलकर अपनी प्रतिभा दिखाने, आत्मरक्षा में सक्षम बनने और रोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर होने के पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।
पारुल ने कहा, मेरे सपनों का भारत ऐसा हो, जहां महिलाओं को बेटों के समान स्वतंत्रता, अधिकार और सम्मान मिले। वे बिना किसी अनावश्यक रोक-टोक के शिक्षा, रोजगार और अपनी पसंद के प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ सकें। महिलाएं अपने सपनों को पहचानें और उन्हें पूरा करने के लिए स्वतंत्र होकर प्रयास करें।
उन्होंने कहा कि महिला और पुरुष दोनों को समान अवसर एवं सम्मान मिलने से ही सशक्त समाज और विकसित राष्ट्र का निर्माण संभव है। महिलाओं को निर्णय लेने की स्वतंत्रता और आगे बढ़ने के अवसर मिलने पर वे परिवार, समाज तथा देश की प्रगति में और अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकेंगी।
पारुल ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण की परिकल्पना का उल्लेख करते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण इसकी मजबूत नींव है। उन्होंने विकसित भारत के निर्माण के लिए किए जा रहे प्रयासों के प्रति प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया।