छत्तीसगढ़ / मनेन्द्रगढ़ – चिरिमिरी – भरतपुर

होटल व्यवसाय से आत्मनिर्भरता की राह पर कमला दीदी, जय भोलेनाथ महिला समूह ने दिया नई उड़ान का आधार

 एमसीबी । ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बिहान योजना लगातार नई मिसालें गढ़ रही है। स्व-सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं अपनी मेहनत, हुनर और समूह से मिली आर्थिक सहायता के सहारे स्वरोजगार की राह अपना रही हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी विकासखंड मनेन्द्रगढ़ के ग्राम पंचायत घाघरा अंतर्गत ग्राम रामानुजनगर की कमला देवी की है, जिन्होंने जय भोलेनाथ महिला स्व-सहायता समूह से जुड़कर होटल व्यवसाय को अपनी आजीविका का मजबूत आधार बनाया है।

बिहान से जुड़कर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाया कदम : 

कमला देवी जय भोलेनाथ महिला स्व-सहायता समूह की सक्रिय सदस्य हैं। समूह का गठन 11 फरवरी 2018 को हुआ था और इसमें कुल 10 महिला सदस्य शामिल हैं। समूह बिहान योजना के अंतर्गत संचालित है। समूह से जुड़ी महिलाओं की क्षमता बढ़ाने और उन्हें आजीविका गतिविधियों से जोड़ने के लिए विकासखंड मिशन प्रबंधन इकाई के स्टाफ एवं कैडर द्वारा मार्गदर्शन एवं क्षमता संवर्धन का कार्य किया गया। कमला दीदी भी प्रारंभ से ही समूह से जुड़ी रहीं और सचिव के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाती रहीं।

समूह की आर्थिक मदद बनी होटल व्यवसाय की शुरुआत का आधार : 

बिहान योजना से जुड़ने के बाद कमला दीदी ने आर्थिक रूप से सशक्त बनने के उद्देश्य से होटल व्यवसाय शुरू किया। समूह को प्राप्त सीआईएफ राशि में से 20 हजार रुपये का उपयोग उन्होंने होटल का कार्य प्रारंभ करने में किया। दस्तावेज में समूह को प्राप्त सीआईएफ राशि 60 हजार रुपये, बीएल राशि 1 लाख रुपये तथा गतिविधि प्रारंभ करने के लिए 40 हजार रुपये की निवेश राशि का उल्लेख है।

मेहनत और लगन से हर महीने हो रही नियमित आमदनी : 

कमला दीदी मेहनत और लगन के साथ होटल का संचालन कर रही हैं। होटल व्यवसाय शुरू होने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। दस्तावेज के अनुसार होटल संचालन से उन्हें औसतन 5 से 6 हजार रुपये प्रतिमाह की आमदनी हो रही है। इस आय से वे अपने परिवार की आजीविका चलाने में सहयोग कर रही हैं। उनका यह छोटा व्यवसाय अब परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है।

कमला दीदी की सफलता बनी गांव की महिलाओं के लिए प्रेरणा : 

कमला दीदी की सफलता बिहान योजना की उस सोच को मजबूती देती है, जिसमें ग्रामीण महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने समूह से मिली सहायता और अपने परिश्रम के बल पर होटल व्यवसाय को अपनी आजीविका का साधन बनाया है। आज वे नियमित आमदनी अर्जित कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं और समूह की अन्य महिलाओं तथा गांव की महिलाओं के लिए भी आत्मनिर्भरता की प्रेरणा बन रही हैं।

 

 

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