सेवा संकल्प अभियान : सेवा की कहानी
ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर सरसों की खेती ने बदली किसान की आय की तस्वीर
फसल विविधीकरण और वैज्ञानिक कृषि तकनीक से 5 एकड़ में 2.35 लाख रुपये की आमदनी
सक्ती, 22 सितम्बर 2026
सेवा संकल्प अभियान के तहत शासन की जनकल्याणकारी योजनाओ से आमजन की सेवा की कहानिया सामने आ रही है। कृषि विभाग के मार्गदर्शन एवं ग्रीष्मकालीन धान के बदले दलहन, तिलहन एवं मक्का फसल प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत किसान श्री दिनेश कुमार गवेल ने ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर सरसों की खेती अपनाकर कम लागत में बेहतर आर्थिक परिणाम प्राप्त किए हैं। वैज्ञानिक कृषि तकनीक, उन्नत एवं प्रमाणित बीज, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, सिंचाई सुविधा तथा तकनीकी मार्गदर्शन से उनकी 5 एकड़ भूमि में सरसों की खेती से लगभग 2 लाख 35 हजार रुपये की आमदनी हुई। योजना से जुड़ने से पूर्व श्री दिनेश कुमार गवेल कई वर्षों से पारंपरिक तरीके से खेती कर रहे थे। ग्रीष्मकालीन धान की खेती में उन्हें अधिक लागत और मेहनत करनी पड़ती थी। वैज्ञानिक कृषि तकनीकों एवं अनुशंसित मात्रा की जानकारी के अभाव में उत्पादन भी सीमित था। लगभग एक एकड़ में 30 क्विंटल धान का उत्पादन होता था तथा खेती की लागत लगभग 20 हजार रुपये प्रति एकड़ आती थी। पांच एकड़ में लगभग 92 हजार रुपये की आमदनी प्राप्त होती थी। अधिक लागत, मेहनत तथा बाजार मूल्य में उतार-चढ़ाव के कारण अपेक्षित आर्थिक लाभ नहीं मिल पा रहा था। वर्ष 2025-26 में श्री गवेल ग्रीष्मकालीन धान के बदले दलहन, तिलहन एवं मक्का फसल प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत सरसों फसल प्रदर्शन में शामिल हुए। कृषि विभाग द्वारा उन्हें निःशुल्क उन्नत सरसों बीज, वैज्ञानिक खेती की जानकारी, फसल प्रबंधन तथा तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया गया। साथ ही प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के माध्यम से सिंचाई सुविधा तथा मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर संतुलित उर्वरक प्रबंधन का लाभ मिला। कृषि विभाग के मार्गदर्शन में श्री गवेल ने ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर 5 एकड़ क्षेत्र में सरसों की खेती की। फसल में उन्नत एवं प्रमाणित बीज, वैज्ञानिक कृषि विधि, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन का उपयोग किया गया।
कम लागत में बेहतर उत्पादन, 2.35 लाख रुपये की आमदनी
सरसों की खेती में श्री गवेल की लागत घटकर लगभग 12 हजार रुपये प्रति एकड़ रह गई, जबकि पूर्व में ग्रीष्मकालीन धान की लागत करीब 20 हजार रुपये प्रति एकड़ थी। इस प्रकार उन्हें प्रति एकड़ लगभग 8 हजार रुपये की लागत बचत हुई। सरसों की खेती से उन्हें प्रति एकड़ लगभग 47 हजार रुपये की आमदनी प्राप्त हुई। पांच एकड़ में लगभग 2 लाख 35 हजार रुपये की आमदनी हुई। किसान ने लगभग 30 क्विंटल सरसों उत्पादन प्राप्त किया। इससे लगभग 1000 लीटर तेल का उत्पादन हुआ, जिसे बाजार में 235 रुपये प्रति लीटर की दर से बेचकर 2 लाख 35 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई।
किसान की जुबानी सेवा की कहानी
श्री दिनेश कुमार गवेल बताते हैं कि वे कई वर्षों से पारंपरिक तरीके से खेती करते आ रहे थे। ग्रीष्मकालीन धान की खेती में लागत और मेहनत अधिक लगती थी, जबकि उत्पादन एवं आमदनी अपेक्षाकृत कम थी। कृषि विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर सरसों की खेती करने का निर्णय लिया। उन्नत एवं प्रमाणित बीज, वैज्ञानिक तकनीक, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और फसल प्रबंधन की जानकारी से 5 एकड़ में सरसों की खेती से उन्हें 30 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ। सरसों से लगभग 1000 लीटर तेल प्राप्त कर 235 रुपये प्रति लीटर की दर से बिक्री करने पर कुल 2 लाख 35 हजार रुपये की आमदनी हुई। उन्होंने कहा कि वे आगे भी फसल विविधीकरण एवं वैज्ञानिक खेती को अपनाना चाहते हैं। श्री गवेल के अनुभव से यह स्पष्ट हुआ कि ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर सरसों जैसी तिलहनी फसलों को अपनाकर फसल विविधीकरण को बढ़ावा दिया जा सकता है। कृषि विभाग के अनुसार खेती की लागत में कमी, उन्नत बीजों का उपयोग, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, समुचित सिंचाई व्यवस्था तथा तकनीकी मार्गदर्शन के माध्यम से किसान बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। किसान भविष्य में भी कृषि विभाग की तकनीकी सलाह के अनुसार सरसों सहित अन्य दलहन-तिलहन फसलों का क्षेत्रफल बढ़ाने तथा उन्नत किस्मों के बीजों का उपयोग करने के लिए संकल्पित हैं। उन्होंने इस योजना के लिए प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।