छत्तीसगढ़ / रायपुर

गलती स्वीकारने और पश्चाताप से घटता है पाप का भार : मुनि आगम सागर

 रायपुर । दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर, मालवीय रोड में चल रहे समयोपदेश वर्षायोग 2026 के तहत दशलक्षण पर्यूषण महापर्व के दसवें और अंतिम दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ की गई। इस अवसर पर वासुपूज्य भगवान का मोक्ष कल्याणक दिवस भी मनाया गया। जिनेन्द्र देव का स्वर्ण कलश अभिषेक, शांतिधारा, निर्वाण लाडू समर्पण और महाआरती सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। वर्षायोग के दौरान मुनि आगम सागर, मुनि पुनीत सागर, ऐलक धैर्य सागर और ऐलक स्वागत सागर का सान्निध्य बना हुआ है।

आत्मा में रमण करना ही ब्रह्मचर्य : मुनि पुनीत सागर
धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुनीत सागर महाराज ने कहा कि ब्रह्म का अर्थ आत्मा है और जो व्यक्ति आत्मा में रमण करता है, वही वास्तविक अर्थों में ब्रह्मचर्य का पालन करता है। उन्होंने कहा कि शरीर के सुख को ही आत्मा का सुख मान लेने वाला व्यक्ति संसार चक्र से मुक्त नहीं हो सकता।

मुनिश्री ने बहिरात्मा, अंतरात्मा और परमात्मा के स्वरूप को समझाते हुए कहा कि जो शरीर को ही आत्मा मानता है, वह बहिरात्मा है। जो परमात्मा का चिंतन करता है, वह अंतरात्मा की ओर बढ़ता है और जो आत्मा का कल्याण कर लेता है, वह परमात्मा पद की ओर अग्रसर होता है।

उन्होंने कहा कि जैनागम में निर्दोष ब्रह्मचर्य व्रत को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। जो व्यक्ति पाप से डरता है और अपने चरित्र की रक्षा करता है, वही सन्मार्ग पर आगे बढ़ता है।

गलती हो जाए तो उसे स्वीकार करें : मुनि आगम सागर
मुनि आगम सागर महाराज ने शील, व्रत, पश्चाताप और सदाचार के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जीवन में कर्म के उदय से यदि कोई गलती हो जाए तो उसे स्वीकार करना चाहिए। गलती स्वीकार करने और सच्चे पश्चाताप से पाप का भार कम होता है।

मुनिश्री ने कहा कि जो व्यक्ति अपने अपराध को अपराध ही नहीं मानता, उसके जीवन में सुधार की संभावना कम हो जाती है। पश्चाताप के भाव से व्यक्ति के भीतर परिवर्तन आता है और आसपास का वातावरण भी सकारात्मक बनता है। इससे लोगों का विश्वास दोबारा कायम होने का मार्ग खुलता है।

 
 
 
 



उन्होंने दाम्पत्य जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि पति-पत्नी के बीच पूर्ण समर्पण, विश्वास और शील व्रत का पालन जीवन को सुखी और पवित्र बनाता है। चरित्र पर लगा दाग व्यक्ति को अपनी ही नजरों में गिरा देता है। इसलिए पुरानी भूलों से सीख लेकर आगे का जीवन पवित्र और धर्ममय बनाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि दशलक्षण धर्म केवल पर्व के दस दिनों के लिए नहीं, बल्कि जीवन में प्रतिदिन और प्रतिपल धारण करने के लिए हैं।

वासुपूज्य भगवान को निर्वाण लाडू समर्पित
वासुपूज्य भगवान के मोक्ष कल्याणक के अवसर पर नरेंद्र जैन एवं योगेंद्र जैन (गुरुकृपा परिवार) को निर्वाण लाडू समर्पित करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। प्रभु की महाआरती और फूलमाला अर्पित करने का पुण्य विजय कुमार नायक, अजय कुमार नायक, संजय नायक एवं विपुल नायक (नायक परिवार) को मिला।

विश्व शांति एवं सर्वजन कल्याण की भावना से रिद्धि-सिद्धि शांतिधारा का लाभ भरत जैन भोरावत, हर्षवर्धन जैन एवं प्रिंस जैन (भोरावत परिवार) को प्राप्त हुआ।

 

 

मूलनायक भगवान की प्रथम शांतिधारा अखिल जैन (मोनू), श्रीमती कल्पना जैन (मामी), अर्पण जैन एवं अनिक जैन ने की। द्वितीय शांतिधारा का सौभाग्य कस्तूरे परिवार को मिला।

चार इंद्रों को मिला स्वर्ण कलश अभिषेक का सौभाग्य
उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म के अवसर पर जिनेन्द्र देव का प्रथम चार इंद्रों के रूप में स्वर्ण कलशों से अभिषेक करने का पुण्य अभिषेक जैन, श्रीमती शालिनी जैन एवं परिवार, आशीष जैन, श्रीमती दीपा जैन एवं परिवार, धर्मचंद गंगवाल, श्रीमती ऊषा गंगवाल तथा मयंक जैन, श्रीमती पुष्पा शीलचंद्र जैन एवं परिवार को प्राप्त हुआ।

मुनि संघ की तप साधना और आहारचर्या
सकल दिगंबर जैन समाज रायपुर की ओर से पूज्य मुनि संघ की विशुद्ध आहारचर्या एवं तप साधना संपन्न हुई। इस दौरान मुनि आगम सागर, मुनि पुनीत सागर, ऐलक धैर्य सागर और ऐलक स्वागत सागर की तप साधना में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। मुनि पुनीत सागर और ऐलक स्वागत सागर के निर्जला उपवास एवं व्रत का भी उल्लेख किया गया।

26 सितंबर को व्रतियों का सम्मान और पारणा
वर्षायोग समिति के अनुसार 26 सितंबर 2026 को व्रतियों के सम्मान और पारणा का आयोजन होगा। सुबह 6:30 बजे जिनेन्द्र देव का अभिषेक, 7:30 बजे दशलक्षण पर्व के व्रतियों एवं तपस्वियों का सम्मान, 8 बजे व्रतियों का निष्ठापन एवं पारणा, 9 बजे मुनि आगम सागर का मंगल प्रवचन और 10 बजे मुनि संघ की आहारचर्या होगी।

27 सितंबर को क्षमावाणी पर्व
27 सितंबर 2026 को सकल दिगंबर जैन समाज द्वारा क्षमावाणी पर्व मनाया जाएगा। सुबह 7 बजे जिनेन्द्र अभिषेक, नित्यमह पूजन एवं क्षमावाणी पूजन होगा। दोपहर 1 बजे आचार्यश्री का पूजन और शाम 4:30 बजे भव्य क्षमावाणी कार्यक्रम, वात्सल्य मिलन समारोह एवं प्रीतिभोज आयोजित किया जाएगा।

वर्षायोग समिति एवं सकल दिगंबर जैन समाज रायपुर ने सभी धर्मानुरागी बंधुओं से इन धार्मिक आयोजनों में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर धर्मलाभ लेने की अपील की है।

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