तुलसीराम टंडन हत्याकांड में पुलिस की भूमिका पर सवाल....
सारंगढ़-बिलाईगढ़ । जुनवानी के स्व. तुलसीराम टंडन हत्याकांड में अब पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। मृतक के पुत्र फुले टंडन ने पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत देकर भटगांव थाना प्रभारी शिव कुमार धारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता ने थाना प्रभारी को मामले की विवेचना से तत्काल अलग करने के साथ निलंबन और विभागीय जांच की मांग की है।
विवाद के दौरान पुलिस के पहुंचने का दावा
शिकायत के मुताबिक, 28 जुलाई 2026 की रात करीब 9:30 बजे ग्राम जुनवानी में मृतक परिवार और आरोपी पक्ष के बीच विवाद की स्थिति बनी थी। सूचना मिलने पर भटगांव थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे थे।
मृतक के पुत्र का आरोप है कि उस दौरान मौके पर मौजूद करीब 25 से 30 ग्रामीणों के सामने आरोपी पक्ष के पुत्र पवन कुर्रे से कथित तौर पर 10 लाख रुपये लिए जाने की बात कही गई। शिकायत में थाना प्रभारी द्वारा कथित तौर पर धमकी भरे शब्दों का इस्तेमाल किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
‘निष्पक्ष जांच की उम्मीद कैसे?’
शिकायतकर्ता का कहना है कि किसी गंभीर हत्याकांड की विवेचना कर रहे पुलिस अधिकारी पर ही यदि कथित लेन-देन के आरोप लगाए जा रहे हैं, तो इससे परिवार के मन में जांच की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
इसी आधार पर फुले टंडन ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए थाना प्रभारी को विवेचना से अलग किया जाए और उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
ग्रामीणों के बयान दर्ज करने की मांग
शिकायत में दावा किया गया है कि घटना के समय मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे। ऐसे में शिकायतकर्ता ने मौके पर मौजूद लोगों के बयान दर्ज करने, कथित लेन-देन के आरोपों की जांच करने और घटनास्थल से जुड़े उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल कराने की मांग की है।
अब निगाहें पुलिस अधीक्षक की कार्रवाई पर हैं। सवाल यह भी है कि क्या शिकायत में बताए गए ग्रामीणों के बयान दर्ज किए जाएंगे और जांच पूरी होने तक थाना प्रभारी को हत्याकांड की विवेचना से अलग किया जाएगा।
आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि बाकी
मामले में सबसे अहम बात यह है कि थाना प्रभारी पर लगाए गए 10 लाख रुपये के कथित लेन-देन और अन्य आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। थाना प्रभारी शिव कुमार धारी या पुलिस विभाग की ओर से भी इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में शिकायत में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता स्वतंत्र जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।