छत्तीसगढ़ / कोंडागांव

32 दिनों तक एसएनसीयू में चला उपचार, स्वस्थ होकर माता-पिता के साथ घर लौटी नवजात बालिका

 कोण्डागांव । जिले में मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने तथा गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं को समय पर उपचार उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। 

कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, उपलब्ध संसाधनों के प्रभावी उपयोग और जरूरतमंद मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी दिशा में सीएमएचओ डॉ. आर. के. चतुर्वेदी एवं सिविल सर्जन डॉ. पी. एल. मंडावी के मार्गदर्शन में नवजात शिशुओं को समय पर एवं आवश्यक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग एवं विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) की टीम के समन्वित प्रयासों से एक गंभीर रूप से बीमार नवजात बालिका को सफल उपचार के बाद स्वस्थ अवस्था में घर भेजा गया।

जन्म के तुरंत बाद बिगड़ी स्थिति, SNCU में कराया गया भर्ती

बड़ेराजपुर विकासखंड के ग्राम ओंडाकापार, विश्रामपुरी निवासी बिराजो मरकाम एवं जेठूराम मरकाम की नवजात बालिका का जन्म 06 सितंबर 2026 को प्रातः 9:51 बजे हुआ। जन्म के समय बालिका का वजन 2.510 किलोग्राम था। जन्म के तुरंत बाद उसकी स्थिति गंभीर हो गई, जिसके बाद उसे तत्काल SNCU में भर्ती कराया गया।

 
 
 
 

नवजात बालिका Perinatal Asphyxia, Central Cyanosis, Apnea, Hypothermia, Shock, Meconium Aspiration तथा Neck Caput जैसी गंभीर चिकित्सकीय जटिलताओं से ग्रसित थी। ऐसी चुनौतीपूर्ण स्थिति में शिशु को समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा एवं सतत निगरानी की आवश्यकता थी।

विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में चला उपचार

नवजात बालिका के उपचार में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. रुद्र कश्यप एवं डॉ. राजेश बघेल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सांस लेने में गंभीर कठिनाई के कारण बालिका को तीन दिनों तक CPAP सपोर्ट तथा 12 दिनों तक वेंटिलेशन सपोर्ट दिया गया। संक्रमण के उपचार के लिए चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार आवश्यक एंटीबायोटिक दवाएं दी गईं। उपचार के दौरान शिशु की स्थिति को स्थिर बनाए रखने के लिए लगातार चिकित्सकीय निगरानी की गई तथा उसे दो बार रक्त भी चढ़ाया गया।

गंभीर स्थिति के बावजूद चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों के सतत प्रयासों से बालिका की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार होने लगा। इसके बाद उसके उपचार के साथ-साथ समग्र देखभाल पर भी विशेष ध्यान दिया गया।

कंगारू मदर केयर से मिली स्वस्थ होने में मदद

बालिका की स्थिति में सुधार आने के बाद कंगारू मदर केयर (KMC) को उसकी देखभाल का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया। इस दौरान मां को KMC के महत्व एवं सही तरीके के बारे में विस्तार से समझाया गया। इसके माध्यम से शिशु को मां के शरीर की गर्माहट प्रदान करने, मां और शिशु के बीच भावनात्मक जुड़ाव बढ़ाने तथा नवजात की समग्र देखभाल में सहायता मिली।

स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा परिवार को शिशु की देखभाल, स्वच्छता एवं उपचार के बाद बरती जाने वाली सावधानियों के संबंध में भी आवश्यक जानकारी और परामर्श दिया गया, ताकि अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद घर पर भी बालिका की उचित देखभाल सुनिश्चित की जा सके।

32 दिनों के उपचार के बाद स्वस्थ होकर लौटी घर 

लगातार 32 दिनों तक उपचार एवं निगरानी के बाद 07 अक्टूबर 2026 को बालिका की स्थिति स्थिर होने पर उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। डिस्चार्ज के समय उसका वजन बढ़कर 2.280 किलोग्राम हो गया था। जन्म के समय गंभीर चिकित्सकीय जटिलताओं से जूझ रही बालिका का स्वस्थ होकर अपने माता-पिता के साथ घर लौटना परिवार के लिए भावुकता और खुशी का क्षण रहा।

इस सफल उपचार यात्रा में SNCU के चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों ने दिन-रात समर्पित भाव से कार्य किया। समय पर उपचार, श्वसन सहायता, रक्ताधान, संक्रमण नियंत्रण, कंगारू मदर केयर और निरंतर निगरानी ने बालिका के स्वास्थ्य में सुधार लाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

 

यह सफलता केवल एक नवजात के स्वस्थ होने की कहानी नहीं, बल्कि समय पर चिकित्सा सहायता, विशेषज्ञ चिकित्सकीय देखभाल, आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं और स्वास्थ्यकर्मियों के समर्पित टीमवर्क का उदाहरण है। गंभीर परिस्थितियों में जन्म लेने वाली नवजात बालिका का 32 दिनों की चुनौतीपूर्ण उपचार यात्रा के बाद सुरक्षित घर लौटना जिले की नवजात स्वास्थ्य सेवाओं के लिए गर्व और संतोष का विषय है।

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