छत्तीसगढ़ / रायपुर

सेवा की कहानी : महतारी वंदन योजना बनी सुशीला बघेल के व्यवसाय का संबल, किराना दुकान को मिल रही नई मजबूती

 हर माह मिलने वाले एक हजार रुपए से बढ़ा रहीं दुकान की पूंजी, परिवार की आमदनी बढ़ाने में दे रहीं योगदान

जगदलपुर की सुशीला ने घरेलू जिम्मेदारियों के साथ व्यवसाय में भी बनाई अपनी पहचान

रायपुर, 16 अक्टूबर 2026

महतारी वंदन योजना से मिलने वाली आर्थिक सहायता महिलाओं को घरेलू जरूरतें पूरी करने के साथ स्वरोजगार और छोटे व्यवसायों को आगे बढ़ाने में भी मददगार साबित हो रही है। बस्तर जिले के जगदलपुर स्थित मेटगुड़ा निवासी श्रीमती सुशीला बघेल इसका प्रेरक उदाहरण हैं। वे योजना के तहत हर माह मिलने वाली एक हजार रुपए की राशि को अपने परिवार की किराना दुकान में लगाकर व्यवसाय को मजबूती दे रही हैं।

     सुशीला बघेल के परिवार की आजीविका का मुख्य साधन उनके पति द्वारा संचालित किराना दुकान है। वे घरेलू जिम्मेदारियां निभाने के साथ दुकान के संचालन में भी सक्रिय सहयोग करती हैं। महतारी वंदन योजना से उनके बैंक खाते में प्रतिमाह सीधे प्राप्त होने वाली एक हजार रुपए की राशि अब दुकान की पूंजी बढ़ाने में उपयोगी साबित हो रही है।

     सुशीला बताती हैं कि वे इस राशि को केवल घरेलू खर्चों में उपयोग करने के बजाय दुकान के लिए जरूरी सामान खरीदने में लगाती हैं। इससे दुकान में दैनिक उपयोग की वस्तुओं का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने में मदद मिलती है और ग्राहकों को उनकी जरूरत का सामान आसानी से उपलब्ध हो पाता है। इसका सकारात्मक असर दुकान की बिक्री और परिवार की आमदनी पर भी पड़ा है।

महिलाओं की बढ़ती क्रय शक्ति से स्थानीय व्यापार को भी मिल रहा लाभ

     सुशीला बघेल का कहना है कि महतारी वंदन योजना से महिलाओं को आर्थिक सहायता मिलने का लाभ स्थानीय बाजारों में भी दिखाई दे रहा है। महिलाओं के पास अपनी जरूरतों के लिए राशि उपलब्ध होने से वे घरेलू सामान की खरीदारी कर पा रही हैं, जिससे किराना दुकानों जैसे छोटे व्यवसायों को भी ग्राहकी मिल रही है। इस तरह योजना महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ स्थानीय व्यापार को भी प्रोत्साहित कर रही है।

     अपने जीवन में आए सकारात्मक बदलाव से प्रसन्न सुशीला बघेल ने मुख्यमंत्री विष्णु भैया के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि उनके परिवार के व्यवसाय को आगे बढ़ाने में सहायक बन रही है।

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