छत्तीसगढ़ / कबीरधाम

समाज कल्याण कार्यालय में हरियाली की पहल, औषधीय और फलदार पौधों से संवरा परिसर

कवर्धा। पर्यावरण संरक्षण केवल भाषणों और जागरूकता अभियानों तक सीमित न रहे, बल्कि सरकारी कार्यालयों की कार्यसंस्कृति का भी हिस्सा बने। इसी सोच के साथ जिला कार्यालय समाज कल्याण कबीरधाम में हरियाली को बढ़ावा देने की पहल की गई है। कार्यालय परिसर में विभिन्न प्रजातियों के औषधीय, फलदार, फूलदार और सजावटी पौधों का रोपण कर परिसर को हरित स्वरूप देने का प्रयास किया गया है।

कार्यालय परिसर में लगाए गए पौधे न केवल वातावरण की सुंदरता बढ़ा रहे हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और हरित जीवनशैली का संदेश भी दे रहे हैं। यहां विभिन्न रंगों के कनेर, गुड़हल, टिकोमा, अमरूद, बोगनवेलिया, गोल्डन धुरंधा, अपराजिता, पारिजात, मधुकामिनी, मधुमालती, डगर, कचनार, मीठा नीम और आम सहित कई प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं।

इसके अलावा गेंदा, विभिन्न रंगों की सेवंतियां, रेन लिली, केना जैसे फूलदार पौधों के साथ स्नेक प्लांट, स्पाइडर प्लांट, एरिका पाम, चाइना पाम, डाइफेनबैखिया, एग्लोनिमा, मनी प्लांट और क्रोटन जैसे इनडोर एवं आउटडोर सजावटी पौधों से भी कार्यालय परिसर को सजाया गया है।

इस पहल का महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि बागवानी को केवल सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं रखा गया है। औषधीय और फलदार प्रजातियों के पौधों का समावेश पर्यावरणीय संतुलन, हरित आवरण बढ़ाने तथा प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संदेश देता है। फूलदार पौधों से परिसर में रंग और प्राकृतिक आकर्षण बढ़ता है, वहीं छायादार एवं हरित पौधे कार्यालय के वातावरण को अधिक अनुकूल बनाने में सहायक हो सकते हैं।

जिला कार्यालय समाज कल्याण कबीरधाम में उपसंचालक श्रीमती अभिलाषा पण्डा के साथ सहायक ग्रेड-03 श्री सत्यम कुमार कौशिक, कम्प्यूटर ऑपरेटर श्री रामचरण पटेल, श्री विनायक सिंह ठाकुर एवं श्री मोहित सिन्हा, भृत्य श्री वेदराम कौशिक, वाहन चालक श्री संजय कुमार यादव तथा माली/डॉकरनर श्री सुखनंदन निषाद कार्यरत हैं। कार्यालय की इस हरित पहल में पौधों का रोपण, रखरखाव और नियमित देखभाल महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सरकारी कार्यालयों में अक्सर भवनों और सुविधाओं के विकास पर ध्यान दिया जाता है, लेकिन परिसर में हरियाली विकसित करने और उसे संरक्षित रखने की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। समाज कल्याण कार्यालय की यह पहल दूसरे शासकीय कार्यालयों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है। हालांकि पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उनके नियमित संरक्षण, सिंचाई और संवर्धन से ही यह प्रयास स्थायी परिणाम दे सकेगा।

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