श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2025 – धर्म, प्रेम और भक्ति का पावन पर्व
2025-08-14 11:48:49
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2025 – धर्म, प्रेम और भक्ति का पावन पर्व ????
लेखक: पं. पुनीत दुबे, ज्योतिष एवं वास्तु सलाहकार
संस्थापक – बाबा नीम करौरी ज्योतिष सेवा संस्थान (ट्रस्ट)
तिथि एवं समय
इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2025 का पावन पर्व शनिवार, 16 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा।
अष्टमी तिथि प्रारंभ: 15 अगस्त 2025, रात 11:49 बजे
अष्टमी तिथि समाप्ति: 16 अगस्त 2025, रात 9:34 बजे
निशिता मुहूर्त (मध्यरात्रि पूजा): 16 अगस्त, रात 12:04 से 12:47 बजे तक
व्रत पारण समय: 17 अगस्त 2025, प्रातः 5:44 बजे के बाद
???? जन्माष्टमी का महत्व
जन्माष्टमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि धर्म की स्थापना, अधर्म के विनाश और प्रेम की अनन्त शक्ति का प्रतीक है। द्वापर युग में जब पृथ्वी पाप और अन्याय से त्रस्त हो गई थी, तब भगवान विष्णु ने कृष्ण अवतार लेकर कंस का अंत किया और गीता का ज्ञान देकर मानवता को धर्म का मार्ग दिखाया।
भगवान कृष्ण का जीवन हमें सिखाता है—
कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और रणनीति से कार्य करना
जीवन में सत्य, धर्म और प्रेम को सर्वोपरि रखना
कर्तव्य को हर परिस्थिति में निभाना
???? पूजा-विधि एवं व्रत का नियम
1. व्रत संकल्प: प्रातः स्नान कर ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जप करते हुए व्रत का संकल्प लें।
2. पूजा सज्जा: घर के मंदिर या पूजा स्थल में झूला सजाएँ, उसमें बाल गोपाल की प्रतिमा या मूर्ति स्थापित करें।
3. अभिषेक: मध्यरात्रि में पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) से भगवान का अभिषेक करें।
4. भोग अर्पण: माखन-मिश्री, पंजीरी, तुलसी दल और फल अर्पित करें।
5. आरती एवं भजन: आरती के बाद ‘हरे कृष्ण हरे राम’ महा-मंत्र या भजन-कीर्तन करें।
6. व्रत पारण: अगले दिन प्रातः पारण मुहूर्त में व्रत तोड़ें।
???? इस वर्ष के विशेष योग
इस बार जन्माष्टमी पर कई शुभ योग बन रहे हैं जो पूजा को और अधिक फलदायी बनाएँगे—
ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 4:24 से 5:07 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 2:37 से 3:30 बजे तक
अमृतसिद्धि योग (कृष्ण भक्ति के लिए अत्यंत शुभ)
शुभ एवं सिद्ध योग जो पूजा-अर्चना के फल को कई गुना बढ़ाएंगे।
???? ज्योतिषीय दृष्टि से महत्व
जन्माष्टमी का पर्व भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि एवं रोहिणी नक्षत्र में आता है। रोहिणी नक्षत्र चंद्रमा का प्रिय नक्षत्र है और चंद्रमा का संबंध मन एवं भावनाओं से है। इस दिन कृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ, जो भक्ति, सौंदर्य और प्रेम का प्रतीक है।
ज्योतिष के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु, लक्ष्मी, और चंद्रदेव की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति होती है।
???? सांस्कृतिक एवं सामाजिक महत्त्व
जन्माष्टमी केवल मंदिरों और घरों में ही नहीं, बल्कि मटकी-फोड़ प्रतियोगिता, झांकियां, और भजन संध्याएं जैसे कार्यक्रमों से पूरे समाज को जोड़ती है। यह पर्व एकता, भक्ति और आनंद का अद्वितीय संगम है।
???? श्रीकृष्ण के अमर उपदेश (भगवद्गीता से)
> “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।”
— कर्म करो, फल की चिंता मत करो।
शुभकामना संदेश
आप और आपके परिवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2025 की हार्दिक शुभकामनाएँ।
भगवान वासुदेव की कृपा आपके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और प्रेम का संचार करे।
जय श्रीकृष्ण!
पं. पुनीत दुबे
ज्योतिष एवं वास्तु सलाहकार
संस्थापक – बाबा नीम करौरी ज्योतिष सेवा संस्थान (ट्रस्ट)
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