1 अप्रैल पूर्णिमा व्रत: सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृतकाल का संयोग
हिन्दू धर्म में पूर्णिमा व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। 1 अप्रैल, बुधवार को चैत्र शुक्ल पूर्णिमा पड़ रही है, जो धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने से सुख-समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है। पूर्णिमा के दिन चंद्रमा पूर्ण रूप में दिखाई देता है, इसलिए चंद्र उपासना का भी खास महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से पितरों की कृपा भी मिलती है।
दृक पंचांग के अनुसार, सूर्योदय सुबह 6:11 बजे और सूर्यास्त शाम 6:39 बजे होगा, जबकि चंद्रोदय शाम 6:11 बजे होगा। चतुर्दशी तिथि सुबह 7:06 बजे तक रहेगी, इसके बाद पूर्णिमा तिथि प्रारंभ हो जाएगी। उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र दोपहर 4:17 बजे तक रहेगा, इसके बाद हस्त नक्षत्र शुरू होगा। वृद्धि योग दोपहर 2:51 बजे तक रहेगा।
शुभ मुहूर्तों में ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:39 से 5:25 बजे तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2:30 से 3:20 बजे तक और अमृत काल सुबह 8:48 से 10:28 बजे तक रहेगा। सर्वार्थ सिद्धि योग दोपहर 4:17 बजे से अगले दिन सुबह तक प्रभावी रहेगा।
वहीं, राहुकाल दोपहर 12:25 से 1:59 बजे तक रहेगा, जिसे अशुभ माना जाता है। पूर्णिमा व्रत रखने वाले श्रद्धालु दिनभर उपवास रखकर शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करते हैं। इस दिन विष्णु सहस्रनाम पाठ, सत्यनारायण कथा और दान-पुण्य करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।