उपकार नहीं प्रतिकार
2025-04-25 18:01:07
उपकार नहीं प्रतिकार
- ब्रजेश शुक्ला
भारत में व्याप्त शांति के दौर को बदलकर क्रांति में तब्दील करने वाली तिथि 22 अप्रैल 2025।
इस अंदेशे के साथ देश के उन तमाम निर्दोष, बेगुनाह पर्यटक भाइयों को, मातृशक्ति को विनम्र श्रद्धांजलि! जिन्होंने इस कायराना हमले में अपनी जान की आहूति दी, जिनके हिस्से इस देश की सभ्यता में अपने संस्कारशील भाईचारा से युक्त होने की महती जिम्मेदारी रही। ना ना करते हुए भी कलम आतुर है अगली लाइन बयां करने, जी हां हिंदू होने का खामियाज़ा! इस देश का कमान देश की 130 करोड़ जनता द्वारा एक कुशल नेतृत्वकर्ता के योग्य हाथों में दिए जाने का खामियाज़ा। देखते देखते दर्जनों निहत्थे निर्दोष लोगों को घेरकर मार देना। महिलाओं के समक्ष, बहनों के सामने उनके पति को मार देना, छोटे मासूम बच्चों के आगे पिता को मार देना, निहायत ही कायराना कृत्य घोर निंदनीय। सहज विश्वास करने का दिल नहीं करता कि इंसान ऐसी घटना को अंजाम दे सकता है! घटना की क्रूरता ऐसी की पूरे हिंदुस्तान को हिलाकर रख दिया, आहत कर दिया। संतुष्टि इस बात की है इस दुखदायी घटना के तुरंत बाद देश के गृहमंत्री का सक्रियता से घटनास्थल तक पहुंचकर उनका एक्शन में आना, देश के प्रधानमंत्री का 3 दिवसीय विदेश यात्रा कैंसल कर वापस आकर त्वरित एक्शन में आना, विश्वास जगा रहा है, कि इंसाफ होगा। इंसाफ होगा उन नौनिहालों के साथ जिन्होंने अपने मासूम आंखों से अपने पिता को गोलियां खाते देखा, इंसाफ होगा उन अबला मातृशक्ति के साथ जिनके हिस्से अपनी आंखों से गोलियों से अपने पति-पिता को गोलियों से छलनी होते देखे जाने का दुर्भाग्य आया। विश्वास है, इंसाफ होगा कश्मीर क्षेत्र के उन तमाम छोटे व्यवसायियों के साथ जिनकी रोजी-रोटी चंद मिनट के कुत्सित मानसिकता के चलते छिन गई। बुजदिल, कायर जैसे शब्दों की सभी भाषा में आक्रोश की अभिव्यक्ति जिस स्तर में हो सकती है, उन भावनाओं के साथ इस कायराना कृत्य को अंजाम देने वालों को संदेश दिया जाए कि अब प्रतिकार होगा और इस के लिए भारत में देश का हर नागरिक यहां की सरकार यहां का विपक्ष सभी एकजुट है।
कायराना कृत्य के खिलाफ घृणा के मध्य देश के जिम्मेदारों की सक्रियता विश्वास दिला रही है, कि इंसाफ होगा परंतु इस बार इंसाफ की परीक्षा उपकार से नहीं प्रतिकार से होना चाहिए। भयंकर प्रतिकार / प्रतिकार की हुंकार जब भरना प्रारंभ हो तो उस बहन की तस्वीर न भूली जाए जिसके पति का शव अशांत हो चुके शांत वादियों में निर्विकार पड़ा है, और उसके समीप विलाप कर रही वो बहन जिसका फोटो आज सोशल मीडिया के दौर में पूरी दुनिया में वायरल है। हुंकार के क्रम में ना भूलें रोते बिलखते बच्चों को। प्रतिकार के लिए अब सीमा का ख्याल रखे जाने की आवश्यकता नहीं, सीमाई बाड़ के तार और तमाम बैरिकेट्स तो उन्होंने ही धराशायी कर दिया, अब तो लांघना ही होगा। मानवता के बर्बर हत्यारे अभी तलाशे नहीं गए हैं, बिल से निकला चूहा शिकार करके छिप गया है। परंतु इन भाड़े के टट्टुओं को मार्गदर्शन करने वाले तथाकथित हुक्मरानों के साथ भी अब ईश्वरीय न्याय का समय आ गया है। अपने ही परिजनों के समक्ष मारे गए निर्दोष सैलानियों की तरह ही हमें भी अब इंसाफ चाहिए, उन्हें भी पूरी दुनिया के समक्ष धराशायी करना होगा। उनको उसी भाषा में संदेश देना होगा जिस भाषा में उन्होंने हमें दिया है। वसुदेव कुटुंबकम को मानने वाला हिंदू समाज पूरी दुनिया को अपना परिवार मानता है, पुरी दुनिया के परिजन विलाप कर रहे हैं, और राह तक रहे हैं, इंसाफ के लिए। प्रतिकार के लिए! प्रतिकार का संदेश कम से कम परिजनों के लिए संतुष्टिदायक हो।
उन्होंने हमसे धर्म पूछा, कलमा पढ़ाकर परीक्षा लिया, फिर पास होने की सूचना दी। अब हमें भी प्रतिपरीक्षण करना होगा। ठीक उसी तरह जिस तरह का धर्म की हानि होने पर प्रतिकार का संदेश श्री कृष्ण ने दिया था महाभारत काल में! पहलगाम में पहल हुआ है, सारी दुनिया को संदेश देने का, अब इंसाफ होना चाहिए, दुनिया के नक्शे से उनके मिट जाने का जिन्होने हमें छेडऩे की हिमाकत की है। अब आर-पार की नहीं सीधे इस पार से उस पार जाने का इंसाफ चाहिए। राजनैतिक विवशता, सत्ता की महत्वाकांक्षा जैसे कुत्सित मानसिकता को छोड़ दिया जाए, तो इस घटना ने समूची भारतीय धरा को दुखी किया है, कई आंखों को नम किया है। कायराना कृत्य के माध्यम से मु_ी भर कायर लोगों ने हमें संदेश देने की कोशिश किया है, हमारे द्वारा चुने गए हुक्मरान वजह बताए गए हैं, इस कुत्सित चेष्टा के लिए। जन्म-जन्मान्तर के श्रेष्ठ कर्मों के बाद हिंदू धर्म में हमारे जन्म का सौभाग्य कैसे कारण बन सकता है मानवता के खिलाफ रक्तरंजित प्रयासों का। हमें जवाब देना होगा, क्यों करें अब उपकार अब होना चाहिए प्रतिकार सिर्फ और सिर्फ भयंकर प्रतिकार!
अनुरोध है, मेरा हुक्मरानों से कि वे साबित करें हमारा चयन गलत नहीं। तीसरी बार इस देश की जनता ने वर्तमान व्यवस्था का चयन किया है, हमें हिंदू बताकर मारा गया है अब हम उन्हें हिंदू होने का परिचय दें। जन्मदाता, पालनकर्ता के साथ हम संहारकर्ता को मानने वाले लोग हैं। समझ के उच्चतम स्तर में हमें बताया जाता है कि जन्म देने वाला पालनकर्ता व संहारकर्ता एक ही है, बस यही तो समझाना है, पड़ोसी को अपनी सीमाओं में रहे। प्रथम कार्यकाल छोटी झलक थी सर्जिकल और एयर स्ट्राईक जैसे प्रतिकारो से द्वितीय कार्यकाल में भारत के पालनकर्ता बने रहना लंबे समय तक रास नहीं आया जिन्हें अब संहारक का दर्शन कराना चाहिए। झलक दिखला ही दिया जाए आतताईयों को उपकार से नहीं प्रतिकार से। साबित करें हुक्मरान हमने वह सत्ता चुनी है जो इंसाफ के लिए प्रतिकार का चयन करती है, ऐसे भयंकर प्रतिकार का जो हमारे आज के दुख को दीर्घकाल की संतुष्टि में तब्दील कर सके।