एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों को टैक्स में राहत दिलाने की तैयारी
इन दिनों भारत की इंडस्ट्री को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, खासकर जब बात विदेशों से हो रही कड़ी प्रतिस्पर्धा की हो। ऐसे समय में भारतीय वाणिज्य और उद्योग महासंघ (फिक्की) ने सरकार से आरओडीटीईपी (रिपीट ऑफ ड्यूटीज ऑन एक्सपोर्टेड प्रोडक्ट्स) योजना को आगे बढ़ाने की अपील की है। यह योजना उन कंपनियों के लिए काफी मददगार है, जो अपने प्रोडक्ट विदेशों में बेचती हैं। जब ये कंपनियाँ एक्सपोर्ट करती हैं, तो उनके उत्पादों पर जो टैक्स या शुल्क लगता है, वह उन्हें वापस मिल सकता है।
इस योजना का उद्देश्य यह है कि इन कंपनियों की लागत थोड़ी कम हो जाए, ताकि वे दुनिया के दूसरे देशों की कंपनियों से अच्छे से मुकाबला कर सकें। अभी यह सुविधा कुछ खास कंपनियों को मिल रही है, जैसे- एए (एडवांस ऑथोराइजेशन), ईओयू (एक्सपोर्ट ओरिएंटेड यूनिट्स) और एसईजेड (स्पेशल इकोनॉमिक जोन) में आने वाली इकाइयाँ।
फिक्की का कहना है कि यह योजना 5 फरवरी, 2025 के बाद भी चलती रहनी चाहिए, ताकि भारत के निर्यातक मजबूती से आगे बढ़ते रहें और उन्हें किसी भी हालात में राहत मिलती रहे।
फिक्की का कहना है कि यदि यह फायदा आगे नहीं मिला, तो इसका सीधा असर उद्योगों पर पड़ेगा। लागत बढ़ेगी और भारतीय कंपनियाँ विदेशी कंपनियों से मुकाबला नहीं कर पाएँगी। एल्युमीनियम जैसे कई जरूरी सेक्टर भी इससे नुकसान में आ सकते हैं, जो हमारे देश के निर्यात का बड़ा हिस्सा हैं।
इसी वजह से फिक्की ने सरकार से कहा है कि इस योजना को कम से कम 30 सितंबर, 2025 तक बढ़ा देना चाहिए, ताकि कंपनियाँ ठीक से काम करती रहें और भारत दुनिया के बाजार में मजबूत बना रहे।