देश-विदेश

नवरात्रि के नवरंग : देश के 9 राज्यों में इस तरह की जाती है मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की अराधना

 पश्चिम बंगाल में नवरात्रि का पर्व बहुत ही धूम-धाम से मनाया जाता है. इसे वहां दुर्गा पूजा कहते हैं. इसे वहां का सबसे बड़ा त्योहार भी कहा जाता है. पश्चिम बंगाल में नवरात्रि का पर्व छठे दिन से शुरू होता है जिसे बोधन कहा जाता है. देवी दुर्गा को बेटी के रूप में माना जाता है और इनके आने पर नाच-गाकर खुशियां मनाई जाती हैं. इस दौरान यहां बड़े-बड़े पंडाल सजाए जाते हैं जहां देवी की विशाल मूर्तियां स्थापित की जाती हैं. इन राज्यों में मिट्टी से देवी माँ की प्रतिमा बनाकर उसे छोटे-छोटे पंडाल में स्थापित किया जाता है. आप बंगाल, बिहार और असम में जगह-जगह पर दुर्गा पूजा के दौरान माँ का पंडाल देख सकते हैं. दुर्गा पूजा के आखिरी दिन जौ पूरी तरह से छोटे-छोटे पौधों में परिवर्तित हो जाता है. इसे पूजा के आखिरी दिन काट कर देवी माँ की चरणों में चढ़ाया जाता है.

गुजरात

 

गुजरात में नवरात्रि के नौ दिनों में अलग ही छटा नजर आती है. रात के वक़्त विशेष रूप से लोग समूह में इक्कठा होकर देवी माँ की उपासना करते हैं और उसके बाद डांडिया और गरबा खेलते हुए त्यौहार का आनंद लेते हैं. इसे डांडिया रास भी कहते हैं. इन 9 दिनों तक गुजरात में रात में भी दिन जैसी रौनक देखने को मिलती है. परंपरागत वेशभूषा में जब हजारों लोग एक जैसे गरबा रास करते हैं तो ये दृश्य बहुत सुंदर दिखाई देता है.

आंध्रप्रदेश

नवरात्रि पर्व बतुकम्मा के रूप में मनाया जाता है. बतुकम्मा का अर्थ है माँ देवी जीवित हैं. ये त्योहार नौ दिनों तक बहुत धूमधाम से मनाया जाता है. इस दौरान फूलों से सात सतह से गोपुरम मंदिर की आकृति बनाई जाती है. बतुकम्मा को महागौरी के रूप में पूजा जाता है. मुख्य रूप से ये पर्व देवी पार्वती को अच्छी फसल के लिए धन्यवाद देने के लिए मनाया जाता था.

 

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