देश-विदेश

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कैसे बदल गई मोदी सरकार की सोच, ये है अंदर की कहानी

 नई दिल्लीः 20 जुलाई को सीजेपी और युवाओं के संसद मार्ग से पहले जहां सरकार अलग रणनीति पर काम रही थी वहीं धीरे-धीरे रणनीति बदलने लगी। सूत्रों के मुताबिक जब युवाओं का ये आंदोलन शुरू हुआ था, तब बीजेपी से जुड़ी सोशल मीडिया पर नजर रखने वाली एक टीम ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि सीजेपी के इस आंदोलन को लेकर दूसरे देशों से ज्यादा कंटेंट शेयर किया जा रहा है, साथ ही ये सोशल मीडिया तक ज्यादा सीमित रहेगा और जमीन पर असर नहीं दिखाएगा।

लेकिन 20 जुलाई के संसद मार्च के बाद ये सोच बदली और फिर नए सिरे से इस आंदोलन का विश्लेषण किया जाने लगा। 21 जुलाई को जब संसद में एनडीए के संसदीय दल की मीटिंग हुई, उसमें भी पीएम नरेंद्र मोदी की तरफ से कहा गया कि सरकार ने पेपर लीक के बाद दोबारा अच्छे से पेपर करवाया और पेपर लीक वालों पर कड़ा ऐक्शन लिया।

सरकार को लग रहा था कि आंदोलन अपने आप खत्म हो जाएगा

इस स्टेज तक भी सरकार की तरफ से यह माना जा रहा था कि ये आंदोलन अपने आप खत्म हो जाएगा। फिर कोर टीम ने जो लगातार एनालिसिस कर रही थी और फीडबैक दे रही थी, ये फीडबैक दिया कि ये आंदोलन अब ऑर्गेनिक हो गया है, तब जाकर रणनीति बदली, जिसके बाद 23 जुलाई की रात को एजुकेशन सेक्रेटरी बदलने का भी फैसला लिया और प्रधानमंत्री ने भी आधी रात को इंस्टाग्राम के जरिए युवाओं को संदेश दिया।

Leave Your Comment

Click to reload image