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‘नेशन फर्स्ट, सिटीजन फर्स्ट’ हो चयन की कसौटी : पीएम मोदी

 नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के शताब्दी समारोह में हिस्सा लिया और आयोग के 100 वर्षों के सफर को याद करते हुए भविष्य की चुनौतियों पर बात की। दो दिवसीय कार्यक्रम में यूपीएससी के इतिहास, भर्ती प्रक्रिया और भविष्य में परीक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर मंथन किया जा रहा है।

कैप्टन स्मित मच्छार के साहस का किया जिक्र
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत हाल की एक घटना का जिक्र करते हुए की। उन्होंने कैप्टन स्मित मच्छार के धैर्य, सूझबूझ और साहस की सराहना की। पीएम ने कहा कि उनके पराक्रम ने हर देशवासी को गौरवान्वित किया है।

सुभाष चंद्र बोस का भी किया उल्लेख
पीएम मोदी ने यूपीएससी की ऐतिहासिक गैलरी का जिक्र करते हुए कहा कि 1920 में सुभाष चंद्र बोस भी इसी चयन प्रक्रिया से गुजरे थे। उन्होंने बताया कि उस दौर में अंग्रेजों का शासन होने के बावजूद परीक्षा में संस्कृत का पेपर भी हुआ करता था और सुभाष बाबू ने संस्कृत में परीक्षा दी थी।

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर सरदार वल्लभभाई पटेल को भी नमन किया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश को केवल स्वतंत्र रखना ही चुनौती नहीं थी, बल्कि राष्ट्र के पुनर्निर्माण और उसे चलाने के लिए आवश्यक प्रशासनिक क्षमता विकसित करना भी जरूरी था। पीएम के मुताबिक, पटेल ने इस संस्था को स्वतंत्र भारत के प्रमुख स्तंभ के रूप में मजबूत किया।

‘नेशन फर्स्ट, सिटीजन फर्स्ट’ पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि यूपीएससी के जरिए चयनित होने वाले युवा विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया के लिए दो प्रमुख कसौटियों पर जोर दिया—‘नेशन फर्स्ट’ और ‘सिटीजन फर्स्ट’।

उन्होंने कहा कि पब्लिक सर्विस में ऐसे युवाओं को लाने की जरूरत है जो केवल सरकारी पद से आकर्षित न हों, बल्कि वास्तव में लोगों की सेवा करने की भावना रखते हों। परीक्षा में केवल यह नहीं देखा जाना चाहिए कि उम्मीदवार कितना जानता है, बल्कि यह भी परखा जाना चाहिए कि वह सिविल सेवा में क्यों आना चाहता है।

‘सरकार माई-बाप’ वाले दौर से आगे बढ़ा देश
पीएम मोदी ने कहा कि देश अब उस दौर से आगे बढ़ चुका है, जब सरकार को ‘माई-बाप’ माना जाता था। उन्होंने ‘नागरिक देवो भव’ की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि नागरिकों की सेवा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि 21वीं सदी का भारत नई कार्य संस्कृति के साथ आगे बढ़ रहा है, जिसका मूल सिद्धांत ‘प्रो-पीपल, प्रो-एक्टिव गुड गवर्नेंस’ है।

संवेदनशील और इनोवेटिव अधिकारियों की जरूरत
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश को ऐसे प्रोफेशनल्स की जरूरत है जो गरीबों की समस्याओं और पीड़ा को समझें, समाधान खोजने में इनोवेशन का इस्तेमाल करें और देश की जरूरतों के अनुरूप काम करें।

उन्होंने कहा कि अधिकारियों को कानूनों का पालन सुनिश्चित करने के साथ यह समझने की क्षमता भी विकसित करनी होगी कि किसी कानून या व्यवस्था का आम लोगों पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।

परीक्षा व्यवस्था में सुधार पर जोर
पीएम मोदी ने यूपीएससी और राज्य लोक सेवा आयोगों की कैपेसिटी बिल्डिंग पर भी जोर दिया। उन्होंने मिशन कर्मयोगी के तहत तैयार iGOT प्लेटफॉर्म का उपयोग संस्थागत व्यवस्थाओं और टीम की क्षमता बढ़ाने के लिए करने की बात कही।

उन्होंने कहा कि देश तेजी से सुधारों की दिशा में आगे बढ़ रहा है, ऐसे में परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं को भी समय की जरूरत के अनुसार सुधार करना होगा। परीक्षा को केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य से जुड़ी प्रक्रिया के रूप में देखना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि परीक्षा में होने वाली कुछ महीनों की देरी भी युवाओं के लिए मुश्किलें पैदा कर सकती है। इसलिए परीक्षा प्रणाली में समय की निश्चितता को महत्वपूर्ण सिद्धांत के रूप में अपनाने की जरूरत है।

100 साल के सफर का उत्सव
UPSC की स्थापना 1 अक्टूबर 1926 को हुई थी और 2026 में आयोग के 100 वर्ष पूरे हो रहे हैं। शताब्दी समारोह के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा स्मारक सिक्का, डाक टिकट और ‘100 Landmark Judgements’ नामक पुस्तक जारी किए जाने का कार्यक्रम भी रखा गया है।

 

 

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