लखनऊ क्या फिर बनेगा रक्षा मंत्री राजनाथ का ’रक्षा कवच'
उत्तर प्रदेश की लखनऊ लोकसभा सीट देश की सबसे चर्चित सीटों में शामिल रही है। प्रभु श्रीराम के अनुज लक्ष्मण की नगरी लखनऊ ने अपने लम्बी जीवन यात्रा में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। यहां मुगलों ने भी शासन किया। इसी दौर में अवध की शाम की चर्चा ता समुंदर पार तक होने लगी, लेकिन इसमें खट्टी-मीठी दोनों तरह के यादें शामिल हैं। तहजीब के इस शहर के आबो-हवा और सुकून के चर्चे तो दुनियाभर में मशहूर हैं। इसी के लिए लोग यहां खिंचे चले आते हैं। लखनऊ शहर की खासियत के बारे में यहां के मशहूर शायर अजीज लखनवी ने लिखा है- ‘वो आबो-हवा, वो सुकून, कहीं और नहीं मिलता। मिलते हैं बहुत शहर, मगर लखनऊ-सा नही नहीं मिलता’। यहां के वर्तमान सांसद देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह हैं। भाजपा ने लगातार तीसरी बार राजनाथ सिंह को उम्मीदवार बनाया है। जबकि सपा ने इस बार रविदास मेहरोत्रा पर दांव लगाया है। वहीं बसपा ने अपने कोर वोटर के साथ अल्पसंख्यक मतदाताओं को रिझाने के लिए सरवर मलिक को चुनावी रण में उतारा है। इस बार यहां लड़ाई लगातार आठ बार से जीत हासिल कर रही भाजपा को अपना गढ़ बचाने की है और राजनाथ सिंह को अपने खुद की जीत की हैट्रिक लगाने की है।
लखनऊ के वोटर क्या तीसरी बार भी अपने सांसद और देश के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के लिये रक्षा कवच बनेंगे यह 04 जून को नतीजे आने पर पता चलेगा। वहीं विपक्षी खेमा राजनाथ सिंह की हैट्रिक नहीं पूरी होने देने की तमन्ना पाले हुए है और भाजपा के मजबूत किला को तोड़ने की तैयारी कर रहा है। अगर लोकसभा चुनाव 2019 की बात करें तो भाजपा के राजनाथ सिंह ने सपा बसपा के संयुक्त उम्मीदवार रहे अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी पूनम सिन्हा को 3,47,302 वोट से हराकर जीत हासिल की थी। इस चुनाव में राजनाथ सिंह को 6,33,026 और पूनम सिन्हा को 2,85,724 वोट मिले थे। जबकि कांग्रेस के आचार्य प्रमोद कृष्णम को 1,80,011 वोट मिले थे। वहीं लोकसभा चुनाव 2014 में मोदी लहर के दौरान इस सीट पर पहली बार राजनाथ सिंह उतरे और कांग्रेस के दिग्गज नेत्री रहे रीता बहुगुणा जोशी को 2,72,749 वोट से हराकर जीत हासिल की थी। इस चुनाव में राजनाथ सिंह को 5,61,106 और रीता बहुगुणा जोशी को 2,88,357 वोट मिले थे। जबकि बसपा के नकुल दुबे को 64,449 और सपा के अभिषेक मिश्रा को 56,771 वोट मिले थे। वहीं आम आदमी पार्टी के सैयद जावेद अहमद जाफ़री को 41,429 वोट मिले थे। लखनऊ लोकसभा क्षेत्र के जातीय समीकरण की बात करें तो यहां सामान्य और मुस्लिम वर्ग के मतदाता हैं। जिसमें ब्राह्मणों की संख्या अधिक है। इसके बाद मुस्लिम आबादी है, जिसमें शिया की संख्या ज्यादा है। फिर वैश्य समाज के मतदाता आते हैं। यहां कायस्थ वोटरोें की भी अच्छी खासी संख्या है। इस सीट पर दलित और ओबीसी मतदाताओं की संख्या सामान्य और मुस्लिम वर्ग की तुलना में बेहद कम है।