अडानी के 3700 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट पर लटकी तलवार, श्रीलंका ने कहा- मंजूरी के लिए फिर से सोचेंगे
नई दिल्ली: गौतम अडानी के श्रीलंका में शुरू होने वाले एक प्रोजेक्ट पर तलवार लटकती दिखाई दे रही है। 440 मिलियन डॉलर (करीब 3700 करोड़ रुपये) का यह प्रोजेक्ट विंड पावर से जुड़ा है। श्रीलंका के नए प्रशासन ने कहा है कि वह इस प्रोजेक्ट के बारे में फिर से सोचेंगे और तब निर्णय लेंगे। इसे पहले अडानी ग्रुप को बांग्लादेश की अंतरिम सरकार भी झटका दे चुकी है।हाल ही में अनुरा कुमारा दिसानायके श्रीलंका के नए राष्ट्रपति बने हैं। इनके नेतृत्व वाली सरकार ने संकेत दिया है वह अडानी के इस प्रोजेक्ट में बदलाव करेगी। बता दें कि इससे पहले वाली श्रीलंका सरकार ने इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी दिखा दी थी। लेकिन नई सरकार ने फिलहाल इसे रेड सिग्नल दिखा दिया है। ऐसे में अडानी के इस प्रोजेक्ट पर खतरा दिखाई दे रहा है। यह प्रोजेक्ट अडानी ग्रीन एनर्जी द्वारा पूरा किया जाना है।
सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी
सोमवार को श्रीलंका के अटॉर्नी जनरल के ऑफिस ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि नया प्रशासन पिछली सरकार द्वारा दी गई मंजूरी पर पुनर्विचार करेगा। हमारे सहयोगी इकनॉमिक टाइम्स ने पीटीआई के हवाले से इस बारे में बताया है। नई कैबिनेट ने 7 अक्टूबर को एक बैठक की थी। इस बैठक में इस पुनर्विचार के बारे में निर्णय लिया गया। इस समय जहां अडानी दुनिया में अपने कारोबार को फैला रहे हैं, श्रीलंका का नया निर्णय अडानी के लिए बाधा पेश कर सकता है।
क्यों लिया श्रीलंका सरकार ने यह निर्णय?
श्रीलंका की विदेश मंत्री विजिता हेराथ के अनुसार इस प्रोजेक्ट को इसके प्राइज स्ट्रेक्चर को लेकर समस्याओं का सामना करना पड़ा था। कैबिनेट की बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए हेराथ ने कहा कि इस प्रोजेक्ट के लिए पिछली सरकार ने जो बिजली शुल्क स्वीकृत किया था, उसे लेकर कुछ परेशानी है। यह ज्यादा है और इसे कम किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार 14 नवंबर को होने वाले संसदीय चुनावों के बाद इस प्रोजेक्ट पर नए सिरे से विचार करेगी।
अडानी की डील को बताया था खतरा
दिसानायके ने पिछले महीने राष्ट्रपति चुनाव के दौरान श्रीलंका की ऊर्जा संप्रभुता की रक्षा करने का वचन दिया था। उन्होंने अडानी सौदे को एक संभावित खतरा बताया था। उन्होंने कहा था कि सौदे की शर्तों पर फिर से बातचीत की जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा था कि वह इस प्रोजेक्ट को रद्द करवाकर ही रहेंगे। चुनाव जीतने के बाद वह अपने वादे को पूरा करने की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।
क्या है श्रीलंका के साथ यह समझौता?
अडानी ग्रुप ने 20 साल के समझौते के तहत मन्नार और पूनरी के पूर्वोत्तर क्षेत्रों में 484 मेगावाट पवन ऊर्जा के विकास में 440 मिलियन डॉलर से ज्यादा का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई थी। हालांकि, इस परियोजना को कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने बोली प्रक्रिया में पर्यावरणीय प्रभावों और पारदर्शिता के बारे में चिंताएं जताई हैं।