ब्रिक्स समिट: मोदी-जिनपिंग को साथ लाकर दुनिया को बड़ा संदेश दे रहे पुतिन, रूसी राष्ट्रपति का प्लान खत्म करेगा अमेरिकी दबदबा
मॉस्को: रूस में चल रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के उद्घाटन में मंगलवार को करीब दो दर्जन विश्व नेता जुटे हैं। इनमें रूस के अलावा ईरान, भारत, चीन, यूएई जैसे अहम देश शामिल हैं। ब्रिक्स उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं का एक गठबंधन है, जिसके बारे में रूस उम्मीद कर रहा है कि यह पश्चिम के दुनिया पर आधिपत्य को चुनौती देगा। यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिका की आलोचना का सामना कर रहे पुतिन रूस में इस तरह बड़ी बैठक के जरिए यह दिखाने की भी कोशिश कर रहे हैं कि पश्चिम के मॉस्को को अलग-थलग करने के प्रयास विफल रहे हैं।एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी नेता शी जिनपिंग, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन 22 से 24 अक्टूबर तक चले वाले इस सम्मेलन में शामिल होने के लिए आए हैं। ब्रिक्स के दो सबसे अहम सदस्यों भारत और चीन के बीच मतभेद रहे हैं। तमाम मतभेद के बावजूद दोनों देश ब्रिक्स में मंच साझा कर रहे हैं, इसे भी पुतिन की सफलता की तरह देखा जा रहा है।
रूस दे रहा है ब्रिक्स पर विशेष ध्यान
रूस ने ब्रिक्स समूह के विस्तार को अपनी विदेश नीति का एक हिस्सा बना लिया है। उसके एजेंडे के मुख्य मुद्दों में ब्रिक्स के नेतृत्व वाली भुगतान प्रणाली है। ये स्विफ्ट को टक्कर देगी, जो एक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क है। इससे रूसी बैंकों को 2022 में काट दिया गया था। इसके अलावा पश्चिम एशिया का बढ़ता संघर्ष भी रूस के एजेंडे में हैं। मॉस्को ने इस समिट को एक कूटनीतिक जीत के रूप में पेश किया है, जो पश्चिमी आधिपत्य को चुनौती देने के लिए गठबंधन बनाने में मदद करेगी।अमेरिका ने इस विचार को खारिज कर दिया है कि ब्रिक्स उसके लिए एक भूराजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बन सकता है लेकिन यूक्रेन संघर्ष के बढ़ने के साथ मॉस्को के कूटनीतिक ताकत दिखाने पर चिंता जताई है। रूस लगातार चीन, ईरान और उत्तर कोरिया के साथ अपने संबंधों को मजबूत कर रहा है। ये तीनों ही अमेरिका के विरोधी हैं। मॉस्को स्थित राजनीतिक विश्लेषक कोंस्टेंटिन कलाचेव ने एएफपी कोसे कहा कि ब्रिक्स के जरिए पुतिन ने दिखाया है कि वह अलग-थलग नहीं है बल्कि उसके पास बड़े साझेदार और सहयोगी हैं।
विकल्प पेश करना चाहता है रूस