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श्रीलंका में अमेरिका और इजरायल को डराने वाले आतंकी गिरफ्तार, कैसे भारत के खुफिया इनपुट से नाकाम हुआ खतरा, जानें

कोलंबो: भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका में इजरायली और अमेरिकी यात्रियों के संभावित खतरे की सूचना के बाद लोकप्रिय पर्यटन स्थल 'अरुगम बे' क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। बुधवार को अमेरिका और इजरायल ने सर्फिंग के लिए मशहूर इस इलाके से तत्काल दूर चले जाने को कहा था। श्रीलंका में अमेरिकी दूतावास ने कहा कि उसे 'अरुगम खाड़ी क्षेत्र में लोकप्रिय पर्यटन स्थलों को निशाना बनाकर किए जाने वाले संभावित आतंकवादी हमलों के बारे में विश्वसनीय जानकारी मिली है।'

इजरायल ने जारी किया था अलर्ट

अमेरिका की चेतावनी के बाद इजरायल ने भी अपने नागरिकों को इलाके से दूर जाने को कहा। इजरायल की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने अरुगम बे समेत श्रीलंका के दक्षिणी और पश्चिमी तटीय क्षेत्रों के लिए अपनी यात्रा सलाह को उच्चतम स्तर (लेवल 4) पर कर दिया। इजरायली नागरिकों को इन इलाकों को तुरंत छोड़ने की अपील की गई।

भारत के खुफिया इनपुट से हुई गिरफ्तारी

श्रीलंका की स्थानीय मीडिया ने गुरुवार को बताया कि इजरायली नागरिकों के खिलाफ आतंकी धमकियों के सिलसिले में दो श्रीलंकाई नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। इसमें भारत की अहम भूमिका रही है। संदिग्धों में एक इराक में रहता था और भारत से दी गई खुफिया जानकारी ने उनकी पहचान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इन गिरफ्तारियों के बाद श्रीलंका पुलिस ने अरुगम बे के आसपास सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए हैं। श्रीलंकाई पुलिस के प्रवक्ता निहाल थलदुवा ने बताया कि 'सूचना मिली थी कि इजरायलियों द्वारा संचालित चबाड हाउस नामक स्थान लक्ष्य हो सकता है। हमने सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कदम उठाए हैं।' थलदुवा ने यहूदी पर्यटकों और अरुगम खाड़ी के मुस्लिम बहुत समुदाय के बीच हाल ही में हुए तनाव को स्वीकार किया।

पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा

थलदुवा ने कहा कि स्थानीय पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है। सड़क पर अवरोधक लगा दिए गए हैं और वाहनों की जांच को सख्त कर दिया है। इसके अलावा श्रीलंका आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर भी व्यवस्था की गयी है। यहां गौर करने वाली बात है कि 2008 में मुंबई में हुए आतंकवादी हमलों में भी चबाड हाउस को निशाना बनाया गया था, जहां सात लोग मारे गए थे। चबाड हाउस यहूदियों का एक धार्मिक केंद्र होता है। रूढ़िवादी यहूदी चबाड आंदोलन के तहत इसे शुरू किया गया था। यह विभिन्न जगहों पर पाया जाता है, जिसका संचालन यहूदी करते हैं।

 

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