चीन-पाकिस्तान का मुकाबला करने के लिए रूस का हवाई योद्धा Su-57 खरीदेगा भारत! देशी प्रोजेक्ट में देरी से टेंशन, जानें ताकत
मॉस्को: भारत जल्दी ही रूस के फाइटर जेट Su-57 हासिल करने की ओर देख सकता है। इसकी वजह चीन और पाकिस्तान के 5वीं पीढ़ी के जेट हैं। इनका मुकाबला करने के लिए भारत रूसी Su-57 का अधिग्रहण कर सकता है। भारत के रूसी जेट की तरफ देखने की बड़ी वजह उसके अपने पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट, एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) के तैयार होने में हो रही देरी है। स्वदेशी विमान मिलने तक भारत रूसी जेट के जरिए अपनी सुरक्षा पुख्ता करना चाहता है।
डिफेंस इन की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का अपना पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट एएमसीए हासिल करना देश की बढ़ती रक्षा महत्वाकांक्षाओं का प्रमाण है। स्वदेशी रूप से डिजाइन यह विमान स्टील्थ तकनीक, सुपरक्रूज और उन्नत हथियार जैसी अत्याधुनिक क्षमताओं से लैस है लेकिन ये प्रोजेक्ट समय से नहीं चल रहा है।
एएमसीए में लग सकते हैं छह से सात साल
रिपोर्ट के मुताबिक, एएमसीए के एक उपयुक्त इंजन के तैयार होने में अभी छह से सात साल लग सकते हैं, जो कि एक लंबा समय है। इस देरी ने भारत को एक असुरक्षा का भाव दिया है क्योंकि क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी चीन और पाकिस्तान अपने पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के साथ आगे बढ़ रहे हैं। इसने भारत की चिंताओं को बढ़ाया है।
चीन ने चेंगदू जे-20 तैनात कर दिया है और एफसी-31 जैसे उन्नत लड़ाकू जेट विकसित कर रहा है। पाकिस्तान भी चीन के सहयोग से अत्याधुनिक लड़ाकू विमान हासिल कर रहा है। इस परिदृश्य ने भारत को अपने विकल्पों पर फिर सोचने और अपनी हवाई श्रेष्ठता बनाए रखने के लिए अतिरिक्त समाधानों पर विचार करने को प्रेरित किया है।
रूसी जेट बनेगा भारत के लिए विकल्प!
एएमसीए प्रोजेक्ट में देरी को देखते हुए भारत के लिए सबसे बेहतर समाधान के तौर पर रूस के सुखोई Su-57 फाइटर जेट का अधिग्रहण नजर आ रहा है। भारत को शुरू में इस जेट के इंजन और तकनीकी पहलुओं के बारे में चिंता थी लेकिन हाल के समय में ये दिक्कत दूर हुई है। विशेष रूप से इजडेली 30 (A51) इंजन के एकीकरण ने इन मुद्दों हल किया है। यह नया इंजन Su-57 की ताकत और क्षमताओं को बढ़ाता है।
Su-57 में उन्नत रडार और कम रडार क्रॉस-सेक्शन है, जो इसे एक दुर्जेय स्टील्थ विमान बनाता है। इन सुधारों और रूसी एयरोस्पेस बलों के भीतर इसकी पूर्ण परिचालन स्थिति के साथ, Su-57 को एएमसीए को तैनाती के लिए तैयार होने तक एक शानदार विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
भारत के लिए क्यों होगा फायदे का सौदा?
Su-57 की खरीद से भारत को कई फायदे होंगे। सबसे पहले तो भारतीय वायु सेना को चीन के जे-20 और दूसरे खतरों का मुकाबला करने के लिए पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू जेट मिल जाएंगे। दूसरे Su-57 भारत के सुखोई Su-30MKI लड़ाकू विमानों के मौजूदा बेड़े के साथ कई समानताएं रखता है। इससे इसका रखरखाव और ट्रेनिंग भारतीय एयरफोर्स के लिए आसान होगी।