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जम्मू-कश्मीर में सात दिनों में 'बाहरियों' पर तीसरा हमला, क्यों नहीं रुक पा रहे टेरर अटैक?

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के गांदरबल में 20 अक्टूबर को सुरंग निर्माण में लगे गैर-कश्मीरियों पर आतंकी हमले में अभी तक पुलिस और सीआरपीएफ के हाथ फरार आतंकवादी नहीं लगे हैं। इस बीच, आतंकवादियों ने गुरुवार सुबह पुलवामा के त्राल इलाके में एक और गैर-कश्मीरी मजदूर को निशाना बना डाला। गनीमत रही कि गोली उनकी बांह में लगी और उनकी जान बच गई। 

18 अक्टूबर से 24 अक्टूबर के बीच इन सात दिनों में आतंकवादियों द्वारा गैर-कश्मीरियों को टारगेट करके तीन हमले किए हैं। इससे जम्मू-कश्मीर में विभिन्न परियोजनाओं में काम कर रहे मजदूरों में डर का माहौल बन गया है। जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि फरार आतंकियों की तलाश जारी है। इस काम में कई एजेंसियां संयुक्त रूप से काम कर रही हैं। उम्मीद है कि जल्द ही कुछ सकारात्मक परिणाम सामने आए। फिलहाल फरार आतंकवादियों की तलाश ही की जा रही है।

मामले में एनआईए के एक अधिकारी ने बताया कि गांदरबल कश्मीर टेरर अटैक मामले में उनकी तीन टीम अलग-अलग एंगल को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही हैं। कुछ क्लू मिल रहे हैं, लेकिन फिलहाल इस मामले में अभी किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

राज्य के एक अन्य अधिकारी ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि असल में आतंकवादियों ने अपने दो-तीन सदस्यों के छोटे-छोटे ग्रुप बना लिए हैं। इन्हें लोकल सपोर्ट भी मिल रहा है। फिर, आतंकवादी हमला करके लोकल लोगों के बीच नहीं रहते, बल्कि यहां से भागकर पहाड़ियों और घने जंगलों में छिप जाते हैं। वहां ऑपरेशन करना बहुत अधिक आसान नहीं है।


सीसीटीवी में कैद जिस आतंकवादी के हाथ में एके-47 राइफल दिखाई दी है, उसके आगे नीले रंग का निशान है। इसी तरह की एके-47 राइफल पीर पंजाल इलाके में सुरक्षाबलों पर किए गए हमलों में भी की गई थी। इससे आशंका जताई जा रही है कि क्या आतंकवादियों में से कोई उस ग्रुप का भी तो नहीं। हालांकि, पीर पंजाल गगनगीर से करीब 200 किलोमीटर दूर है। 9 जून को रियासी अटैक के फरार आतंकवादियों को भी इस ग्रुप से जोड़कर देखा जा रहा है।

क्यों नहीं रुक पा रहे आतंकवादी हमले
जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव से पहले कई आतंकवादी हमले हुए, लेकिन चुनावों के दौरान एक भी हमला नहीं हुआ। चुनाव खत्म होने और सरकार बनने के कुछ दिन बाद फिर से आतंकी हमले होने शुरू हो गए हैं। इससे जानकारों का कहना है कि सुरक्षाबलों को आतंकवादियों से निपटने के लिए उसी तरह की रणनीति बनानी चाहिए, जो उन्होंने चुनाव के दौरान बनाई थी। हालांकि, चुनाव के दौरान पूरे जम्मू-कश्मीर में बड़ी संख्या में बीएसएफ, सीआरपीएफ और अन्य पैरा मिलिट्री फोर्स को लगाया गया था, लेकिन जिस तरह से आतंकी हमले हो रहे हैं, उसे देखते हुए लगता है कि जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा के लिए कुछ खास रणनीति पर काम करना होगा। खासतौर से यहां रह रहे बाहरी लोगों की जिंदगी की सुरक्षा को देखते हुए।

 

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